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व्यंग्य

महाशक्ति की दीनता
राजकिशोर


अमेरिका से परमाणु करार होने के बाद भारत महाशक्ति हो गया है। यह मनमोहन सिंह तो मानते ही हैं, वे सभी लोग कहते हैं जो उन्हें आदर्श प्रधानमंत्री मानते हैं। परमाणु करार की शर्तों को लेकर जब-तब अमेरिका कुछ ऐसी बात कह देता है, जिसे लेकर हमारे यहाँ बवाल मच जाता है। इसे गंभीरता से नहीं लेना चाहिए। जब अमेरिका महाशक्ति बना था, तब वहाँ कोई बवाल नहीं मचा था। जब चीन महाशक्ति हो गया, तब भी उस देश के भीतर कोई वाद-विवाद नहीं हुआ था। लेकिन भारत महाशक्ति होने की आग में झुलस रहा है। वामपंथी दलों ने विद्रोह कर दिया। मनमोहन सिंह की सरकार जाते-जाते बची। उसके बाद भी गुल गपाड़ा होता रहता है। यह सब इसलिए कि भारत सरकार उधार का सिंदूर लगा कर सुहागन होना चाहती है। एक गरीब देश जब महाशक्ति होने की राह पर चल पड़ा है, तो मुश्किलें तो आएँगी ही। भारत के लोग अपने अनुभव से जानते हैं कि कानी के ब्याह में सैकड़ों मुश्किलें आती हैं। जब ब्याह की रस्में पूरी हो जाएँगी और भारत सरकार यूरेनियम की बिंदी लगा कर इठलाते हुए सड़क पर निकलेगी तब देखना।

एक सीधा-सादा नागरिक होने के नाते, मैं किसी झंझट में नहीं पड़ता। मुझे आम खाने से मतलब है न कि पेड़ गिनने से। राजनीतिक दल अपना घमासान जारी रखें। यह उन्हें शोभा देता है। मेरे लिए यह खबर ही काफी है कि भारत महाशक्ति हो गया है या एक दो तीन के बाद हुआ ही चाहता है। इससे हमारी पता नहीं कितनी समस्याएँ हल हो जाएँगी। लेकिन आम भारतीय की तरह मैं भी थोड़ा शक्की हूँ। अखबार में जो कुछ छपता है या टीवी पर जो कुछ बताया जाता है, उस पर पूरा यकीन नहीं करता। दूध का जला छाछ भी फूँक-फूँक कर पीता है। सो मैंने सोचा कि जरा एक-दो जगह जा कर पता लगाया जाए कि भारत के महाशक्ति होने का हमारे जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

सबसे पहले मैं अपने इलाके के डीपीसी के यहाँ गया। वह मेरा मित्र तो नहीं है, लेकिन चूँकि मैं पत्रकारिता के पेशे में रहा हूँ, इसलिए हम दोनों एक-दूसरे को मित्र ही मानते हैं। वह तपाक से मिला। आज बहुत खुश था, क्योंकि कई महीनों के बाद उसके इलाके में पिछले दिन न कोई हत्या हुई थी, न बलात्कार हुआ था। यहाँ तक कि मामूली मारपीट भी नहीं हुई थी। मालूम हुआ कि कुछ समय से वह शनि देवता की पूजा कर रहा है। हर शनिवार को उपवास रखता है और शनि मंदिर में जा कर पाँच सौ एक रुपए का चढ़ावा चढ़ाता है। उसने बताया, 'लगता है, शनि महाराज अब जाकर प्रसन्न हुए हैं। कल देखो, मेरे इलाके में कोई क्राइम नहीं हुआ।' दूसरों को पंक्चर करने में मुझे मजा आता है। मैंने कहा, 'हो सकता है, कल अपराधियों ने छुट्टी मनाई हो। वे भी तो अपराध करते-करते थक जाते होंगे। उन्हें भी तो रेस्ट चाहिए। असली सवाल तो यह है कि बकरे की माँ कब तक खैर मनाएगी।' यह सुनते ही उसका मुँह लटक गया।

मित्र ही मित्र के काम आता है। अतः उसे तसल्ली देते हुए मैंने कहा, 'घबराने की बात नहीं है। तुम्हारी सारी समस्याएँ जल्द ही सुलझने वाली हैं।' उसके चेहरे पर हलकी-सी चमक आई। उसने पूछा, 'कैसे?' मैंने बताया, 'लगता है, आजकल तुम अखबार नहीं पढ़ते। नहीं तो तुम्हें पता होता कि भारत महाशक्ति हो गया है। अब उसकी शक्ति बढ़ गई है। वह अमेरिका और चीन की पंक्ति में आ गया है।' 'तो मुझे क्या? या पुलिस विभाग को क्या?' - उसने इस निराशा के साथ सवाल किया जैसे मैंने पहाड़ खोदा हो और उसके हाथ चुहिया लगी हो।

'तुम्हारा दिमाग तो ठीक है? अरे, जब भारत महाशक्ति हो गया है, तो देश में अपराध कम नहीं होने लगेंगे? गुंडे, तस्कर, आदमियों की तस्करी करनेवाले, डकैत, बलात्कारी, रिश्वतखोर, सुपारी लेनेवाले, काले धन की सर्विसिंग करनेवाले, सट्टाखोर, रक्षा सौदों में कमीशन लेनेवाले - ये सब भारत की इस नई शक्ति-संपन्नता से डरेंगे नहीं? तुम्हें तो पता ही है, अपराधियों की खुफिया जानकारी हमसे तेज होती है। सरकार जो बात हमें आज बताती है, वह उन्हें कई हफ्ते पहले पता लग जाती है। तभी तो देश चल रहा है। नहीं तो कभी का ठप हो जाता।'

मित्र अधीर होने लगा था। बोला, 'यह कोई जन सभा नहीं है। साफ-साफ बताओ, कहना क्या चाहते हो?'

मैंने स्पष्ट करने की कोशिश की, 'अब हत्यारे हत्या करने से पहले पंद्रह बार सोचेंगे कि हत्या करें या नहीं, क्योंकि भारत महाशक्ति हो गया है और हमारे साथ पता नहीं क्या सलूक करे। मुनाफाखोर उद्योगपति और व्यापारी तो थर-थर काँपने लगेंगे। दंगाइयों का तो नामो-निशान मिट जाएगा। महाशक्ति के सामने वे कहाँ ठहरेंगे? गुंडे-बदमाश खुद थाने में आकर अपने हथियार जमा कर देंगे। भ्रष्टाचार करने वाले छिप कर भी भ्रष्टाचार नहीं करेंगे। उनमें यह खौफ फैल जाएगा कि महाशक्ति भारत उन्हें पता नहीं कितनी कठोर सजा दे। जब मुकदमे कम हो जाएँगे, तो मजिस्ट्रेट और जज अदालतों में मक्खी मारते नजर आएँगे। भारत में रामराज्य आ जाएगा।'

यह सुन कर मित्र हो-हो कर हँसने लगा। बोला, 'तुम्हारी शक्ल देखते ही मैं समझ गया था कि आज सबेरे-सबेरे ही भाँग चढ़ा ली है। अब साबित भी हो गया।'

इसके बाद कहीं और जाने की इच्छा नहीं हुई। घर लौटा और चादर तान कर सो गया।


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