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कविता

गायब हो जाना अचानक एक दिन बढ़ती हुई भूख का
सुजाता


दो गुलाबी समानांतर रेखाएँ...
यह तीसरी बार था
मुझे याद है
नसों में एनेस्थीसिया
भर देने से ठीक पहले
वह कह रहा था
मेरी भी एक ही है दुलारी
कई तारों के होने से एक चाँद होना
बेहतर है
सो जाओ
सब ठीक होगा
तुम गलत नहीं हो

बीच का वक्त
जब सब कुछ खींच लिया गया था बाहर
वह नहीं घटा था मुझ पर मेरी याद में

मैं जागी थी किसी और दुनिया में
जहाँ नाभि के नीचे
भीतर तक नोच लिए जाने का अहसास था

मैंने देखा था
पिछले चंद दिनों में
चौगुनी होती
एकदम सच्ची
शुद्ध
अपने पेट की भूख को
उसी दिन अचानक गायब होते

और जाना यह भी
कि
मरने के लिए
एनेस्थीसिया
कितना सुंदर है !


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