hindisamay head
डाउनलोड मुद्रण

अ+ अ-

कविता

कम से कम एक दरवाजा
सुधा अरोड़ा


चाहे नक्काशीदार एंटीक दरवाजा हो
या लकड़ी के चिरे हुए फट्टों से बना
उस पर खूबसूरत हैंडल जड़ा हो
या लोहे का कुंडा

वह दरवाजा ऐसे घर का हो
जहाँ माँ बाप की रजामंदी के बगैर
अपने प्रेमी के साथ भागी हुई बेटी से
माता पिता कह सकें -
'जानते हैं, तुमने गलत फैसला लिया
फिर भी हमारी यही दुआ है
खुश रहो उसके साथ
जिसे तुमने वरा है
यह मत भूलना
कभी यह फैसला भारी पड़े
और पाँव लौटने को मुड़ें
तो यह दरवाजा खुला है तुम्हारे लिए'

बेटियों को जब सारी दिशाएँ
बंद नजर आएँ
कम से कम एक दरवाजा हमेशा खुला रहे उनके लिए !

 


End Text   End Text    End Text

हिंदी समय में सुधा अरोड़ा की रचनाएँ