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कविता

धरती-दिवस
ए. अरविंदाक्षन


धरती को
माँ समझना
बस, माँ समझना ही है
उर्वरता को महसूस करना ही है
अपने को तलाशना भर ही है।

 


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हिंदी समय में ए. अरविंदाक्षन की रचनाएँ