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कविता

उसका रहना
रघुवीर सहाय


रोज सुबह उठ कर पाते हो उसको तुम घर में
इससे यह मत मान लो वह हरदम मौजूद रहेगी

 


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हिंदी समय में रघुवीर सहाय की रचनाएँ