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कविता

धान के खेत
ए. अरविंदाक्षन


धान के खेतों से
जब भी गुजरता हूँ
अभिभूत होता हूँ
खेतों की महक से
रंग से
लास्य से
और संगीत से।
फिर मैं
बाँटता-फिरता हूँ
संगीत
हरियाली का
कृषकों के स्वप्नों का
दूर क्षितिज पर दृश्यवत्
उनके
अपार आह्लाद का

 


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