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कविता

रक्त के पाताल की आवाजें
ए. अरविंदाक्षन


रक्त के पाताल में कइयों की आवाजें सोयी हुई हैं
सोयी दिखती हैं ये जरूर
पर हैं जागी हुई
नितांत जागरित
सतर्क
प्राचीन इमारतों की तरह कथा-बहुल
उन्मेष के वसंत की तरह
सदाबहार।
इन्हीं आवाजों ने हमारे गाँवों में
आजादी का पहला शंख फूँका था
सोये हुए अपने अंतपुर में बड़बड़ाते रहे
वे जागना नहीं चाहते थे
अपनी रानियों के सीने की गरमी से
अलग होना नहीं चाहते थे
उन्हें वसंत का आगमन नापसंद था
वे अपने-अपने शिशिर में सोए हुए थे।
रक्त के पाताल की आवाजों को
जिसने सुना
वे जागे हुए अग्रदूत
आवाजों के साथ हो लिए
उन्हीं अग्रदूतों ने
देवदूतों की तरह
हमारे गाँव में
फिर कई-कई गाँवों में
तदनंतर समस्त गाँवों में
आजादी का नया इतिहास रचा था
हमारे आसपास के पेड़ों ने झंडा फहराकर खुशियाँ मनायी थीं
पत्तों ने तालियाँ बजायी थीं
पक्षियों ने भविष्य के नारे लगाए थे सुरीले
लहराते खेतों ने देशराग का आलापन किया था
मधुर-मधुर ।
वसंत जब आ गया
कृत्रिम सुगंध सहित
रक्त के पाताल की आवाजों ने
वसंतोत्सव से बचना चाहा
सोये हुए लोगों के कृत्रिम जागरण से बचकर
आवाजों ने गाँवों की तरफ की यात्रा शुरु की
जाते-जाते उन आवाजों ने कहा,
उनमें से अधिकतर अधनंगे और भूखे थे,
हमारे गाँवों में ही वसंत को खिलना है
सुगंध बिखेरना है।
रक्त के पाताल की आवाजों के
गाँवों तक पहुँचने से पहले
बाजा-गाजा-ढोलक लिए
सोये हुए लोगों की पूरी बिरादरी
गाँवों में पहुँच चुकी थी
बड़े-बड़े बाजारों से खरीदे गये
चमकदार वसंत खूब थे उनके पास
सभी गाँवों में कृत्रिम वसंत की धूम मच गयी
और रक्त के पाताल की आवाजें उसाँसें भरती रहीं
वे हाशिये पर रह गयीं
रक्त के पाताल की आवाजों को
उसाँसे भरते देख
नए जगे हुए संभ्रांत समाज ने
आवाजों को बिना किसी कठिनाई के साथ
कांस की मूर्तियों में रूपांतरित करके
चौराहों पर खड़े कर दिये
उन पर मालाएँ डाली गयीं
रक्त के पाताल की आवाजों का यह लौह रूपांतरण
हमारे इतिहास का एक खुला अध्याय है।
ग् ग् ग् ग् ग्
आज
अचानक
एक छोटा-सा बच्चा,
शायद वह उसी बच्चे का वंशज था
जिसने राजा को नंगा कहा था,
उसके हाथ में नन्हा-सा वसंत था
उस वसंत को उसने गुलेल की तरह चारों तरफ बिखेर दिया
और रक्त के पाताल की आवाजों को स्वर-जीवन प्रदान किया
आवाज़ों की आँखें चमक उठीं
आवाजों ने देखा
करोड़ों बच्चे उनके सामने
सुवासित फूलों की तरह खिल उठे हैं
खेल-कूद के बाद
बच्चों ने आपस में सवाल किया -
वसंत को कैसे बचाया जा सकता है?
सम्राटों और उनकी रानियों से
अंतपुर के अँधेरे से
बर्बरों की बुरी नजर से
अकलमंद खिलाड़ियों के बाजार से
बारूद की बू से
अशर्फियों की बेशुमार खनक से
नटों और नटनियों की अद्भुत प्रवीणता से
विदूषकों की क्लीब तटस्थता से
अधिकार के घोड़ों की टापों से
वसंत को कैसे बचाया जा सकता है?
बच्चों ने सवाल को दुहराया
रक्त के पाताल की आवाजों ने
तुरंत अपने पंख पसारे
बच्चों को पंखों पर बिठाकर
तेज रफ्तार पकड़ी
दूर क्षितिज तक उन्हें ले जाया गया
अब सबकुछ अदृश्यवत् है।
कुहराच्छादित मौन छाया है
लगता तो यही है
रक्त के पाताल की आवाजें
एक नया इतिहास रचने में ध्यानरत हैं
नए वंसत का इतिहास
कहीं आकार ग्रहण कर रहा है
अब बच्चों की तालियों की आवाजें
दूर से आ रही हैं
वसंत का नया इतिहास,
लगता है,
आकार ग्रहण कर चुका है।

 


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