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कविता

चिड़िया का दुख
ए. अरविंदाक्षन


चिड़िया एक
बिनती कर रही है
तीन बूँद जल मुझे दो
एक बूँद अपने लिए
दो बूँद
अपने दो शावकों के लिए।
समुद्र मुस्कुरा रहा है
इतना कम मैं कैसे दूँ?
तीन बूँद मैं दे नहीं पाऊँगा
तुम वहन नहीं कर पाओगी
मेरा जल-दान।
जलनिधि के सम्मुख
चिड़िया सदैव प्यासी ही रह जाती है

 


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