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व्यंग्य

एंकर के लिए इंटरव्यू
राजकिशोर


टीवी कुमारी ने जब इंटरव्यू कक्ष में प्रवेश किया, तो वहाँ की रोशनी थोड़ी-सी और बढ़ गई। उसे देखते ही लगता था कि वह निकली तो थी किसी फिल्म की शूटिंग के लिए, पर पता नहीं क्या सोच कर वह इस टीवी चैनल में आ गई। शायद ईश्वर ने उसे भेजा ही था टीवी पर एंकरिंग करने के लिए। यह भी हो सकता है कि ईश्वर ने उसे किसी और काम के लिए भेजा हो, पर उसने तय कर लिया हो कि उसे एंकरिंग ही करनी है और अपने को इस योग्य बनाने में उसने अपनी सारी प्रतिभा झोंक दी हो। नतीजा सामने था। परीक्षण के लिए उस टीवी चैनल के तीन अधिकारी उपस्थित थे- बाएँ, दाएँ और मध्य में।

पहला सवाल मध्य ने किया - तो आप एंकर बनना चाहती हैं! कुमारी ने जवाब दिया - यस, सर। बाएँ ने पूछा - लेकिन क्यों? टीवी में और काम भी तो होते हैं। कुमारी - सर, एंकरिंग में ग्लैमर है, पैसा है और अपने को साबित करने का मौका भी। मुझे एंकरिंग करना बहुत पसंद है। अब दाएँ की बारी थी - आपने पत्रकारिता की पढ़ाई कहाँ से की है? कुमारी ने बताया - सर, विवेकानंद स्कूल ऑफ जर्नलिज्म से। दायाँ - विवेकानंद के बारे में आप कुछ बता सकती हैं? कुमारी - वे आरएसएस के बहुत बड़े नेता थे। दायाँ, बायाँ और मध्य तीनों एक-दूसरे की ओर देखकर मुसकराए। बायाँ - उनकी मेन टीचिंग क्या थी? कुमारी के चेहरे पर हलकी-सी छाया पड़ी, पर उसने जल्द ही अपने को उबार लिया - सर... सर... वे पगड़ी पहनते थे। उनका चेहरा गोल-सा था। पर्सनालिटी बहुत ही रोबीली थी। सभी उनकी इज्जत करते थे। मध्य से नहीं रहा गया। उसने पूछा - अगर आपको स्वामी विवेकानन्द से इंटरव्यू करना पड़े, तो आप पहला सवाल क्या पूछेंगी? टीवी कुमारी कुछ देर तक सोचती रही। फिर उसने कहा - सर, मेरे पास दो सवाल हैं। इनमें से जो भी आप लोग पसंद करेंगे, वहीं मैं उनसे पूछँगी। नंबर एक, बाबरी मस्जिद गिराने के बाद आपका अगला कार्यक्रम क्या है? राम मंदिर के कंस्ट्रक्शन में इतनी देर क्यों हो रही है? नंबर दो, पहले आपके जीवन से ही शुरू करते हैं। अच्छा यह बताइए कि आपने अभी तक विवाह क्यों नहीं किया? क्या आपके जीवन में कभी कोई लड़की नहीं आई? इंटरव्यू लेने वाले खुल कर हँसने लगे। टीवी कुमारी ने इसे अपनी सफलता समझा।

मध्य ने बात आगे बढ़ाई - तो आप मानती हैं कि प्रत्येक पुरुष की जिंदगी में किसी लड़की का आना जरूरी है? बायाँ और दायाँ थोड़ा चौकन्ने हो गए। टीवी कुमारी मुसकराई। उसने कहा - सर, मेरे मानने-न मानने से क्या होता है? यह तो एक फैक्ट है। मध्य - तब तो इसका उलटा भी सही होगा। इन अदर वर्ड्स, प्रत्येक लड़की की जिंदगी में किसी लड़के का आना भी जरूरी है। कुमारी थोड़ा सावधान हुई। आगे पानी गहरा था। उसने कहा - इस बारे में मैं क्या कह सकती हूँ? अपनी-अपनी च्वाइस है। बायाँ - आपकी अपनी च्वाइस क्या रही है? टीवी कुमारी ने अपने को असमंजस में पाया। अभी तक उसकी शादी नहीं हुई थी। सच का सामना करने में कठिनाई थी। उसने कहा - सर, यह मेरा प्राइवेट मामला है। इस बारे में मैं कुछ कहना नहीं चाहती। दायाँ बहुत देर से चुप था। उसने जानना चाहा - लेकिन टीवी इंडस्ट्री में तो कोई भी मामला किसी का प्राइवेट मामला नहीं होता। फिर तो यहाँ आपको बहुत मुश्किल होगी! कुमारी - जब मैं टेंथ में पढ़ती थी, तभी से यह कहावत मुझे याद है - लिव इन रोम एज रोमंस डू। इसलिए मुझे कहीं परेशानी नहीं होती। मध्य - क्या आपको पता है कि टीवी की दुनिया में क्या होता है? कुमारी - कुछ-कुछ पता है। लेकिन मैं हर चीज को एक चैलेंज की तरह लेती हूँ। बायाँ - बाप रे, फिर तो आप लड़ाकू किस्म की लड़की होंगी। कुमारी - चाहे जो कह लीजिए। वैसे मुझे लड़ने के मुकाबले एडजस्टमेंट करना ज्यादा पसंद है। मैं जानती हूँ कि मेरे चाहने से तो दुनिया बदलेगी नहीं। बदलना तो मुझे ही होगा। मध्य - यहाँ आप किस लेवेल तक समझौता करने को तैयार हैं? कुमारी कुछ बोलना चाहती थी, पर अचानक चुप हो गई। कुछ क्षणों के बाद उसने सिर थोड़ा-सा झुका लिया।

मध्य ने टीवी कुमारी को आश्वस्त करना चाहा - आप शरमाइए मत। हमारे यहाँ वह सब नहीं होता जिसके लिए दूसरे चैनल बदनाम हैं। यहाँ का माहौल बहुत डीसेंट हैं। आपके कंसेंट के बिना कोई आपको छू भी नहीं सकता। सेक्सुअल हैरसमेंट के कारण हमने अभी-अभी दो एडिटरों को निकाला है। टीवी कुमारी ने अब अपना सिर थोड़ा-सा उठाया। होंठों पर हलकी-सी मुस्कराहट भी आ गई थी, जो बता रही थी कि उसे विषयवस्तु से नहीं, अभिव्यक्ति की शैली से समस्या थी। उधर मध्य जारी था - यह और बात है कि हम किसी पर रिस्ट्रिक्शन भी नहीं लगाते। फ्री मिक्ंिसग के बिना टीवी चैनल चल ही नहीं सकते। समझौते से हमारा मतलब यह था कि आपको एंकर बने रहने के लिए फिजिकल फिटनेस पर बहुत ध्यान देना होगा। अपना वेट मेनटेन करना होगा। आप समझ सकती हैं, यह शो बिजनेस है। यहाँ अपीयरेंस का बहुत महत्व है। टीवी कुमारी - यह सब तो मैं अभी ही करती हूँ। आगे भी करती रहूँगी। इसमें कोई मुश्किल नहीं होगी। दायाँ - देर तक रुकना पड़ सकता है। नाइट ड्यूटी लग सकती है। स्टाफ के साथ बाहर ट्रैवल करना पड़ सकता है। यह सब तो आप जानती ही होंगी। कुमारी - जी, मुझे पता है। मध्य - तो ठीक है, आप जाइएगा नहीं। बाहर ही इंतजार कीजिए। तब तक हम कुछ और इंटरव्यू ले लेते हैं।

टीवी कुमारी कमरे से निकल रही थी, तो उसके पैर जमीन पर नहीं पड़ रहे थे। उसके बाहर जाने के बाद परीक्षकों में से एक ने कहा - तैयार चीज है! इस पर ज्यादा काम नहीं करना होगा!


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