hindisamay head
डाउनलोड मुद्रण

अ+ अ-

कविता

नारी
रघुवीर सहाय


नारी बिचारी है
पुरुष की मारी है
तन से क्षुधित है
मन से मुदित है
लपक कर झपक कर
अंत में चित है


End Text   End Text    End Text

हिंदी समय में रघुवीर सहाय की रचनाएँ