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कविता

पूरा आसमान का आसमान
शमशेर बहादुर सिंह


पूरा आसमान का आसमान
      एक इन्द्रधनुषी ताल
नीला साँवला हलका-गुलाबी
      बादलों का धुला
            पीला धुआँ...
मेरा कक्ष, दीवारें, किताबें, मैं, सभी
इस रंग में डूबे हुए-से
मौन।

 

और फिर मानो कि मैं
एक मत्‍स्‍य-हृदय में
       बहुत ही रंगीन,
       लेकिन
बहुत सादा साँवलापन लिये ऊपर,
देखता हूँ मौन पश्चिम देश :
लहरों के      क्षितिज पर
एक
बहत ही रंगीन हलकापन,
बहुत ही रंगीन कोमलता।

 

कहाँ है
वो कि ता बें, दी वा रें, चे ह रे, वो
बादलों की इन्द्रधनुषाकार      लहरीली
                   लाल हँसियाँ
                   कहाँ है?

 

 


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