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रचनावली

हरिऔध् ग्रंथावली
खंड : 7
पुस्तक और पुस्तक की भूमिकाएँ

अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध

संपादन - तरुण कुमार

अनुक्रम

अनुक्रम गुड़मार की बेल     आगे

मुझे कहें अजगंधिनी
मधुनाशिनी गुड़मार
मेरा पान चबाइए
सुख का होय प्रसार

सुख का होय प्रसार
खाइए अर्क पीजिए
यों विकार मधुमेह रोग
का दूर कीजिए

मेरे सेवन से शक्कर पर
होय नियंत्रण
इसीलिए तो है उपयोगी
मेरा हर कण

मेरी बहु शाखाएँ पीली
ऊपर जातीं
पत्ती लंबी तीन इंच
लेकिन कम चौड़ी

मेरी पत्ती का उपयोग
वैद्य ऋषि करते
अर्क बढ़ाता इंसुलीन
सारे दुख झरते

हिंदी नाम - गुड़मार
वैज्ञानिक नाम - जिम्नेमा सिल्वेस्टर
परिवार - एस्कलेपिडेसी
प्रयोग में लाया जाने वाला भाग - पत्तियाँ
उपयोग - मधुमेह, श्वासरोग, यकृत से संबंधित रोगों में उपयोगी


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