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कविता

मैं
श्रीकांत वर्मा


मैं एक भागता हुआ दिन हूँ और रुकती हुई रात -
मैं नहीं जानता हूँ
मैं ढूँढ़ रहा हूँ अपनी शाम या ढूँढ़ रहा हूँ अपना प्रात
!

 


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हिंदी समय में श्रीकांत वर्मा की रचनाएँ