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संस्मरण

संपादन में नया प्रतिमान रचने वाले - रवींद्र कालिया

चित्रा मुद्गल


अतल तक न ले जाया जाये
मिट्टी के भीतर
कहीं आवास मिल जाये
बच्चों और बड़ों के साथ
छोटी मछलियों और केकड़ों के साथ
लहलहाते खेतों में
चावल और गेहूँ की बालियों को देखते
भिंडी और बैंगन की खुशियों के बीच
रहने का मौका दिया जाए।

 


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