hindisamay head
डाउनलोड मुद्रण

अ+ अ-

कविता

सायलेंट अल्फाबेट्स
कुमार अनुपम


उनके पास

अपनी ध्वनि थी

अपनी बोली थी

 

फिर भी

गूँगे थे वे

 

स्वीकार था उन्हें

अपने स्वर का तिरस्कार

इसलिए वे

अंग्रेजी के अरण्य में रहते थे


End Text   End Text    End Text

हिंदी समय में कुमार अनुपम की रचनाएँ