hindisamay head
डाउनलोड मुद्रण

अ+ अ-

कविता

आपकी हँसी
रघुवीर सहाय


निर्धन जनता का शोषण है
कह कर आप हँसे
लोकतंत्र का अंतिम क्षण है
कह कर आप हँसे
सबके सब हैं भ्रष्टाचारी
कह कर आप हँसे
चारों ओर बड़ी लाचारी
कह कर आप हँसे
कितने आप सुरक्षित होंगे
मैं सोचने लगा
सहसा मुझे अकेला पा कर
फिर से आप हँसे


End Text   End Text    End Text

हिंदी समय में रघुवीर सहाय की रचनाएँ