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कविता

पुकार
कुमार अनुपम


मेरे भीतर इन दिनों जो उमग रही है पुकार

आऊँगा

इसी के सहारे आऊँगा

और कहूँगा एक दिन

चलो साँसें उलझाएँ...


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हिंदी समय में कुमार अनुपम की रचनाएँ