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कविता

कुछ असंवैधानिक पंक्तियाँ
कुमार अनुपम


कुछ असंवैधानिक पंक्तियाँ

(दुनिया के एक सर्वहारा का बयान)

 

हूँ

अनारक्षित हूँ

जबकि बहुसंख्यक हूँ

 

हूँ  हूँ

को क्यों सुनते हो हुआँ हुआँ की तरह?


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