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व्यंग्य

चचा साम के नाम मंटो के खत
सआदत हसन मंटो

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मोहतरमी चचाजान,

तस्‍लीमात!

मैं अब तक आपको 'प्‍यारे चचाजान' से खिताब करता रहा हूँ, पर अब की दफा मैंने 'मोहतरमी चचाजान' लिखा है, इसलिए कि मैं नाराज हूँ - नाराजगी का कारण यह है कि आपने मुझे मेरा तोहफा, एटम बम, अभी तक नहीं भेजा है। बताइए, यह भी कोई बात है।

सुना था कि बाप से ज्यादा चचा बच्‍चों से प्‍यार करता है, लेकिन ऐसा मालूम होता है कि आपके अमरीका में ऐसा नहीं होता - मगर वहाँ बहुत-सी ऐसी बातें नहीं होतीं, जो यहाँ होती हैं। उदाहरण के तौर पर यहाँ आए दिन सरकारें बदलती हैं, जबकि आपके यहाँ ऐसा कोई सिलसिला नहीं होता - यहाँ नबी (अवतार) पैदा होते हैं, वहाँ नहीं होते। यहाँ उनके माननेवाले विदेशमंत्री बनते हैं। इस पर मुल्‍क में हंगामें दंगे-फसाद होते हैं, मगर कोई सुनवाई नहीं होती इन हंगामों पर जाँच कमीशन बैठता है और उसके ऊपर कोई और बैठ जाता है। वहाँ इस किस्‍म की कोई दिलचस्‍प बात नहीं होती।

चचाजान, मैं आपसे पूछता हूँ, आप अपने यहाँ नबी (अवतार) क्‍यों पैदा नहीं होने देते? खुदा की कसम, एक पैदा कर लीजिए, खयाल बड़ा दिलचस्‍प है। बुढ़ापे में वह आपकी लाठी का काम देगा और इस लाठी से आप अमरीका की सारी भैंसें हाँक सकेंगे-भैंसें तो यकीनन आपके यहाँ जरूर होंगी।

अगर आप नबी (अवतार) पैदा करने में किसी वजह से मजबूर हों तो मुझे हुक्म दीजिए। मैं मिर्जा वशीरुद्दीन महमूद सा‍हब से गुजारिश करूँगा। वह अपना शाहजादा भेज देंगे - जल्‍दी लिखिएगा। ऐसा न हो, आपके दुश्‍मन रूस से माँग आ जाए और आप मुँह देखते रह जाएँ।

बात एटम बम की थी, जो मैंने आपसे तोहफे के तौर पर माँगा था और मैं नबी (अवतार) और उनके बेटों की तरफ चला गया - हाँ, कितनी मामूली बात थी। मैंने सिर्फ एक छोटा, बहुत ही छोटा एटम बम माँगा था, जिससे मैं एक ऐसे आदमी को उड़ा सकता, जो मुझे अपनी घेरेदार शलवार के अंदर हाथ डालकर ढेला लगाता नजर आता है - लेकिन ऐसा मालूम होता है कि आपने मेरी तमन्‍ना की गहराई को महसूस नहीं किया, या शायद आप हाइड्रोजन बमों के अनुभव में व्‍यस्‍त थे।

चचाजान, यह हाइड्रोजन बम क्‍या बला है - आठवीं क्‍लास में हमने पढ़ा था कि हाइड्रोजन एक गैस होती है, हवा से हल्‍की - आप इस दुनिया के ग्‍लोब से किस देश का बोझ हल्‍का करना चाहते हैं - रूस का?

मगर सुना है, वह कमबख्त नाइट्रोजन बम बना रहा है - आठवीं क्‍लास ही में हमने पढ़ा था कि नाइट्रोजन एक गैस होती है, जिसमें आदमी जिंदा नहीं रह सकता - मेरा खयाल है, आप इसके जवाब में ऑक्‍सीजन बम बना दें - आठवीं क्‍लास ही में हमने पढ़ा था कि नाईट्रोजन और आक्‍सीजन गैसें जब आपस में मिलती हैं तो पानी बन जाता है - क्‍या ही मजा आएगा - उधर रूस नाइट्रोजन बम फेंकेगा, इधर आप आक्‍सीजन बम। बाकी दुनिया पानी में डुबकियाँ लगाएगी।

खैर यह तो मजाक की बात थी - सुना है, आपने हाइड्रोजन बम सिर्फ इसलिए बनाया है कि दुनिया में पुरअम्‍न कायम हो जाए - यूँ तो अल्‍लाह ही बेहतर जानता है, लेकिन मुझे आपकी बात पर विश्‍वास है। एक इसलिए कि मैंने आपका गेहूँ खाया है, और फिर मैं आपका भतीजा हूँ बुजुर्गों की बात यूँ भी छोटों को फौरन माननी चाहिए, लेकिन मैं पूछता हूँ, अगर आपने दुनिया में पुरअम्‍न कायम कर लिया तो दुनिया कितनी छोटी हो जाएगी। मेरा मतलब है, कितने मुल्‍कों का वजूद ही बर्बाद हो जाएगा - मेरी भतीजी जो स्‍कूल में पढ़ती है, कल मुझसे दुनिया का नक्शा बनाने को कह रही थी। मैंने उससे कहा : "अभी नहीं… पहले मुझे चचाजान से बात कर लेने दो… उनसे पूछ लूँ, कौन-सा मुल्‍क रहेगा और कौन-सा नहीं रहेगा, फिर तुम्हारे लिए नक्‍शा बना दूँगा।" खुदा के लिए रूस को सबसे पहले उड़ाइएगा - उससे मुझे खुदा वास्‍ते का बैर है।

सात-आठ दिन हुए, रूस के फनकारों का एक ग्रुप आया था। शुभ कामनाएँ बाँट कर, मेरा खयाल है, अब वापस चला गया है। इस ग्रुप में नाचने और गानेवालियाँ थीं, जिन्‍होंने नाच-गाकर हमारे सादा लोह पाकिस्‍तानियों का दिल मोह लिया - अब आप इसके तोड़ में जब तक वहाँ से कोई ऐसा गाता-बजाता, नाचता-थिरकता सद्भावना दल नहीं भेजेंगे, काम नहीं चलेगा।

मैंने आपसे पहले भी कहा था कि हालीवुड की मिलियन डालर टाँगोंवाली लड़कियाँ यहाँ रवाना कर दीजिए, मगर आपने अपने कम अक्ल भतीजे की इस बात पर कोई गौर न किया और हाइड्रोजन बम के अनुभवों में व्‍यस्‍त रहे। किबला, जादू वह है, जो सर चढ़कर बोले।

जरा अपने पाकिस्‍तान के दूतावास से पूछिए - यहाँ हर एक जबान पर तामारा खानम और मादाम आशूरा का नाम है।

यहाँ का एक बहुत बड़ा उर्दू अखबार 'जमींदार' है। इसके एडिटर बड़े जाहिद और खुश्‍क किस्‍म के नौजवान हैं। उन पर इस रूसी दल ने इतना असर किया कि वह प्रोज में शाइरी करने लगे। एक पैरा मुलाहिजा फरमाइए :

'जब वह गा रही थी खचाखच भरे हुए ओपन एयर थिएटर में सामिईन के साँस लेने की आवाज साफ सुनाई दे रही थी। थिएटर पर झुका हुआ तारों भरा आसमान और स्‍टेज के चारों तरफ उभरे हुए सरसब्‍ज दरख्त भी दम-ब-खुद थे और गंभीर सन्‍नाटे में एक कोयल कूक रही थी। उसकी तेज गहरी और रूह को चीर देनेवाली आवाज तारीक रात के सीने में जाबजा अनदेखी रोशनी के गहरे घाव डाल रही थी।'

पढ़ लिया आपने?

चचाजान, यह मामला बहुत संगीन है। हाइड्रोजन बमों को फिलहाल छोड़िए और इस तरफ ध्‍यान दीजिए - आपके पास क्‍या हसीनाओं की कमी है। बुरी नजर ना लगे, एक-से-एक पटाखा-सी मौजूद हैं, लेकिन मैं आपको एक सलाह दूँगा - जितनी भेजिएगा, सबकी टाँगे मिलियन डालर किस्‍म की हों और वह हमारे पाकिस्‍तानी मर्दों को चुम्‍मा देने से न घबराएँ - मैं आपसे वादा करता हूँ कि अगर आपने एक जहाज भर कोलीन्‍स टूथपेस्‍ट भेज दी तो मैं सबके दाँत साफ करा दूँगा। उनके मुँह से बू नहीं आएगी।

आप मेरी बात मान गए तो मैं आपकी सात आजादियों की कसम खाके कहता हूँ कि रूस वालों के छक्‍के छूट जाएँगे और तामारा खानम और मादाम आशूरा टापती रह जाएँगी और 'जमींदार' के एडिटर को दिन में तारे नजर आने लगेंगे। लेकिन चचाजान, एक बात सुन लीजिए। अगर आपने एलिजाबेथ टेलर को भेजा तो उसके चुम्‍मे सिर्फ मेरे लिए रिजर्व होंगे। मुझे उसके होंठ बहुत पसंद है।

हाँ, इस सद्भावी दल में कहीं उस हब्‍शी गवैए पाल राब्‍सन को शामिल न कर लें -कम्‍युनिस्‍ट है साला। मुझे हैरत है, आपने उसे अभी तक र्इस्‍ट अफ्रीका क्‍यों नहीं भेजा! वहाँ उसे बड़ी आसानी से माव टाव की तहरीक में गिरफ्तार करके गोली से उड़ाया जा सकता है।

मैं इस खैरअंदेशी दल का बेचैनी से इंतजार करूँगा और 'नवाए-वक्त' के संपादक से कहूँगा कि वह अभी से इसका प्रोपेगंडा शुरू कर दे। बड़ा नेक और बरखु़र्दार किस्‍म का आदमी है। मेरी बात नहीं टालेगा - वैसे आप उसे तोहफे के तौर पर रीटा हवर्थ की ओटोग्राफ्ड तस्‍वीर भिजवा दीजिएगा। बेचारा इसी में खुश हो जाएगा।

मैं यह भी वादा करता हूँ कि जब आपका यह खैरअंदेशी दल लाहौर में आएगा तो मैं उसे हीरा मंडी की सैर कराऊँगा, शोरिश काश्‍मीरी साहब को मैं साथ ले चलूँगा कि वह इस इलाके के पीर हैं - हाल ही में आपने इस इलाके पर एक किताब भी लिखी है, जिसका उनवान 'उस बाजार में' है - आप अपने दूतावास को हुक्‍म दीजिए कि वह आपको शोरिश काश्‍मीरी साहब की किताब का अनुवाद कराके भेज दे। यहाँ एक-से-एक चमकता हुआ हीरा पड़ा है, हर तराश का और हर वजन का।

अब और बातें शुरू करता हूँ।

पाकिस्‍तान को आपके फौजी इमदाद देने के फैसले और मशरिकी बईद के दूसरे मामलों पर भारत और आपके मतभेदों पर पंडित नेहरू ने पिछले दिनों जो जबर्दस्‍त नुक्‍ताचीनी की थी, सुना है, उसका रद्दे अमल यह हुआ है कि आपके मुल्‍क की कूटनीति में एक नया रुझान पैदा हुआ है। कुछ की राय है कि अमरीका भारत को अपने वायदों के संबंध में तसल्‍ली दिलाने की जरूरत से ज्यादा कोशिश कर रहा है।

आपके दक्षिणी एशियाई और अफ्रीका सैल के बड़े अफसर क्‍या नाम है उनका - हाँ, मिस्‍टर जान जोनीगंज ने अपने एक बयान में भारत के लिए अपने देश के खैरख्वाही वाले खयालात का इजहार किया है। इसका तो यह मतलब निकलता है कि वाशिंगटन अब नई दिल्‍ली का एतिमाद हासिल करने के लिए तड़प रहा है।

जहाँ तक मैं समझा हूँ, पाकिस्‍तान और भारत को खु़श रखने से आपका सिर्फ और सिर्फ एक उद्देश्‍य यही है कि जहाँ कहीं भी आजादी और लोकतंत्र का टिमटिमाता दीया जल रहा है, उसे फूँक से न बुझाया जाए बल्कि उसको, तेल में डुबो दिया जाए ताकि वह फिर कभी अपनी प्‍यास की शिकायत न करें, है ना चचाजान!

आप पाकिस्‍तान को आजाद देखना चाहते हैं इसलिए कि आपको दर्रा-ए-खैबर से बे-हद प्‍यार है, जहाँ से हमलाआवर सदियों से हम पर हमला करते रहे हैं। असल में दर्रा-ए-खैबर है भी बहुत खूबसूरत चीज। इससे प्‍यारी और खूबसूरत चीज पाकिस्‍तान के पास और है भी क्‍या?

और भारत को आप इसलिए आजाद देखना चाहते हैं कि पोलैंड, चेकोस्‍लोवाकिया और कोरिया में रूस की हानिकारक कार्रवाइयाँ देखकर आपको हर दम इस बात का खटका रहता है कि यह मुल्‍क कहीं भारत में भी दरांतियाँ और हथौड़े चलाना शुरू न कर दे - जाहिर है कि भारत की आजादी खुदा ना ख्वास्‍ता छिन गई तो कितनी बड़ी आफत होगी। इसके महज खयाल से ही आप काँप उठते होंगे।

आपकी तारोंवाली ऊँची टोपी की कसम, आप-जैसा शरीफ इंसान कभी पैदा हुआ है और न होगा - खुदा आपकी उम्र दराज करे और आपकी सात आजादियों को दिन दुगनी और रात चौगुनी तरक्की दे।

यहाँ एक इलाका है पश्चिमी पंजाब। इसके वजीरेआला हैं फीरोज खाँ नून - उनकी बेगम एक अंग्रेज खातून हैं। हाल ही में आपने अपने आलीशान बँगले पर जो पंचौली फिल्‍म स्‍टूडियो के आगे है, एक कॉन्‍फ्रेंस बुलाई। इसमें आपने मुस्लिम लीग के, जिसे मशरिकी पाकिस्‍तान में हार हुई है, कार्यकर्ताओं को सलाह दी कि वह अपने-अपने इलाकों में कम्‍युनिस्‍टों के मुकाबले के लिए संघर्ष करें।

देखिए चचाजान, आप फौरन खाँ नून साहब का शुक्रिया अदा कीजिए और सद्भावना के तौर पर उनकी बेगम साहिबा के लिए हालीवुड के सिले हुए दो-तीन हजार फ्राक भेल दीजिए - कहीं आपने भेज तो नहीं दिए? मैं भूल गया था, क्‍योंकि अब वह साड़ी पहनती हैं।

बहरहाल नून साहब का कम्‍युनिस्‍टों का दुश्‍मन होना बड़ा नेक शगुन है, क्‍योंकि कामरेड फीरोजउद्दीन मनसूर फिर जेल में होगा। मुझे उसका हर वक्त दमे के मर्ज में गिरफ्तार रहना एक आँख नहीं भाता।

अब मैं आपको एक बड़ी अच्‍छी सलाह देता हूँ - हमारी हुकूमत ने हाल ही में कामरेड सिब्‍ते हसन को जेल से रिहा किया है। आप उसको अगवा करके ले जाइए। मेरा दोस्‍त है, लेकिन मुझे डर लगता है कि वह अपनी प्‍यारी-प्‍यारी नर्म-नर्म बातों से एक रोज मुझे जरूर कम्‍युनिस्‍ट बना लेगा - मैं इतना डरपोक भी नहीं कि कम्‍युनिस्‍ट हो जाने पर मेरा कुछ बिगड़ जाएगा, मगर मैं नहीं चाहता कि आपकी इज्जत पर कोई हर्फ आए। लोग क्‍या कहेंगे! आपका भतीजा और ऐसे बुरे दलदल में जा धँसा - मेरी इस बरखु़र्दारी पर एक शाबाशी तो भेजिए।

अब मैं रोजगार के सूरतेहाल की तरफ आता हूँ - चचाजान, आपकी रीश मुबारक की कसम, दिन बहुत बुरे गुजर रहे हैं। इतने बुरे गुजर रहे हैं कि अच्‍छे दिनों के लिए दुआ माँगना भी भूल गया हूँ। यह समझिए कि बदन पर लत्ते झूलने का जमाना आ गया है। कपड़ा इतना महँगा हो गया है कि जो गरीब हैं, उनको मरने पर कफन भी नहीं मिला और जो जिंदा हैं, वह तार-तार लिबास में नजर आते हैं - मैंने तो तंग आकर सोचा है कि एक 'नंगा क्‍लब' खोल दूँ, लेकिन सोचता हूँ नंगे खाएँगे क्‍या - एक-दूसरे का नंग? और वह भी इतना बदशक्ल होगा कि निवाला उठाते ही वहीं रख देंगे।

कोई वीरानी-सी-वीरानी है, कोई नंगी-सी नंगी है, कोई खट्टी-सी-खट्टी है, लेकिन चचाजान, दाद दीजिए :

गो मैं रहा रहीने सितम हाय रोजगार
    लेकिन तेरे खयाल से गाफिल न रहा

लेकिन छोड़िए इस किस्‍से को - आप खूबसूरत और सुंदर चाल वाली हसीनों का वह खैरअंदेशी दल भेज दीजिए। हम इस गुर्बत में भी अपना जी दिल बहला लेंगे। (पशौरी कर लेंगे)

फिलहाल आप एलिजाबेथ टेलर के होंठों का एक प्रिंट भेज दीजिए। खुदा आपको खुश रखे।

आपका ताबेदार भतीजा

सआदत हसन मंटो

1954

31, लक्ष्‍मी मैन्‍शंज, हॉल रोड लाहौर।


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