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कविता

संजीव हुसैन
रविकांत


मैं पंजाबी हूँ
मेरा नाम संजीव है

कुछ ही दिन पहले की बात है
मुझे एक अपरिचित घर में जाना पड़ा
उस घर के सब बड़े सदस्य
काम पर गए थे,
मुझे वहाँ
केवल दो बच्चे मिले दो भाई

मैंने उनसे उनका नाम पूछा, तो
बड़े ने बताया - तदवीरुल हुसैन
छोटे ने बताया - तनवीरुल हुसैन

छोटा बहुत नटखट था
उसने झट से पूछा -
और आपका नाम ?

मेरा नाम सुनकर शायद
उसे कुछ अधूरा सा लगा हो
उसने बहुत खुश होते हुए
इसे पूरा किया - संजीव हुसैन!

 


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