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कविता

घड़ी
बसंत त्रिपाठी


घड़ी टिक् टिक् समय बजाती है
समय बेआवाज नहीं बीतता
एक घड़ी रुकी कि
दूजे के दिल में धड़कता है

समय हौले-हौले
पाँव बढ़ाता है

 


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हिंदी समय में बसंत त्रिपाठी की रचनाएँ