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कविता

क्यों टेरा
भवानीप्रसाद मिश्र


मेरा लहरों पर डेरा
तुमने तट से मुझे
धरती पर क्यों टेरा

दो मुझे अब मुझे
वहाँ भी वैसी
उथल-पुथल की जिंदगी

आदत जो हो गई है
डूबने उतराने की
तूफानों में गाने की

लाओ धरो मेरे सामने
वैसी उथल-पुथल की जिंदगी
और तब कहो गाओ

मेरा लहरों पर डेरा
तुमने मुझे तट से
धरती पर क्यों टेरा !

 


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