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कविता

जल-स्वप्न से युक्त
ए. अरविंदाक्षन


सुबह
एक चिड़िया फर्र से उड़ चली जाती है
मैं अपने जल-स्वप्न से जाग जाता हूँ
जल-स्वप्न में निरंतर
मैं डूबता रहा
चिड़िया
मुझे बताती रही
आकाश का अर्थ
बादलों की कविता का सौंदर्य
हवा का संगीत
इस एक चिड़िया ने
मुझे जगा दिया
जल-स्वप्न से।

 


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