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व्यंग्य

उसने कहा था
राजकिशोर


कोई सत्ताईस-अट्ठाईस साल पहले की बात है। अमिताभ बच्चन अपने नवजात पुत्र की जन्म कुंडली लेकर एक बहुत बड़े ज्योतिषी के पास पहुँचे। इसके पहले वे कई और ज्योतिषियों से मिल चुके थे और उनकी भविष्यवाणियाँ सुन चुके थे। इन भविष्यवाणियों में बहुत-सी एक-दूसरे से नहीं मिलती थीं। लेकिन अनुभवी अमिताभ जानते थे कि ऐसा होता है। सितारों की गति को कौन ठीक-ठीक समझ सकता है? अमिताभ खुद भी एक सितारा थे और जिन्दगी में काफी उतार-चढ़ाव देख चुके थे। उन्होंने जब यह सुना कि अमेरिका से एक ज्योतिषी सिर्फ सात दिनों के लिए मुंबई आया हुआ है और वह कोई मामूली ज्योतिषी नहीं है, बल्कि उसके पास एस्ट्रोनॉमी और गणित की बड़ी-बड़ी डिग्रियाँ हैं और वह सिर्फ बड़े-बड़े लोगों की कुंडली देखता है, तो वे उस ज्योतिषी से मिलने के लिए बेचैन हो गए।

ज्योतिषी ने जितने बजे का समय दिया था, वह उसके दो घण्टे बाद मिला। उसकी युवा अमेरिकी सेक्रेटरी ने मीठे-मीठे शब्दों में और बार-बार क्षमा याचना करते हुए अभिताभ बच्चन को बताया कि अचानक देश की एक बहुत बड़ी हस्ती का कॉल आ गया। उन्हें उसी शाम स्वीडन जाना था और वे सर से कुछ राय करना चाहते थे। नेताजी के पास बस यही दो घण्टे खाली थे - ‘सर को आपके लिए बड़ा अफसोस हुआ, लेकिन वे क्या करते! उनसे इतनी विनती की गई कि वे मना नहीं कर सके।’ अमिताभ ने अपनी प्रसिद्ध सज्जनतावश बुरा मान कर भी बुरा नहीं माना और शांतिपूर्वक इंतजार करते रहे।

जब ज्योतिषी के फाइव स्टार कमरे से एक फाइव स्टार खादी-युक्त आकृति निकली, तो अमिताभ बच्चन के लिए बुलावा आ गया। अमेरिका में रहने वाले भारतीय ज्योतिषी ने भी बहुत ही विनम्रता से और कई बार माफी माँगी। औपचारिकताएँ सम्पन्न हो जाने के बाद ज्योतिषी को अभिषेक बच्चन की कुंडली दी गई। वह काफी देर तक नंगी आँखों से, फिर एक खास तरह का चश्मा लगा कर कुंडली का अध्ययन करता रहा। फिर उसने अपनी एक और युवा सचिव को बुलाया। यह भी बला की खूबसूरत थी। इसने कुंडली को स्कैन किया। अब ज्योतिषी उसे एक ऐसे कंप्यूटर पर पढ़ रहे थे, जिसका मॉनीटर साधारण कंप्यूटर से कई गुना बड़ा था। यह सब करीब आधे घण्टे तक चला। अगले आधे घण्टे तक वह आँखें बन्द कर सोचता-विचारता रहा। बीच-बीच में ऐसा लगता जैसे वह कोई मंत्र पढ़ रहा हो। वह कभी-कभी आँखें खोल कर कंप्यूटर के स्क्रीन पर भी एक नजर डाल लेता था, जहाँ भारत के सबसे बड़े फिल्मी सितारे के बेटे का भविष्य अंकित था।

जब ज्योतिषी ने गणनाएँ पूरी कर लीं और आँखें खोलीं, तो उसके चेहरे पर एक दिव्य मुस्कान थी। उसने कहा, ‘यह जन्म कुंडली नकली है। इस मुहूर्त में आपके परिवार में कोई बच्चा पैदा नहीं हुआ। आपने मेरी परीक्षा ले ली है। अब आप कृपया असली कुंडली निकालें।’

अमिताभ बच्चन की जवाबी मुस्कान भी कम दिव्य नहीं थी। उन्होंने नकली कुंडली वापस ले ली और अपने ब्रीफकेस से एक और कुंडली निकाली। ऐसा लग रहा था, जैसे कुछ हुआ ही न हो। दोनों सिद्ध खिलाड़ी थे और कोई किसी का बुरा नहीं मान रहा था। अमिताभ ने नई कुंडली ज्योतिषी की हथेली पर रखते हुए कहा, ‘यू नो...’ ज्योतिषी की मुस्कान 10.5 प्रतिशत चौड़ी हो गई। वह जानता था।

ज्योतिषी ने फिर वही सब प्रक्रियाएँ पूरी कीं, जिनसे पहली कुंडली को गुजरना पड़ा था। फिर उसने उसी सौम्य मुस्कान के साथ पूछा, ‘कृपया बताएँ, मैं आपके लिए क्या कर सकता हूँ।’ अभिताभ बच्चन ने यह साफ-साफ नहीं कहा, लेकिन उनकी मुखमुद्रा ने जवाब दिया कि वही, जिसके लिए लोग ज्योतिषियों के पास जाते हैं।

ज्योतिषी ने बहुत-सी बातें बताईं, जिनमें से कुछ तो वही थीं, जो अन्य ज्योतिषी अन्य तरीकों से बता चुके थे और कुछ नई थीं। उसकी प्रत्येक भविष्यवाणी के साथ किन्तु, परन्तु, हालाँकि, वैसे, एक तरह से आदि में से कुछ न कुछ लगा हुआ था। थोड़ी देर तक चर्चा होने के बाद ज्योतिषी ने अचानक कहा, ‘कृपया मेरी यह बात जरूर नोट कर लें। मास्टर अभिषेक को राजा की निकटता से खतरा है। दरअसल, यह मामला आनुवंशिक है। यह खतरा आपको और आपकी पत्नी को भी है।’

यह सुन कर अमिताभ थोड़ा संजीदा हो गए। बोले, ‘लेकिन हममें से किसी को दिलचस्पी राजनीति में नहीं है। मेरे माता-पिता को भी राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं थी।’

ज्योतिषी ने शांत स्वर में उत्तर दिया, ‘हम वर्तमान के बारे में नहीं, भविष्य के बारे में बात कर रहे हैं।’

अमिताभ ने भी शांत स्वर में पूछा, ‘लेकिन भविष्य क्या वर्तमान का ही विस्तार नहीं है?’

ज्योतिषी - ‘है, लेकिन अपना वर्तमान भी कौन पूरी तरह जानता है? फिर, कोई एक वर्तमान नहीं होता। प्रत्येक नया क्षण एक नया वर्तमान है। व्यक्ति का भविष्य भी इसी हिसाब से बदलता रहता है। आज से दस साल बाद आप यही कुंडली लेकर मेरे पास आएँगे तो हो सकता है, मैं कुछ दूसरी तरह की बातें बताऊँ। कुंडली वही रहती है, पर उसका अर्थ बदलता रहता है। आप अपने इतिहास को नहीं बदल सकते, पर आपका इतिहास आपको कभी घोड़ा और कभी गधा दोनों बना सकता है।’

इसके अनेक वर्षों के बाद, अमिताभ बच्चन को तब इस ज्योतिषी की बहुत याद आई, जब उन्होंने इलाहाबाद से हेमवती नंदन बहुगुणा के विरुद्ध लोक सभा चुनाव का परचा भरा, तब भी जब वे विशाल बहुमत के साथ जीत कर संसद में पहुँचे और तब और भी ज्यादा, जब उन्होंने बोफोर्स विवाद के बाद लोक सभा से इस्तीफा दे दिया और घोषणा की कि अब राजनीति के इस दलदल में कभी नहीं लौटूँगा।

इसके और भी अनेक वर्षों के बाद, अमिताभ को उस ज्योतिषी की फिर याद आई, जब उनकी पत्नी जया बच्चन को लाभ के पद पर होने के कारण लोक सभा से निकाल दिया गया।

इसके और भी ज्यादा वर्षों बाद, अभिताभ को उस ज्योतिषी की बेसाख्ता याद आई जब लखनऊ के एक कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव अभिषेक बच्चन को ‘यश भारती’ पुरस्कार प्रदान करते हुए उन्हें शॉल और मानपत्र भेंट कर रहे थे।

मुंबई लौटकर अमिताभ बच्चन ने उस अमेरिकी ज्योतिषी का पता लगाने की कोशिश की। पता चला कि एड्स से उसकी मृत्यु हो चुकी थी। यह भी पता चला कि मरने से पहले उसने एक नोट लिखा था, जिसमें कहा गया था, ‘मुझे गहरा दुःख है कि मैंने जीवन भर बहुत-से बड़े-बड़े लोगों को बेवकूफ बनाया। आश्चर्य की बात यह है कि मेरी कई भविष्यवाणियाँ सच्ची कैसे साबित हुईं।’


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