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कविता

जलप्रपात
ए. अरविंदाक्षन


हर जलप्रपात
इतना खूबसूरत क्यो हैं?
वह सिर्फ जल का प्रपात नहीं
वह पहाड़ की मुस्कान है
बूँदों का तारापथ है
संगीत का आकाश है
रंगों का बसंत है
इन्द्र धनुष की क्रीड़ा है
हर जल प्रपात।

 


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