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कविता

निवेशक
संजय कुंदन


वह मुझे एक गुल्लक समझता है
और रोज अपना नमस्कार मुझमें डाल देता है
वह एक दिन सूद सहित अपने सारे नमस्कार
मुझसे वसूल कर लेगा

उसके लिए अभिवादन भी निवेश है
और धन्यवाद भी
किसी की हेयरस्टाइल की तारीफ
वह यूँ ही नहीं करता
किसी की कमीज को अद्भुत बताते हुए
वह अंदाजा लग रहा होता है कि
वह कितने लाख का आदमी है

वह अपनी मुस्कराहट का पूरा हिसाब रखता है

जब किसी की मिजाजपुर्सी के लिए
गुलदस्ता और फलों की टोकरी लिए
वह जा रहा होता है
उसके भीतर अगले पाँच वर्षों की योजना
आकार ले रही होता है
वह सोच रहा होता है कि इस बीमार व्यक्ति से कहाँ
कब-कब क्या काम निकाला जा सकता है।

 


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