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व्यंग्य

भारत सरकार के तीन वक्तव्य
राजकिशोर


भारत-पाकिस्तान सम्बन्ध : भारत-पाकिस्तान वार्ता का यह चरण बहुत ही सफल रहा। सौहार्दपूर्ण वातावरण में हमने अनेक विषयों पर महत्वपूर्ण बातचीत की। दोनों ही देशों ने खुल कर अपना पक्ष रखा। यह वार्ता के इस चरण की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह जरूर है कि हम किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुँच सके। लेकिन हम कोई बड़ी आशा लेकर गए भी नहीं थे। दूसरा पक्ष भी विशेष आशान्वित नहीं था। इसलिए हम निराश नहीं हैं। हमें सर्वाधिक प्रसन्नता इस बात की है कि हमारी बातचीत बहुत ही अच्छे माहौल में हुई। हमने एक-दूसरे के पक्ष को सहानुभूति से समझने की कोशिश की। यह बात भी गौर करने लायक है कि दोनों ही देश गहराई से यह महसूस कर रहे हैं कि बातचीत से ही सभी विवादों का समाधान निकाला जा सकता है। इसलिए कोई विशेष प्रगति न होते हुए भी हमारी वार्ता जारी रहेगी। हम नहीं चाहते कि वार्ता करना ही अपने आप में उद्देश्य हो जाए। यह कोई आदर्श स्थिति नहीं है। लेकिन राजनय में सब कुछ आदर्श नहीं होता। हमें यथार्थ पर भी नजर रखनी पड़ती है। इसलिए हम एक-दूसरे से बातचीत करना जारी रखेंगे। हम जानते हैं कि किसी भी बातचीत से अभी तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। मूल समस्याएँ जस की तस कायम हैं। फिर भी हम एक बार फिर यह स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि हम भारत-पाकिस्तान सम्बन्ध को मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। पाकिस्तान भी यही चाहता है। इसीलिए बातचीत को जारी रखना कठिन नहीं होगा। प्रतिकूल से प्रतिकूल परिस्थिति में भी हम मिलेंगे और बातचीत करते रहेंगे। दुनिया की कोई भी शक्ति हमें बातचीत करने से रोक नहीं सकती।

महँगाई : महँगाई एक बार फिर एक विकट समस्या के रूप में देश के सामने उपस्थित है। हम गहराई से महसूस करते हैं कि साधारण जनता को, खासकर वंचित वर्गों को, बहुत कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन यह कोई नई घटना नहीं है। पहले भी समय-समय पर महँगाई बढ़ती रही है। और जब भी हम सत्ता में रहे हैं, हमने उसका डट कर सामना किया है। भारत की जनता को पता है कि समस्या कोई भी हो, हम डट कर उसका सामना करते हैं। इस बार भी हम महँगाई का डट कर सामना कर रहे हैं। यह सही है कि अभी तक हमें कोई उल्लेखनीय सफलता नहीं मिल सकी है। लेकिन हमारे प्रयत्नों के परिणाम सामने आने लगे हैं। कुछ चीजों की कीमतें कम हुई हैं, कुछ की स्थिर हैं। आशा है, निकट भविष्य में और भी राहत मिलेगी। हम यह साफ कर देना चाहते हैं कि महँगाई कम करने के लिए हमारे पास कोई जादू की छड़ी नहीं है। इसलिए महँगाई एक दिन में खत्म नहीं की जा सकती। लोगों को धीरज रखना चाहिए। आज महँगाई एक अंतरराष्ट्रीय समस्या है। बड़े-बड़े देश इससे जूझ रहे हैं। हमारा देश एक आर्थिक महाशक्ति बनने की ओर अग्रसर है, इसलिए हमें भी इस समस्या का सामना करना पड़ रहा है। हो सकता है, आनेवाले दिनों में कीमतें और बढ़ें। इसलिए हमें सतर्क रहना होगा। हम परिस्थिति पर निगाह रखे हुए हैं। जरूरी होने पर तुरन्त आवश्यक कदम उठाए जाएँगे। लेकिन रातोंरात कुछ नहीं हो सकता। यह हमारा वादा है कि हम जनता को महँगाई की चक्की में पिसने नहीं देंगे। पर बाजार की शक्तियों पर अंकुश लगाना राष्ट्रीय हित में नहीं है। इससे विकास की गति प्रभावित हो सकती है। पर कीमतों को सहनीय स्तर पर बनाए रखना सरकार का कर्तव्य है। वह इसके लिए कुछ भी कर सकती है और करेगी।

आतंकवाद : एक बार फिर आतंकवाद ने अपना सिर उठाया है। बहुत-से निर्दोष लोगों की जान गई है। इस कायराना हरकत से सारा देश स्तब्ध है। हम भी स्तब्ध हैं। लेकिन हम हाथ पर हाथ रख कर नहीं बैठे हुए हैं। हमें एहसास है कि आतंकवाद इस समय देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। आतंकवाद के कारण हमने कई महत्वपूर्ण नेता खोए हैं। अब इस सिलसिले को चलने नहीं दिया जा सकता। हम आतंकवाद के खिलाफ कठोर से कठोर कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमने बहुत-से जरूरी कदम उठाए हैं। कुछ सफलता भी मिली है। लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि यह एक अंतरराष्ट्रीय समस्या है। इसलिए इस मोर्चे पर पूर्ण सफलता मिलने की उम्मीद नहीं की जा सकती। कुछ राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि हमें आतंकवाद के साथ जीना होगा। यह बात निराधार नहीं है, लेकिन हमने तय किया है कि हम आतंकवाद को कुचल कर रहेंगे। इसके लिए हम कोई भी कदम उठा सकते हैं। सरकार विचार कर रही है कि और कौन-से कदम उठाए जाने चाहिए। इससे हमें रोका नहीं जा सकता। फिर भी हम अनुरोध करते हैं कि लोग संयम न खोएँ। हम कुरबानी देते आए हैं। आगे भी कुरबानी देनी पड़ सकती है। आतंकवाद के जबड़े अभी भी खुले हुए हैं। पर देश उसके सामने आत्मसमर्पण नहीं कर सकता। हम उससे संघर्ष करते रहेंगे। जब तक आतंकवाद है, हम चैन की नींद नहीं सो सकते। लेकिन लोगों को यह भी समझना होगा कि रास्ता लम्बा है। रातोंरात कुछ नहीं किया जा सकता। हम धीरज रखे हुए हैं। लोगों को चाहिए कि वे भी धीरज रखें। आतंकवाद के खिलाफ हमारी जंग जारी थी, जारी है और जारी रहेगी।


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