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कविता

जलधारा
ए. अरविंदाक्षन


रेत के ऊपर
जल की पतली धार
अठखेलियाँ करती निरंतर
धार की नग्नता के कितने रूप-प्रकार
शरीर-भाषा की लययुक्तता
चुंबन-आलिंगन के अनवरत क्षण अंकित
सब के बीच में जल
प्यास सहित

 


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हिंदी समय में ए. अरविंदाक्षन की रचनाएँ