hindisamay head
डाउनलोड मुद्रण

अ+ अ-

कविता

चुम्बन
सूर्यकांत त्रिपाठी निराला


लहर रही शशिकिरण चूम निर्मल यमुनाजल,
चूम सरित की सलिल राशि खिल रहे कुमुद दल

कुमुदों के स्मिति-मन्द खुले वे अधर चूम कर,
बही वायु स्वछन्द, सकल पथ घूम घूम कर

है चूम रही इस रात को वही तुम्हारे मधु अधर
जिनमें हैं भाव भरे हु‌ए सकल-शोक-सन्तापहर !


End Text   End Text    End Text

हिंदी समय में सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की रचनाएँ