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वर्धा हिंदी शब्दकोश

संपादन - राम प्रकाश सक्सेना


हिंदी वर्णमाला का व्यंजन वर्ण। उच्चारण की दृष्टि से यह द्वि-ओष्ठ्य, सघोष, अल्पप्राण स्पर्श है।

बँगला [सं-पु.] 1. कोई छोटी कोठी या हवादार मकान 2. बरामदे वाला छोटा मकान जो प्रायः खपरैल का बना होता है।

बँचवाना [क्रि-स.] 1. पढ़वाना 2. बाँचने का काम दूसरे से कराना।

बँटना [क्रि-अ.] 1. बाँटा जाना; हिस्सा किया जाना 2. विभक्त या विभाजित होना।

बँटवाना [क्रि-स.] 1. बाँटने का काम दूसरे से कराना 2. विभाजित करना; हिस्से दिलाना।

बँटवारा [सं-पु.] विभाजन; अलगौझा; संपत्ति के बाँटे जाने की क्रिया।

बँटाई [सं-स्त्री.] 1. बाँटे जाने की अवस्था या भाव 2. पारिश्रमिक 3. ज़मींदारों द्वारा बनाई गई कृषि की आय के विभाजन का ढंग 4. किसी को जोतने-बोने के लिए खेत देने का वह प्रकार जिसमें खेत का मालिक लगान के बदले में उपज का कुछ अंश लेता है।

बँटाना [क्रि-स.] 1. बँटवारा करना 2. किसी की संपत्ति आदि से अपना हिस्सा अलग करा लेना 3. दूसरे का भार या कष्ट हलका करने के लिए उसका कुछ भाग अपने ऊपर लेना।

बँड़ेर (सं.) [सं-पु.] वह बल्ला या शहतीर जिसके ऊपर छाजन का ठाठ स्थित रहता है।

बँड़ेरी (सं.) [सं-पु.] खपरैल की छाजन में सबसे ऊपर रहने वाली लकड़ी या बल्ली।

बँधना (सं.) [क्रि-अ.] 1. किसी बंधन में आ जाना; आबद्ध होना; बाँधा जाना 2. अटकना; जमना 3. फँसना 4. डोरी या रस्सी आदि से पकड़ा जाना 5. नियम या प्रतिबंधन से युक्त होना 6. कारागार या जेल में रखा जाना 7. मुग्ध होना 8. बनाया जाना; गँठना 9. {ला-अ.} ध्यान या विचार का एक ही स्थान पर केंद्रित होना।

बँधवाना [क्रि-स.] 1. बाँधने का काम कराना 2. नियत या मुकर्रर कराना 3. कारागार या जेलख़ाने आदि में रखवाना 4. वास्तु आदि की रचना कराना 5. बंधन में डलवाना या रखवाना।

बँधाई [सं-स्त्री.] 1. बाँधने का काम 2. बाँधने की मज़दूरी या पारिश्रमिक।

बँधाना [क्रि-स.] 1. बाँधने का काम दूसरे से करवाना; बँधवाना; बँधवाने में प्रवृत्त करना 2. कैद कराना।

बँधा-बँधाया [वि.] 1. जो बाँधकर रखा गया हो 2. तय किया हुआ; निश्चित 3. रूढ़; प्रथागत।

बँधी [सं-स्त्री.] 1. बँधा हुआ काम; निश्चित समय पर बराबर होते रहने वाला काम 2. बँधी हुई व्यवस्था; नियमित रूप से किया गया प्रबंध 3. बंधेज; प्रतिबंध। [वि.] 1. बंधन में जकड़ा या कसा हुआ 2. जिसके लिए किसी तरह का बंधन हो।

बँधी लीक [सं-स्त्री.] ऐसी परंपरा या प्रथा जिसका पालन सबके द्वारा किया जाता हो; ढर्रा; भेड़चाल; रूढ़ि।

बँधुआ [सं-पु.] कैदी; बंदी; बँधुवा। [वि.] 1. जो बँधा रहता हो 2. किसी तरह के बंधन में रहने वाला।

बँधुआ मज़दूर (हिं.+फ़ा.) [सं-पु.] 1. वह मज़दूर जिसे कोई अधिकार प्राप्त न हो और दिन-रात अपने मालिक की सेवा करनी पड़ती हो 2. आतंक, भय या किसी शर्त से बंधक बनाकर रखा गया मज़दूर।

बँसवाड़ी [सं-स्त्री.] 1. वह जगह या बाज़ार जहाँ बाँस बेचने वालों की बहुत-सी दुकानें या घर हों 2. एक स्थान पर उगे हुए बाँसों का समूह या झुरमुट 3. वह स्थान जहाँ बाँस की बहुत-सी कोठियाँ हों।

बँसवारी [सं-स्त्री.] 1. बाँस की कोठी 2. एक जगह उगे हुए बाँसों का समूह।

बँसोर [सं-पु.] वह जाति या समुदाय जो बाँसों की चटाई, टोकरे आदि वस्तुओं का व्यवसाय करता है; बँसोड़; धरकार।

बंक1 (सं.) [वि.] 1. तिरछा; टेढ़ा 2. विकट; दुर्गम 3. जिसमें पुरुषार्थ और विक्रम हो।

बंक2 (इं.) [सं-पु.] जहाज़ या रेलगाड़ी में दीवार पर लगी शय्या। -करना [क्रि-अ.] चुपके से भाग जाना, खिसक जाना।

बंकर (इं.) [सं-पु.] कंक्रीट के तहख़ाने जहाँ से छुपकर चौकीदार दुश्मन पर वार करते हैं; खाई।

बंकिम (सं.) [वि.] तिरछा; टेढ़ा; बाँका।

बंग (सं.) [सं-पु.] 1. बंगाल नामक प्रांत 2. एक दवा जो ताकत बढ़ाती है।

बंगलाभाषी [वि.] बंगला भाषा बोलने वाला।

बंगा (सं.) [वि.] 1. टेढ़ा 2. झगड़ालू; उद्दंड 3. लुच्चा; पाजी; अधम 4. मूर्ख; अज्ञानी।

बंगाल (सं.) [सं-पु.] 1. भारत का एक पूर्वी प्रांत या प्रदेश; बंग देश (बाँग्लादेश या पूर्वी पाकिस्तान और पश्चिम बंगाल) 2. (संगीत) एक राग।

बंगालिन [सं-स्त्री.] बंगाल की रहने वाली स्त्री।

बंगाली [सं-पु.] 1. बंगाल राज्य का निवासी 2. बंगाल से संबंधित कोई वस्तु या रिवाज; बंगदेशीय। [सं-स्त्री.] 1. बंग्लादेश और भारत की जनभाषा और राजभाषा; बांगला भाषा 2. एक रागिनी। [वि.] बंगाल का; बंगाल से संबंधित।

बंचना (सं.) [क्रि-स.] 1. ठगना 2. छलना। [वि.] ठगा जाना।

बंजर [सं-पु.] अनुपजाऊ; खेती के अयोग्य ज़मीन; वह ज़मीन जिसपर खेती न की जा सकती हो।

बंजारा [सं-पु.] एक घुमंतू तथा ख़ानाबदोश जाति जो लोहे के औज़ार, जैसे- चाकू, छुरी बनाकर बेचने हेतु एक स्थान से दूसरे स्थान पर आवाजाही करती है, इनके व्यवसाय में नाच, गाना, करतबगीरी भी शामिल होती है; बनजारा।

बंझा [वि.] बाँझ; न फलने वाला (पेड़-पौधा); वंध्य। [सं-स्त्री.] 1. वंध्या स्त्री 2. एक प्रकार की परजीवी बेल।

बंटा [सं-पु.] पान आदि रखने का छोटा डिब्बा। [वि.] छोटे कद का।

बंटाधार [वि.] बरबाद; नष्ट; विनाश; चौपट; सत्यानाश।

बंडल (इं.) [सं-पु.] पुलिंदा; गट्ठर; गट्ठा; पूला; छोटी गठरी।

बंडा [सं-पु.] 1. अरुई की प्रजाति का एक कंद जिसकी सब्ज़ी बनाई जाती है; अरवी; कचालू 2. अनाज रखने का बड़ा बखार। [वि.] जिसकी पूँछ न हो।

बंडी [सं-स्त्री.] 1. बिना आस्तीन का कुरता; मिरजई; फतूही 2. बगलबंद नामक पहनने का कपड़ा।

बंद (फ़ा.) [सं-पु.] 1. अवरूद्ध; रोक 2. बाँध; मेंड़ 3. कैद; बंधन 4. अंगों का जोड़ 5. सिला हुआ फीता जिससे अँगरखा, अंगिया आदि के पल्ले बाँधते हैं 6. पाँच या छह मिसरों के उर्दू-फ़ारसी पद्य का टुकड़ा। [वि.] 1. रुका हुआ; बँधा हुआ 2. धरा या पकड़ा हुआ 3. जिसकी गति, क्रिया रुद्ध हो।

बंदगी (फ़ा.) [सं-स्त्री.] 1. किसी की अधीनता और दीनता स्वीकार कर लेना 2. नमस्कार; अभिवादन सलाम; नमस्ते 3. ईश्वरीय आराधना; उपासना; पूजा।

बंदगोभी [सं-स्त्री.] 1. करमकल्ला; पात गोभी का पौधा 2. उक्त पौधे का फल जिसकी तरकारी बनाई जाती है।

बंदन (सं.) [सं-पु.] 1. रोली 2. सिंदूर।

बंदनी [सं-स्त्री.] सिर पर पहनने का एक आभूषण; सिरबंदी।

बंदर (सं.) [सं-पु.] एक स्तनपाई पशु जिसकी कुछ हरकतें मनुष्य से मिलती हैं और जिसकी कुछ बुद्धि विकसित होती है; मर्कट; कपि; वानर।

बंदरगाह (फ़ा.) [सं-पु.] 1. समुद्र का वह तट या नगर जहाँ जहाज़ रुकते-ठहरते हैं; बंदर; पत्तन; पट्टन; (पोर्ट; हार्बर) 2. नौका घाट।

बंदरघुड़की [सं-स्त्री.] वह दिखावे भर की घुड़की जिसका कोई परिणाम न हो; महज़ डराने भर की धमकी; झूठी धमकी; गीदड़ भभकी।

बंदरबाँट [सं-स्त्री.] न्याय के नाम पर किया जाने वाला ऐसा स्वार्थपूर्ण बँटवारा जिसमें न्यायकर्ता सब कुछ हज़म कर लेता है।

बंदरिया [सं-स्त्री.] मर्कटी; वानरी; मादा बंदर।

बंदा (फ़ा.) [सं-पु.] 1. सेवक; दास 2. विनय दिखाने के लिए व्यक्ति द्वारा स्वयं के लिए सूचित शब्द, जैसे- बंदा हर कार्य के लिए तैयार है 3. भक्त।

बंदानवाज़ (फ़ा.) [वि.] 1. दीन-दयालु 2. बंदों पर अनुग्रह करने वाला 3. नौकरों और आश्रितों पर कृपा करने वाला 4. भक्तवत्सल।

बंदानवाज़ी (फ़ा.) [सं-स्त्री.] 1. कृपा; अनुग्रह 2. दयालुता।

बंदापरवर (फ़ा.) [वि.] 1. जो अपने सेवकों या आश्रितों का अच्छी तरह पालन करता हो 2. दीनबंधु।

बंदिश (फ़ा.) [सं-स्त्री.] 1. रोक; प्रतिबंध; पाबंदी 2. बाँधने का भाव 3. कविता, गीत के चरणों, वाक्यों आदि में होने वाली शब्दयोजना 4. साज़िश; षड्यंत्र।

बंदी1 (सं.) [सं-पु.] वंदना करने वाले, यशगान करने वाले चारण। [सं-स्त्री.] सिर का एक गहना; बंदनी।

बंदी2 (फ़ा.) [सं-पु.] 1. गिरफ़्तार किया हुआ व्यक्ति; कैदी 2. बँधुआ।

बंदीख़ाना (फ़ा.) [सं-पु.] वह स्थान जहाँ बंदियों को रखा जाता है; जेलख़ाना; कैदख़ाना।

बंदीगृह (फ़ा.+सं.) [सं-स्त्री.] जेल; कारावास।

बंदीजन (सं.) [वि.] 1. वंदना करने वाले 2. प्रशंसा गाने वाला; मंगलपाठ करने वाला 3. प्रबोधक; स्तवक; स्वस्तिवाचक। [सं-पु.] 1. राजाओं का कीर्तिगान करने वाला चारणों का समूह; भाट।

बंदूक (अ.) [सं-स्त्री.] वह अस्त्र जिसकी नली में बारूद भरी गोली या कारतूस भर कर लक्ष्य साधते हुए चलाया जाता है।

बंदूकची (अ.+फ़ा.) [सं-पु.] 1. बंदूक की गोली से लक्ष्य साधने वाला व्यक्ति 2. बंदूक चलाने वाला सिपाही।

बंदूकधारी (अ.+सं.) [सं-पु.] बंदूक पास रखने वाला व्यक्ति।

बंदूकसाज़ (अ.) [वि.] 1. बंदूक बनाने वाले 2. बंदूकों की मरम्मत करने वाले।

बंदोबस्त (फ़ा.) [सं-पु.] 1. व्यवस्था; इंतज़ाम; प्रबंध 2. खेत का लगान ठहराकर किसी को जोतने-बोने के लिए देना।

बंध (सं.) [सं-पु.] 1. बंधन; बाँधने का साधन 2. बाल बाँधने की चोटी 3. गाँठ; ग्रंथि 4. पानी रोकने का बाँध 5. कैद 6. कविता का अंश जिसमें चार या छह चरण होते है; पद्यांश 7. ज़ंजीर; बेड़ी 8. बंधक रखी हुई वस्तु 9. मैथुन का आसन या मुद्रा 10. रचना; बनावट 11. स्नायु; शरीर; देह।

बंधक (सं.) [सं-पु.] 1. किसी से कुछ ऋण लेकर उसके बदले कोई वस्तु उसके पास रखना; रेहन; गिरवी; (मार्टगेज़) 2. किसी शर्त को पूरा करने के लिए रोककर रखा गया व्यक्ति; अपहृत 3. बँधुआ। [वि.] 1. बाँधने वाला 2. पकड़ने वाला 3. भंग करने वाला 4. अदला-बदली या विनिमय करने वाला।

बंधकपत्र (सं.) [सं-पु.] वह पत्र जिसपर कोई वस्तु बंधक रखने की शर्त लिखी होती है; (मार्टगेज़)

बंधकी (सं.) [सं-पु.] वह व्यक्ति जो चीज़ को बंधक या गिरवी रखता है।

बंधन (सं.) [सं-पु.] 1. बँधने या बाँधने की अवस्था या भाव; बाँधना 2. वह वस्तु जिससे कोई चीज़ बाँधी जाए; ज़ंजीर; बेड़ी; रस्सी 3. रुकावट; प्रतिबंध।

बंधनकर्ता (सं.) [सं-पु.] अपना घर, खेत या सामान किसी के पास बंधक या गिरवी रखने वाला व्यक्ति; (मार्टगेज़र)।

बंधनकारी (सं.) [वि.] बंधन में डालने वाला।

बंधनीय (सं.) [वि.] 1. जो बाँधा जा सके 2. बाँधने या रोकने योग्य।

बंधा [सं-पु.] बाँध; रोक।

बंधान [सं-पु.] 1. बँधा हुआ होने की अवस्था 2. वह परंपरा या परिपाटी जिसमें कुछ अवसरों पर किसी विशिष्ट कार्य को करने का बंधन होता है 3. लेन-देन और व्यवहार की बँधी हुई प्रथा या रिवाज; (कस्टम) 4. उक्त प्रथा के अनुसार प्रदत्त धन 5. बाँध 6. (संगीत) ताल, लय और स्वर के संबंध में निश्चित किए गए नियम।

बंधिका [सं-स्त्री.] करघे की वह डोरी जिससे ताने की साँथी (करघे में लगने वाली एक लकड़ी) बाँधी जाती है।

बंधित (सं.) [वि.] बाँधा हुआ; जो कैद किया गया हो। [सं-स्त्री.] बाँझ।

बंधु (सं.) [सं-पु.] 1. भाई; भ्राता 2. स्वजन; आत्मीय 3. सजातीय व्यक्ति; संबंधी 4. ऐसा प्रिय मित्र जिससे भाइयों का-सा व्यवहार हो 5. मित्र; दोस्त; सखा 6. बंधुजीव नाम का पुष्प।

बंधुक (सं.) [सं-पु.] एक तरह का क्षुप या पेड़ जिसमें गोलाकार लाल रंग के फूल लगते हैं; दोपहर में खिलने वाला एक फूल; गुलदुपहरिया।

बंधुगण (सं.) [सं-पु.] आत्मीय जन; स्वजन; मित्रगण; बंधुवर; निकट संबंधी; नातेदार।

बंधुता (सं.) [सं-स्त्री.] बंधु होने की अवस्था या भाव; मित्रता; दोस्ती; भाईचारा; बंधु-भाव।

बंधुत्व (सं.) [सं-पु.] बंधुता।

बंधुद्रोही (सं.) [सं-पु.] अपने भाई या सगे-संबंधी से विश्वासघात करने वाला व्यक्ति।

बंधु-बांधव [सं-पु.] आत्मीय जन; परिजन; स्वजन संबंधी; भाई-बंधु।

बंधुल (सं.) [सं-पु.] 1. वेश्या का पुत्र 2. वेश्या का सेवक या टहलू। [वि.] 1. झुका हुआ; वक्र 2. सुंदर; मनोहर।

बंधेज [सं-पु.] 1. बंधन 2. प्रतिबंध; रोक 3. स्तंभन 4. कुल या समाज की कोई प्रथा 5. उक्त प्रथा के अनुसार वस्तु, धन आदि लेने-देने का बंधन 5. राजस्थान में वस्त्रों की रँगाई की एक प्रसिद्ध शैली।

बंध्य (सं.) [वि.] 1. बाँधे जाने के योग्य 2. कैद किए जाने के योग्य 3. बाँझ (स्त्री) 4. अनुपजाऊ; बंजर (भूमि) 5. न फलने वाला (वृक्ष आदि) 6. निर्माण के योग्य।

बंध्यकरण (सं.) [सं-पु.] 1. बाँझ कर देना 2. शल्यक्रिया द्वारा पुरुषों के वृषणों को अथवा स्त्रियों के अंडाशयों को निकालकर उन्हें संतानोत्पत्ति के अयोग्य करना 3. नर पशुओं को उक्त रीति से खस्सी कर देना।

बंध्या (सं.) [सं-स्त्री.] वह मादा जिसे संतान न होती हो या न हो सकती हो; बाँझ स्त्री।

बंबइया [वि.] 1. बंबई का; बंबई से संबंधित 2. बंबई का वासी।

बंबा [सं-पु.] 1. पानी निकालने का उपकरण; पंप; टोंटी; नलकूप 2. पानी बहाने का नल; सोता 3. कोई गोल लंबोतरा पात्र।

बंबू [सं-पु.] 1. चंडू (अफ़ीम का अवलेह) पीने की बाँस की नली 2. एक प्रकार की लंबी मोटी नली।

बंशलोचन (सं.) [सं-पु.] सफ़ेद टुकड़ों में प्राप्त किया जाने वाला बाँस का सारभाग जिसका प्रयोग औषधि के रूप में होता है।

बंसल [सं-पु.] एक प्रकार का कुलनाम या सरनेम।

बंसी (सं.) [सं-स्त्री.] 1. बाँसुरी; मुरली; वंशी 2. विष्णु; कृष्ण आदि के चरणचिह्न 3. मछली फँसाने का काँटा 4. {ला-अ.} कोई ऐसी चीज़ या बात जिससे किसी को फँसाया जाता है 5. एक तरह का गेहूँ 6. धान के खेतों में उगने वाली एक तरह की घास।

बंसीधर [सं-पु.] 1. (पुराण) कृष्ण; वासुदेव; कन्हैया 2. वह जो बाँसुरी बजाता या धारण करता है।

बक (सं.) [सं-पु.] 1. बगुला 2. एक प्राचीन ऋषि 3. कुबेर। [वि.] बगुले की तरह सफ़ेद।

बकचक [सं-स्त्री.] मध्ययुग का एक प्रकार का हथियार।

बक-झक [सं-स्त्री.] बक-बक; बकवास; बेकार बात; प्रलाप।

बकना [क्रि-स.] व्यर्थ बोलना; निरर्थक बातें करते रहना। [क्रि-अ.] 1. बड़बड़ाना 2. बकवास करना।

बक-बक [सं-पु.] अनर्गल बोलना; बकवास करना; बकने की क्रिया।

बकरना [क्रि-स.] 1. अपना दोष या अपराध स्वीकारते हुए अपने आप बोलते रहना 2. आप ही आप कुछ कहना; बड़बड़ाना।

बकर-बकर [क्रि.वि.] निरंतर अर्थहीन बोलते रहना।

बकरा (सं.) [सं-पु.] एक प्रसिद्ध छोटा नर चौपाया जिसके सींग तिकोने होते हैं और पूँछ छोटी होती है; छाग।

बकरी [सं-स्त्री.] एक मादा चौपाया पालतू जानवर; 'बकरा' का स्त्रीलिंग।

बकरीद (अ.) [सं-पु.] मुसलमानों का एक त्योहार जिसमें बकरे की बलि दी जाती है; ईद-उल-जुहा।

बकलस (अ.) [सं-पु.] लोहा, पीतल आदि का विशेष छल्ला जिससे तस्में, फ़ीते आदि बाँधे जाते हैं; बकसुआ।

बकला (सं.) [सं-पु.] 1. वृक्ष की छाल 2. फल के ऊपर का छिलका।

बकवाद [सं-पु.] निरर्थक वार्तालाप; व्यर्थ की बातचीत; बेमतलब की बात करना।

बकवादी [वि.] बहुत अधिक बातें करने वाला; बकवास करने वाला; जो बकबक करता रहता हो; गप्प लगाने वाला।

ब‍कवाना [क्रि-स.] 1. किसी को बकने के लिए प्रवृत्त करना 2. बकवास कराना 3. किसी से कोई बात कहलवाना 4. कहने को विवश करना।

बकवास [सं-स्त्री.] 1. बकबक करने की प्रवृति या शौक 2. बकने की क्रिया; बकवाद 3. लगातार कुछ देर कही जाने वाली बेकार बात।

बकसुआ [सं-पु.] लोहे, पीतल का छल्ला; बकलस।

बकायन [सं-पु.] नीम की जाति का एक वृक्ष जिसके फल, फूल, पत्तियाँ आदि दवा के काम आते हैं; महानिंब।

बकाया (अ.) [सं-पु.] 1. शेष वस्तु, बात या काम 2. बाकी पड़ी हुई रकम 3. वह धन जिसका भुगतान अभी बाकी हो। [वि.] 1. बचा हुआ; अवशिष्ट 2. बाकी; शेष।

बकावली (सं.) [सं-स्त्री.] 1. बगुला नामक पक्षियों की पंक्ति; बगुलों का झुंड 2. एक सफ़ेद, सुगंधित पुष्प जो औषधि बनाने के काम आता है।

बकासुर (सं.) [सं-पु.] (पुराण) एक दैत्य जो कृष्ण के द्वारा मारा गया था।

बकुचा [सं-पु.] 1. गठरी; बकचा 2. गुच्छा 3. ढेर 4. जुड़ा हुआ हाथ 5. संदूक; बक्सा।

बकुल (सं.) [सं-पु.] 1. मौलसिरी का पेड़ 2. उक्त पेड़ का फूल 3. महादेव; शिव। [वि.] वक्र; टेढ़ा।

बकेट (इं.) [सं-स्त्री.] बालटी; डोल।

बकेल [सं-स्त्री.] रस्सी बनाने के काम आने वाली पलाश की जड़।

बकोट [सं-स्त्री.] 1. बकोटने की क्रिया या भाव 2. बकोटने के फलस्वरूप पड़ा हुआ चिह्न 3. बकोटने के लिए बनाई हुई उँगलियों और हथेली की मुद्रा 4. किसी पदार्थ की उतनी मात्रा जितनी उक्त मुद्रा में समाती हो; चंगुल।

बकोटना [क्रि-स.] 1. पंजे या नाख़ूनों से शरीर की त्वचा या मांस नोचना 2. {ला-अ.} किसी से कोई चीज़ छीनना या वसूल करना।

बकौल (फ़ा.) [सं-पु.] 1. कथनानुसार 2. किसी विशेष व्यक्ति द्वारा की गई टिप्पणी।

बक्कम [सं-पु.] एक प्रकार का छोटा और कँटीला वृक्ष, जो प्रमुखता से मद्रास, मध्यप्रदेश तथा बर्मा में पाया जाता है; पतंग।

बक्कल [सं-पु.] 1. पेड़ की छाल 2. फल का छिलका।

बक्का [सं-पु.] धान की फ़सल में लगने वाला एक कीड़ा। [वि.] व्यर्थ या बेकार बोलने वाला; बकवादी।

बक्खर [सं-पु.] 1. कई तरह के पौधों की पत्तियों, जड़ों आदि को कूटकर तैयार किया गया ख़मीर 2. चौपाया बाँधने का बाड़ा; खेत 3. जोतने का उपकरण; बक्खल।

बक्तर (फ़ा.) [सं-पु.] उर्दू में बक्तर रूप प्रचलित है, पर हिंदी में बख़तर रूप प्रचलन में है।

बक्सा (इं.) [सं-पु.] 1. संदूक 2. डिब्बा।

बख़तर (फ़ा.) [सं-पु.] वह कवच या अँगरखा जो मध्यकाल में युद्ध के समय पहना जाता था; सन्नाह; लोहे की मोटी जाली का बना हुआ कवच।

बख़तरबंद (फ़ा.) [वि.] जिसमें कवच लगा हुआ हो, जैसे- बख़तरबंद गाड़ी।

बखर [सं-पु.] खेत जोतने का उपकरण; एक प्रकार का हल।

बखरा (फ़ा.) [सं-पु.] 1. भाग; हिस्सा; टुकड़ा 2. हिस्सेदारों को मिलने वाला अपना-अपना हिस्सा।

बखरी [सं-स्त्री.] 1. विशेष घर जो मिट्टी, ईंटों आदि का बना हुआ हो 2. गाँव में स्थित वह मकान जो साधारण घरों की अपेक्षा बड़ा तथा बढ़िया हो।

बखान [सं-पु.] 1. बखानने की क्रिया या भाव 2. बड़ाई; प्रशंसा; तारीफ़; गुणगान; गुणकथन 3. विस्तारपूर्वक किया जाने वाला वर्णन; व्याख्या।

बखानना [क्रि-स.] 1. विस्तारपूर्वक वर्णन करना या चर्चा करना 2. सराहना; तारीफ़ करना।

बखार (सं.) [सं-पु.] वह गोल घेरा या बड़ा पात्र जिसमें किसान अनाज रखते हैं; बंडा।

बख़िया (फ़ा.) [सं-पु.] दोहरे टाँके वाली सिलाई; एक प्रकार की महीन और मज़बूत सिलाई। [मु.] -उधेड़ना : रहस्य उजागर करना; भंडा-फोड़ करना।

बखियाना [क्रि-स.] बखिया (सिलाई) करना।

बखीर [सं-स्त्री.] ईख या गन्ने के रस में पकाया गया चावल; रसखीर; मीठी खीर।

बख़ुशी (फ़ा.) [अव्य.] ख़ुशी के साथ; प्रसन्नतापूर्वक।

बख़ूबी (फ़ा.) [क्रि.वि.] 1. ख़ूबी के साथ 2. अच्छी तरह; भली प्रकार 3. उचित रूप में; पूर्ण रूप से।

बखेड़ा (सं.) [सं-पु.] 1. झगड़ा; टंटा; झंझट; झमेला 2. कठिनाई; परेशानी 3. व्यर्थ का विस्तार 4. किसी चीज़ के इस प्रकार बिखरे हुए होने की स्थिति कि उसे इकट्ठा करने तथा सँवारने में अधिक परिश्रम तथा समय अपेक्षित हो 5. कोई सांसारिक क्रिया-कलाप।

बखेड़िया [वि.] बखेड़ा करने वाला; बहुत अधिक झगड़ालू।

बखेरी [सं-स्त्री.] एक प्रकार का छोटा कँटीला वृक्ष; कुंती।

बख़ैरियत (फ़ा.) [क्रि.वि.] ख़ैरियत से; राज़ी-ख़ुशी; अच्छी तरह से।

बख़्त (फ़ा.) [सं-पु.] 1. भाग्य; सौभाग्य; किस्मत; तकदीर; नसीब 2. समय; वक्त।

बख़्तर (फ़ा.) [सं-पु.] दे. बख़तर।

बख़्तावर (फ़ा.) [वि.] 1. सौभाग्यशाली; ऊँची किस्मत वाला 2. संपन्न; अमीर; धनवान।

बख़्तियार (फ़ा.) [वि.] भाग्यवान; सौभाग्यशाली; किस्मतवाला।

बख़्श (फ़ा.) [सं-पु.] 1. हिस्सा 2. नामों के अंत में लगने वाला शब्द, जैसे- करीमबख़्श आदि। [वि.] बख़्शने और क्षमा करने वाला।

बख़्शना (फ़ा.) [क्रि-स.] 1. क्षमा करना; माफ़ी देना; दयापूर्वक छोड़ देना 2. प्रदान करना 3. दान करना।

बख़्शवाना [क्रि-स.] 1. किसी को कुछ देने के लिए प्रेरित करना या उकसाना 2. किसी अपराधी की सज़ा माफ़ कराना 3. कर्ज़ आदि माफ़ कराना; छुड़वाना।

बख़्शी (फ़ा.) [सं-पु.] 1. गाँवों, कस्बों आदि में कर वसूल करने वाला अधिकारी 2. मध्ययुग में तनख़्वाह बाँटने वाला कर्मचारी 3. कोषाध्यक्ष; खजांची; मवेशीख़ाने का मुंशी 4. दानशील।

बख़्शीश (फ़ा.) [सं-स्त्री.] 1. उपहार स्वरूप मिला हुआ धन; दान 2. सेवकों के लिए दिया जाने वाला पुरस्कार; इनाम; पारितोषिक।

बग (इं.) [सं-पु.] 1. कीट; कीड़ा 2. कंप्यूटर में ऐसा वायरस प्रोग्राम जो किसी फ़ाइल को ख़राब कर देता हो।

बगदना [क्रि-अ.] 1. ख़राब होना 2. बिगड़ना; गुस्से में बिना सोचे-समझे कुछ कह देना 3. भूलना; भ्रम में पड़ना 4. रास्ता भूलकर कहीं और चले जाना; भटकना 5. गिर पड़ना; लुढ़क जाना।

बगदाद (फ़ा.) [सं-पु.] इराक का एक प्रसिद्ध पुराना नगर।

बगदाना [क्रि-स.] 1. बरबाद करना; नष्ट करना 2. भ्रम में डालना; भ्रमित करना।

बगरना (सं.) [क्रि-अ.] बिखरना; चारों ओर फैलना; छितरना।

बगराना [क्रि-स.] बिखेरना; फैलाना; छितराना। [क्रि-अ.] फैलना; बिखरना।

बगल (फ़ा.) [सं-स्त्री.] 1. पास; निकट 2. बाहु-मूल के नीचे का गड्ढा; समीपवर्ती स्थान 3. कपड़े का वह टुकड़ा जो अँगरखे, कुरते आदि में कंधे के नीचे लगाया जाता है।

बगलियाना [क्रि-स.] 1. बगल में करना या लाना; अलग करना; हटाना 2. बगल में दबाना। [क्रि-अ.] 1. अलग हटकर जाना 2. बातचीत न करते हुए बगल से होकर निकल जाना ; कतराकर चले जाना।

बगली [सं-स्त्री.] 1. ऊँटों का एक दोष जिसमें चलते समय उनकी जाँघ की रग पेट में लगती है 2. अँगरखे, कुरते आदि में कंधे के नीचे लगाया जाने वाला टुकड़ा 3. बगल में रखने का तकिया 4. एक प्रकार की थैली जिसमें दरज़ी सुई, धागा रखते हैं; तिलेदानी 5. मुगदर चलाने का एक तरीका।

बगार [सं-पु.] 1. प्रसार; फैलाव 2. गायों को बाँधने की जगह; गोशाला।

बगावत (अ.) [सं-स्त्री.] 1. बाग़ी होना; किसी के खिलाफ़ खड़ा होना; विद्रोह 2. राज-विद्रोह 3. विप्लव 4. बदअमली; अराजकता।

बगावती (अ.) [वि.] 1. बगावत या विद्रोह करने वाला 2. राजद्रोह करने वाला 3. बगावत संबंधी।

बगिया [सं-स्त्री.] छोटा बाग; बगीचा; फुलवारी; पुष्पवाटिका।

बगीचा (फ़ा.) [सं-पु.] वह स्थान जहाँ बहुत सारे फूल-फल आदि के पेड़ लगे हों; बाग; फुलवारी।

बगीची (फ़ा.) [सं-स्त्री.] छोटा बाग; बगिया।

बगुला (सं.) [सं-पु.] बक; बगला; नदी, जलाशयों आदि में पाया जाने वाला एक स्लेटी या सफ़ेद रंग का पक्षी, जिसकी टाँगें, चोंच और गरदन लंबी होती है।

बगुला भगत [सं-पु.] वह जो देखने में बहुत धार्मिक तथा सीधा-सादा जान पड़ता हो किंतु उसके मन में कपट हो; धूर्त।

बगूला [सं-पु.] एक ही स्थान पर चक्कर काटने वाली तेज़ हवा या आँधी; बवंडर।

बगेड़ी [सं-स्त्री.] 1. बगेरी; भरुही; बगौधा 2. एक छोटी चिड़िया जिसकी पीठ भूरे रंग की होती है।

बगैर (अ.) [क्रि.वि.] 1. बिना; रहित; सिवा 2. न होने की अवस्था में 2. अलग करते हुए; छोड़कर।

बग्घी (अ.) [सं-स्त्री.] चार पहियों की एक प्रकार की गाड़ी; घोड़ागाड़ी।

बघनखा [सं-पु.] मध्यकाल में प्रयोग होने वाला तथा उँगलियों में पहनने का बाघ के नाख़ूनों जैसा एक हथियार; शेरपंजा।

बघनहाँ [सं-पु.] बघनखा।

बघार [सं-पु.] 1. बघारने की क्रिया या भाव 2. छौंक; वह मसाला जो दाल आदि बघारते समय घी में डाला जाता है; तड़का।

बघारना [क्रि-स.] 1. छौंकना; तड़का देना 2. हाँकना; जमाना; झाड़ना; रौब गालिब करना, जैसे- शेखी बघारना; शान बघारना।

बघेरा [सं-पु.] लकड़बग्घा; बाघ का बच्चा।

बघेल [सं-पु.] 1. राजपूतों में एक कुलनाम या सरनेम 2. मध्यप्रदेश का एक क्षेत्र या खंड।

बच (सं.) [सं-स्त्री.] जलाशयों के किनारे होने वाला एक पर्वतीय पौधा जो औषधि के काम में आता है।

बचकाना [वि.] 1. बच्चों जैसा; बच्चों के योग्य; बच्चों का-सा 2. विशेषतः नासमझी भरा 3. मूर्खतापूर्ण 4. उच्छृंखलतापूर्ण।

बचत [सं-स्त्री.] 1. जो शेष रहे; बचने का भाव; बचा हुआ अंश 2. लाभ।

बचत-बैंक (हिं.+इं.) [सं-पु.] डाकघर का वह खाता जिसमें लोग धन जमा करके ब्याज पाते हैं।

बचती [सं-स्त्री.] 1. बचत से संबंधित 2. बचा हुआ; शेष 3. देनदारी चुकाने के बाद बचा हुआ धन।

बचना [क्रि-अ.] 1. शेष रहना 2. मृत्यु से बच जाना 3. दोष, विपत्ति आदि से रक्षित; दूर या अलग रहना 4. काम में आने पर भी कुछ बाकी रहना।

बचपन [सं-पु.] बाल्यकाल; बच्चा होने का भाव या दशा; लड़कपन।

बचपना [सं-पु.] 1. बाल्यावस्था; लड़कपन 2. भोलापन 3. मूर्खता; नासमझी; सयाने लोगों के द्वारा किया गया ऐसा काम या व्यवहार जो अविचारपूर्ण हो।

बचाखुचा [वि.] बाकी; शेष मात्र; बचा हुआ।

बचाना [क्रि-स.] 1. उपयोग आदि के बाद भी कुछ बाकी रखना 2. ख़र्च न होने देना 3. पता न लगने देना; छिपाना 4. सुरक्षित और अप्रभावित रखना; कष्ट, विपत्ति आदि से रक्षा करना 5. किसी कार्य आदि से दूर रखना।

बचाव [सं-पु.] 1. बचने या बचाने की क्रिया या भाव 2. कष्ट, संकट आदि से बचने के लिए किया जाने वाला उपाय या प्रयत्न; रक्षा; आत्मरक्षा; बचाव।

बचाव कर्मी [सं-पु.] 1. बाढ़, महामारी, दंगा, दुर्घटना आदि के संकट के समय बचाव कार्य करने वाला व्यक्ति 2. राहत कार्य में लगे सुरक्षाकर्मी या स्वयंसेवी संगठनों के कार्यकर्ता।

बचाव पक्ष [सं-पु.] अभियोग या मुकदमें में किसी के द्वारा लगाए गए अरोपों से स्वयं को बचाने वाला पक्ष; सफ़ाई पक्ष।

बच्चा (फ़ा.) [सं-पु.] 1. शिशु; बालक; लड़का 2. नवजात शिशु 3. वत्स; पुत्र; बेटा; संतान 4. किसी जीव-जंतु या पशु का बच्चा 5. अपरिपक्व बुद्धिवाला; नादान। [वि.] 1. कम उम्र का 2. अनुभवहीन 3. नादान; नासमझ।

बच्चादानी (फ़ा.) [सं-स्त्री.] बच्चेदानी; गर्भाशय।

बच्ची [सं-स्त्री.] 'बच्चा' का स्त्रीलिंग रूप।

बच्चेदानी (फ़ा.) [सं-स्त्री.] मादा जाति के शरीर का वह आंतरिक अंग जिसमें गर्भ या बच्चे का विकास होता है; गर्भाशय; (यूट्रस)।

बछड़ा (सं.) [सं-पु.] गाय का नर बच्चा।

बछड़ी [सं-स्त्री.] गाय का मादा बच्चा।

बछिया [सं-स्त्री.] गाय का मादा बच्चा।

बछेड़ा (सं.) [सं-पु.] घोड़े का नर बच्चा।

बछेड़ी [सं-स्त्री.] घोड़े का मादा बच्चा।

बजका [सं-पु.] आलू, लौकी आदि के पतले, चिपटे कटे हुए टुकड़े पर बेसन लपेट कर घी या तेल में तल कर निर्मित व्यंजन।

बजट (इं.) [सं-पु.] 1. आय-व्यय का लेखा 2. आय-व्यय पत्रक 3. मासिक या वार्षिक आय-व्यय का लेखा-जोखा।

बजट सत्र (इं.+सं.) [सं-पु.] सदन या संसद में बजट की पेशी, बहस और उसे पारित कराने का सत्र।

बजटीय [वि.] बजट से संबंधित।

बजना [क्रि-अ.] 1. किसी भी यंत्र अथवा साधन द्वारा ध्वनि उत्पन्न होना 2. किसी वस्तु पर आघात से ध्वनि उत्पन्न होना 3. बाँसुरी, बाजे से आवाज़ निकलना।

बजबजाना [क्रि-अ.] सड़ने आदि के कारण बुलबुले उठना; उमस, गरमी आदि के कारण किसी जलीय या तरल पदार्थ के सड़ने पर उसमें से बुलबुले निकलना।

बजर (सं.) [वि.] 1. अत्यंत मज़बूत 2. वज्र के समान कठोर 3. पक्का; दृढ़।

बजरंग (सं.) [सं-पु.] पवनसुत; अंजनिपुत्र; हनुमान। [वि.] 1. वज्र या पत्थर के समान कठोर अंगों वाला 2. बहुत शक्तिशाली।

बजरंगबली [सं-पु.] महावीर हनुमान।

बजरबट्टू [सं-पु.] 1. बच्चों को नज़र से बचाने के लिए माला या ताबीज़ के रूप में पहनाया जाने वाला एक प्रकार के वृक्ष का काले रंग का बीज 2. अपशुकन रोकने वाली चीज़ 3. एक प्रकार का खिलौना। [वि.] मूर्ख; बुद्धिहीन।

बजरा (सं.) [सं-पु.] बड़ी नाव जो कमरे के समान खिड़कियों तथा पक्की छत वाली होती है।

बजरी (सं.) [सं-स्त्री.] पत्थर को तोड़कर बनाए जाने वाले वे छोटे-छोटे टुकड़े जो फ़र्श, सड़क आदि बनाने के काम आते हैं।

बजवाई [सं-स्त्री.] 1. बाजा बजवाने का कार्य या भाव 2. वह मज़दूरी जो किसी से बाजा बजवाने के बदले में दी जाती है।

बजवाना [क्रि-स.] किसी को कुछ बजाने में प्रवृत्त करना या बजाने का काम किसी दूसरे से करवाना।

बजा (फ़ा.) [वि.] 1. उचित; उपयुक्त; वाज़िब 2. सही; ठीक 3. अवसरानुकूल 4. घड़ी का समय 5. प्रासंगिक; स्वीकार्य 6. शुद्ध; दुरुस्त।

बज़ाज़ (अ.) [सं-पु.] कपड़ा बेचने वाला व्यक्ति; वस्त्र व्यापारी या व्यवसायी; वस्त्र-वणिक; बज़्ज़ाज़।

बज़ाज़ी [सं-स्त्री.] 1. बजाज का काम-धंधा या व्यापार; कपड़े बेचने का व्यवसाय 2. बेचा जाने वाला कपड़ा।

बजाना [क्रि-स.] 1. किसी चीज़ पर आघात करके ध्वनि उत्पन्न करना 2. बाजे से ध्वनि निकालना 3. मारना; चलाना (तलवार, सोंटे) 4. मारना-पीटना, जैसे- जूते बजाना 5. उछालकर, पटककर किसी चीज़ को जाँचना; परखना (पैसा आदि)।

बजाय (फ़ा.) [अव्य.] जगह या स्थान पर; बदले में।

बज्जर [सं-पु.] वज्र; पत्थर। [वि.] 1. बहुत कठोर या कड़ा 2. पक्का; ठोस।

बज़्म (अ.) [सं-स्त्री.] सभा; गोष्ठी।

बझना (सं.) [क्रि-अ.] 1. फँसना 2. बँधना 3. हठ करना; झगड़ना।

बट (सं.) [सं-पु.] 1. बड़ का पेड़; वट 2. सिल पर मसाला, चटनी आदि पीसने का बट्टा 3. मार्ग; रास्ता; बाट 4. किसी वस्तु का गोला 5. वस्तुओं को तौलने का बाट 6. बड़ा नाम का पकवान। [सं-स्त्री.] रस्सी की ऐंठन या बटन।

बटखरा (सं.) [सं-पु.] तौलने के लिए कुछ निश्चित मान या तौल का पत्थर आदि का टुकड़ा; बाट।

बटन1 [सं-पु.] 1. रस्सी आदि बटने या ऐंठने की क्रिया 2. बटने के कारण रस्सी में पड़ी हुई ऐंठन; रस्सी या मोटे धागे में पड़े हुए बल।

बटन2 (इं.) [सं-पु.] 1. सिले हुए वस्त्रों में लगाई जाने वाली गोल, चपटी घुंडी 2. किसी वाद्य को बजाने की कुंजी 3. बिजली के उपकरणों को चलाने का स्विच; (स्टार्टर) 4. कली; घुंडी।

बटना [सं-पु.] 1. रस्सी आदि बटने का कोई उपकरण या यंत्र 2. उबटन। [क्रि-स.] 1. सूत, रेशम आदि के अनेक धागों को ऐंठना; बटाई करना 2. सिल पर बट्टे से पीसना।

बटमार [सं-पु.] 1. रास्ते में राहगीरों या यात्रियों को लूटने वाला व्यक्ति या गिरोह; ठग; दस्यु 2. छापामार; कज़्ज़ाक।

बटमारी [सं-स्त्री.] 1. बटमार का काम या पेशा; लूटमार या ठगी करने का काम 2. चोरी; छल; हथकंडा।

बटर (इं.) [सं-पु.] 1. मक्खन; माखन 2. {ला-अ.} चिकनी-चुपड़ी बात; ख़ुशामद; चापलूसी।

बटलोई [सं-स्त्री.] पतीली; चावल आदि पकाने का पात्र; देगची; छोटा बटला।

बटवाना [क्रि-स.] 1. बाटने या पीसने का काम किसी अन्य से कराना 2. बँटवाना।

बटा [सं-पु.] 1. (गणित) वह पड़ी पाई जो भिन्न का स्वरूप सूचित करने के लिए अंश या हर के बीच में लगाई जाती है, जैसे- 3/4 में 3 और 4 के बीच में; भिन्नांक; बटा चिह्न, जैसे- ⅔ 2. 'अथवा' के लिए प्रयुक्त किया जाने वाला चिह्न।

बटाई [सं-स्त्री.] 1. तंतुओं, धागों आदि को बटने या ऐंठन डालने की क्रिया या भाव 2. बाँटने की क्रिया 3. बाँट; विभाजन 4. भूमि बंदोबस्त की एक प्रकार की प्रथा; भावली।

बटाना [क्रि-स.] 1. बाँटने का काम दूसरे से कराना 2. बँटने या ऐंठने का काम कराना।

बटालियन (इं.) [सं-स्त्री.] थल सेना में सैनिकों की बड़ी टुकड़ी; कई कंपनियों वाला पैदल सेना का एक विभाग।

बटिया [सं-स्त्री.] 1. छोटा गोला या चिकना पत्थर, जैसे- शालिग्राम 2. सिल पर कुछ पीसने का छोटा बाट या बट्टा; लोढ़िया।

बटी (सं.) [सं-स्त्री.] 1. गोला; छोटी गोली; वटी 2. एक पकवान; पीठी से बनाई गई बड़ी।

बटुआ (सं.) [सं-पु.] 1. पैसे रखने की छोटी थैली 2. चमड़े आदि से बनी कई खानों वाली एक प्रकार की छोटी थैली।

बटुली [सं-पु.] चावल आदि पकाने का बड़े मुँह का छोटा पात्र।

बटेर (सं.) [सं-स्त्री.] तीतर की तरह की एक छोटी चिड़िया, जो अकसर लड़ाने के शौक के लिए पाली जाती है।

बटोरना [क्रि-स.] 1. इकट्ठा करना; समेटना; सहेजना 2. बिखरी हुई चीज़ों को एकत्रित या जमा करना 3. चुनना 4. सँजोना 5. जोड़ना या जमा करना, जैसे- रुपया-पैसा बटोरना।

बटोही [सं-पु.] राहगीर; पथिक; मुसाफ़िर।

बट्टा (सं.) [सं-पु.] 1. कूटने या पीसने का पत्थर; लोढ़ा; बटना 2. पत्थर का टुकड़ा; ढेला 3. वह रकम जो किसी दोषयुक्त वस्तु के मूल्य में काट ली जाए 4. दलाली; दस्तूरी 5. घाटा; नुकसान; कमी 6. किसी वस्तु की कीमत में दी जाने वाली छूट; (डिस्काउंट) 7. कलंक; दाग। [मु.] बट्टे पर लेना : कमीशन काटकर लेना। -लगना : कलंक लगना।

बट्टा खाता [सं-स्त्री.] 1. वसूल न होने वाली या डूबी हुई रकमों का लेखा या मद 2. हानि या घाटे का खाता 3. न वसूल होने वाले कर्ज़ का खाता।

बठिया [सं-स्त्री.] 1. उपलों को एकत्र करके बनाया जाने वाला गया एक ढेर 2. गोबर के पाथे हुए कंडों का ढेर।

बड़ [पूर्वप्रत्य.] एक प्रत्यय जो शब्दों के आरंभ में जुड़कर 'बड़ा' अर्थ देता है, जैसे- बड़बोला; बड़भाग। [सं-स्त्री.] बकवास; बेकार की बातें। [सं-पु.] बरगद; वट वृक्ष।

बड़का [सं-पु.] 1. बड़ा पुत्र या भाई 2. बड़ा 3. ज्येष्ठ [वि.] उम्र में बड़ा।

बड़प्पन [सं-पु.] श्रेष्ठ होने का गुण या भाव; श्रेष्ठता; महत्व; गौरव।

बड़-बड़ [सं-स्त्री.] 1. बड़बड़ाना या बड़बड़ का शब्द करने की क्रिया 2. शेखी; डींग 3. मुँह से निकलने वाले अस्पष्ट शब्द 4. व्यर्थ की बातचीत; बक-बक; प्रलाप; बकवाद 5. क्रोध की स्थिति में धीमे स्वर में बोले गए शब्द।

बड़बड़ाना [क्रि-अ.] 1. धीरे-धीरे और अस्पष्ट बोलना 2. बक-बक करना 3. क्रोध की स्थिति में मंद स्वर में बोलना; कुड़बुड़ाना 4. नींद में बोलने की क्रिया।

बड़बड़िया [वि.] जो धीरे-धीरे और अस्पष्ट बोलता है; बड़बड़ाने वाला।

बड़बोला [वि.] जो ख़ूब बढ़ा-चढ़ाकर बातें करता हो; बड़े बोल बोलने वाला; डींगबाज़; शेखी बघारने वाला।

बड़बोलापन [सं-पु.] बढ़ा-चढ़ाकर बातें करने की क्रिया; शेखी; बड़प्पन।

बड़भागी [वि.] भाग्यशाली; ख़ुशनसीब।

बड़वानल (सं.) [सं-स्त्री.] समुद्र के अंदर की प्रबल आग; बड़वाग्नि।

बड़हल [सं-पु.] 1. पहाड़ की तराई में होने वाला एक वृक्ष 2. उक्त वृक्ष पर लगने वाला खट्टा-मीठा फल जिसका अचार भी बनाया जाता है।

बड़ा [सं-पु.] 1. बुज़ुर्ग 2. बड़ा आदमी 3. अधिक महत्व वाला व्यक्ति 4. गुरुजन 5. उड़द दाल की पीठी की गोल टिकिया जो तलकर खाई जाती है 6. उत्तर भारत में होने वाली एक तरह की घास। [वि.] 1. अधिक डील-डौल वाला 2. लंबा-चौड़ा 3. अधिक उम्र वाला; ज्येष्ठ 4. जो पद, प्रतिष्ठा, अधिकार आदि में अधिक हो 5. जो किशोरावस्था से युवावस्था प्राप्त कर चुका हो 6. अधिक महत्व वाला; महान 7. अधिक विस्तार या परिमाण वाला 8. ऊँचा; विशाल। [क्रि.वि.] बहुत; अधिक; ज़्यादा।

बड़ा आदमी [सं-पु.] 1. धनवान और समृद्ध व्यक्ति 2. महत्वपूर्ण और प्रसिद्ध व्यक्ति।

बड़ाई [सं-स्त्री.] 1. बड़े होने की अवस्था या भाव 2. बड़प्पन; बड़ापन 3. प्रशंसा; तारीफ़; सराहना 4. किसी काम या बात में विशेष योग्यता या श्रेष्ठता 5. महत्ता; महिमा।

बड़ा काम [सं-पु.] 1. कोई महत्वपूर्ण कार्य 2. जोखिम भरा कठिन काम 3. कारनामा।

बड़ा खेल [सं-पु.] बड़े लाभ या मुनाफ़े की संभावना वाला कोई कार्य या व्यापार।

बड़ा दिन [सं-पु.] ईसामसीह के जन्मदिन के रूप में पच्चीस दिसंबर को मनाया जाने वाला ईसाइयों का एक प्रसिद्ध त्योहार; क्रिसमस।

बड़ा परदा [सं-पु.] 1. फ़िल्म प्रदर्शित करने या देखने के लिए प्रयोग होने वाला सिनेमाघर का बहुत बड़ा सफ़ेद कपड़ा या परदा 2. सिनेमा के लिए प्रयुक्त शब्द।

बड़ा बूढ़ा [सं-पु.] 1. अवस्था और गुण आदि के विचार से कोई श्रेष्ठ व्यक्ति 2. बुज़ुर्ग; वृद्ध 3. गुरुजन 4. परिवार में कोई पूर्वज।

बड़ा बोल [सं-पु.] बढ़-चढ़कर कही गई बात; गर्वोक्ति; डींग।

बड़ा मुँह [सं-पु.] वह व्यक्ति जो बड़ी-बड़ी बातें करता हो।

बड़ी [सं-स्त्री.] 1. भिगोई हुई, उड़द या मूँग की दाल को पीसकर उसमें नमक-मसाला आदि मिलाकर बनाई गई तथा सुखाई हुई छोटी टिकिया या पकौड़ी 2. सोयाबीन पीसकर बनाई हुई बड़ियाँ।

बड़ी इलायची [सं-स्त्री.] बड़ी और काले रंग के छिलके वाली इलायची जो मसालों में प्रयोग की जाती है।

बड़ी बी [सं-स्त्री.] किसी बुज़ुर्ग या वृद्धा के लिए प्रयोग किया जाने वाला संबोधन।

बड़ी मछली [सं-स्त्री.] कोई महत्वपूर्ण या बहुत धनवान व्यक्ति जो अवैध तरीकों या भ्रष्टाचार से रुपया इकट्ठा करता है।

बढ़ई (सं.) [सं-पु.] 1. लकड़ी को छीलकर या गढ़कर दरवाज़े, मेज़, पलंग आदि बनाने वाला कारीगर; (कारपेंटर) 2. लकड़ी का काम करने वाली एक हिंदू जाति 3. रहस्य संप्रदाय में गुरु जो शिष्य कुंदे को गढ़-छीलकर सुंदर मूर्ति का रूप देता है।

बढ़ईगीरी [सं-पु.] बढ़ई का काम।

बढ़कर [क्रि.वि.] 1. तुलना में बेहतर या अधिक 2. विकसित 3. उत्तम; श्रेष्ठ।

बढ़त [सं-स्त्री.] 1. किसी कार्य या उपलब्धि में अपने प्रतिद्वंद्वी से आगे बढ़ जाने की स्थिति 2. चुनाव आदि में एक दल के प्रत्याशी का दूसरे दल के प्रत्याशी से मतों की संख्या में आगे बढ़ जाना; (लीड)।

बढ़ती [सं-स्त्री.] 1. गिनती या तौल में होने वाली अधिकता; बढ़ने का भाव 2. वृद्धि; अधिकता; प्रसार; बढ़ोतरी 3. उन्नति; पदोन्नति 4. मूल्यवृद्धि 5. सौभाग्य; समृद्धि; धन-धान्य और परिवार की वृद्धि 6. उपभोग और व्यय के बाद कुछ बचे रहने की अवस्था।

बढ़न [सं-स्त्री.] 1. बढ़ने की अवस्था या भाव 2. वृद्धि; बढ़त 3. गिनती, तौल, नाप आदि में नियत से अधिक बढ़ा हुआ हिस्सा या अंश।

बढ़ना (सं.) [क्रि-अ.] 1. आकार, मान, क्षेत्र आदि में पहले से अधिक होना 2. परिमाण, तौल, संख्या आदि में वृद्धि होना 3. पद, धन, सम्मान आदि में ऊपर होना 4. किसी स्थान से आगे जाना 5. बुझना (दीपक) 6. बंद होना (दुकान आदि) 7. लाभ होना 8. खेल, प्रतियोगिता आदि में किसी से आगे होना।

बढ़नी [सं-स्त्री.] 1. अग्रिम; पेशगी; (एडवांस) 2. झाड़ू।

बढ़वार [सं-स्त्री.] 1. विकास; वृद्धि 2. बढ़ती।

बढ़ा-चढ़ा [वि.] 1. उन्नत; विकसित 2. बेहतर; उत्तम 3. अतिशयोक्तिपूर्ण।

बढ़ाना [क्रि-स.] 1. आकार, मान या परिमाण में अधिक करना; वृद्धि करना 2. किसी को बढ़ने में प्रवृत्त करना 3. उन्नति या तरक्की करना 4. महँगा या ऊँचा करना (दाम) 5. बुझाना (दीपक) 6. बंद करना (दुकान आदि) 7. ऊपर उठाना; ऊँचा करना 8. आगे निकल जाना।

बढ़ाव [सं-पु.] 1. बढ़ने की क्रिया या भाव 2. दाम या मूल्य में बढ़त; वृद्धि 3. विस्तार; फैलाव।

बढ़ावा [सं-पु.] 1. प्रोत्साहन 2. उत्तेजना 3. कुछ करने के लिए हिम्मत बढ़ाने वाली बात।

बढ़िया [सं-पु.] 1. गन्ने, अनाज आदि की फ़सल का एक रोग जिससे कनखे नहीं निकलते और बढ़ाव बंद हो जाता है 2. प्रायः डेढ़ सेर की एक पुरानी तौल 3. एक प्रकार का कोल्हू। [वि.] 1. उत्तम; अच्छा; उमदा 2. अच्छी किस्म का 3. जो गुण, रचना, रूप-रंग, सामग्री आदि की दृष्टि से उच्च कोटि का हो। [क्रि.वि.] अच्छी तरह या अच्छे तरीके से।

बढ़ेल [सं-स्त्री.] हिमालय पर पाई जाने वाली एक प्रकार की ऊन वाली भेड़।

बढ़ेला (सं.) [सं-पु.] जंगली सुअर; वराह।

बढ़ोतरी [सं-स्त्री.] 1. निरंतर बढ़ने या विकसित होने की क्रिया 2. उत्तरोत्तर होने वाली वृद्धि 3. अभिवृद्धि; इज़ाफ़ा 4. उन्नति; तरक्की; बढ़ती; बाढ़ 5. वार्धक्य; बढ़त 6. विकास; संवृद्धि 7. प्रचुरता; आधिक्य 8. क्षेपक; बढ़ा हुआ अंश 9. व्यापार में होने वाला मुनाफ़ा।

बढ़ौती [सं-स्त्री.] 1. बढ़ती; वृद्धि 2. बढ़ता हुआ अंश 3. उन्नति; तरक्की 4. किसी चीज़ से होने वाला लाभ।

बणिक (सं.) [सं-पु.] 1. व्यापारी; रोज़गारी 2. व्यवसाय करने वाला व्यक्ति; व्यवसायी 3. सौदागर।

बतंगड़ [सं-पु.] 1. किसी छोटी-सी बात का व्यर्थ में विस्तार 2. बेवज़ह की चर्चा।

बतकही [सं-स्त्री.] 1. बातचीत; वार्तालाप 2. साधारणतः केवल मन बहलाने के लिए की जाने वाली इधर-उधर की बातचीत 3. वाद-विवाद।

बतख (अ.) [सं-स्त्री.] हंस की जाति का एक जलपक्षी; ऐसा जलपक्षी जो अधिक ऊँचा नहीं उड़ सकता।

बतछुट [वि.] 1. बात बनाने वाला 2. बिना सोचे-समझे अच्छी-बुरी सब तरह की बातें कह डालने वाला।

बतबढ़ाव [सं-पु.] साधारण या व्यर्थ की बात पर होने वाला झगड़ा; विवाद।

बतरस [सं-पु.] बातचीत का आनंद; वाग्विलास; बतरसियापन।

बतलाना [क्रि-स.] बताना। [क्रि-अ.] बातचीत करना।

बताना [क्रि-स.] 1. बात करना 2. परिचय कराना 3. कहना; उत्तर देना 4. समझाना 5. ज्ञान कराना 6. सूचित करना; निर्देश या संकेत देना 7. दिखाना; दिखलाना 8. नृत्य और गायन में अंगों की चेष्टा से भाव प्रकट करना 9. आवाज़ देना 10. ख़बर लेना।

बतासा [सं-पु.] 1. चीनी की चाशनी से बनाई जाने वाली एक तरह की छोटी गोल मिठाई; बताशा; गोलगप्पा; पानीपूड़ी 2. पानी का बुलबुला 3. एक तरह की छोटी आतिशबाज़ी।

बतियाना [क्रि-अ.] 1. बातें करना 2. बातचीत में मशगूल होना।

बतोला [सं-पु.] 1. व्यर्थ की बातचीत 2. धोखा देने के लिए की जाने वाली बात; झाँसा; भुलावा 3. टालमटोल या हीला-हवाला करने की बातचीत।

बतौर (अ.) [क्रि.वि.] 1. तरह पर; रीति से 2. सदृश; समान।

बत्ती [सं-स्त्री.] 1. रुई या कपड़े की पट्टी को बटकर तैयार की गई छोटी पूनी या लच्छा जिसे दीये में रखकर जलाया जाता है; डिबिया में जलाई जाने वाली कपड़े की ऐंठी हुई पट्टी; फलीता 2. मोमबत्ती; दीया 3. बिजली का बल्ब; चिराग; दीपक 4. रोशनी; प्रकाश 5. सलाई के आकार की वस्तु 6. मवाद सोखने के लिए घाव में भरी जाने वाली रुई की पट्टी।

बत्तीस [वि.] संख्या '32' का सूचक।

बत्तीसा [सं-पु.] 1. बत्तीस दवाओं और मेवों से तैयार किया जाने वाला एक मिश्रण या खाद्य पदार्थ जो प्रसूता को आरोग्य और पुष्टि के लिए खिलाया जाता है 2. वह मिश्रण जो पशुओं के हाज़मे के लिए दिया जाता है 3. एक प्रकार की आतिशबाज़ी।

बत्तीसी [सं-स्त्री.] 1. बत्तीस दाँतों का समूह 2. बत्तीस का समूह 3. नीचे-ऊपर की दंत पंक्ति।

बथान [सं-पु.] 1. वह जगह जहाँ पशुओं को बाँधा जाता है; पशुशाला 2. गौशाला 3. झुंड; गिरोह। [सं-स्त्री.] दर्द; पीड़ा।

बथुआ (सं.) [सं-पु.] 1. मोटे, चिकने हरे रंग के पत्तों वाला एक प्रकार का पौधा 2. उक्त पौधे के पत्तों से बनने वाला साग।

बद1 (सं.) [सं-स्त्री.] 1. जाँघ पर निकली गिलटी 2. बाघी नामक रोग 3. पशुओं का एक संक्रामक रोग जिसमें उनके मुँह से लार बहती है और खुर तथा मुँह में दाने पड़ जाते हैं।

बद2 (फ़ा.) [वि.] 1. बुरा; ख़राब 2. दुष्ट; दुराचारी 3. खोटा; अशुभ।

बदअमली (फ़ा.) [सं-स्त्री.] 1. राज्य की अव्यवस्था; अशांति 2. बुरा शासन या व्यवस्था; कुशासन 3. कुप्रबंध; अराजकता।

बदइंतज़ामी (फ़ा.) [सं-स्त्री.] 1. दोषपूर्ण इंतज़ाम; कुप्रबंध 2. अव्यवस्था; अराजकता।

बदकार (फ़ा.) [वि.] 1. बुरा करने वाला 2. कुकर्मी; व्यभिचारी; दुश्चरित्र।

बदकारी (फ़ा.) [सं-स्त्री.] कुकर्म; व्यभिचार; दुराचार।

बदकिस्मत (फ़ा.+अ.) [वि.] बुरी किस्मत वाला; अभागा; भाग्यहीन; बदकिस्मती। [सं-स्त्री.] भाग्यहीनता; अभागी।

बदख़्वाह (फ़ा.) [वि.] 1. जो बुराई चाहता हो; जो शुभचिंतक न हो 2. दुश्मन।

बदगुमान (फ़ा.) [वि.] 1. दूसरे के बारे में बुरे विचार रखने वाला 2. संदेह करने वाला; संदेहशील 3. जिसके मन में किसी की ओर से संदेह उत्पन्न हुआ हो; शक्की 4. असंतुष्ट।

बदगो (फ़ा.) [वि.] 1. बुराई करने वाला; बुरी बातें कहने वाला 2. निंदक; चुगलख़ोर।

बदगोई (फ़ा.) [सं-स्त्री.] 1. निंदा; बुराई; किसी के संबंध में बुरी बात कहना 2. बदनामी 3. चुगलख़ोरी 4. गाली-गलौज।

बदचलन (फ़ा.) [वि.] 1. जिसका चाल-चलन अच्छा न हो; चरित्रहीन 2. दुश्चरित्र।

बदचलनी (फ़ा.) [सं-स्त्री.] 1. बदचलन होने की अवस्था या भाव 2. बुरा चाल-चलन; कुमार्गगामिता 3. व्यभिचार 4. दुश्चरित्रता।

बदज़बान (फ़ा.) [वि.] 1. अनुचित या दूषित बातें करने वाला; जो बुरी ज़बान बोलता हो 2. मुँहफट 3. कटुभाषी; धृष्ट 4. अशब्द बोलने वाला; गाली-गलौज बकने वाला।

बदज़ात (फ़ा.+अ.) [वि.] 1. नीच; लुच्चा 2. दुष्ट; अधम।

बदतमीज़ (फ़ा.) [वि.] 1. जिसे तमीज़ या सलीका न हो; असंस्कृत; धृष्ट 2. जो शिष्टाचार न जानता हो; अशिष्ट; गँवार; गुस्ताख़ 3. अभद्र; उजड्ड।

बदतर (फ़ा.) [वि.] 1. बहुत बेकार 2. दयनीय 3. बुरे से बुरा; बहुत बुरा।

बददिमाग (फ़ा.+अ.) [वि.] 1. दुष्ट विचार वाला 2. बुरे स्वभाव का 3. बदमिज़ाज; घमंडी।

बददुआ (फ़ा.) [सं-स्त्री.] 1. बुरी दुआ; किसी का बुरा चाहना; अहित चाहने वाला शब्द 2. दुष्कामना; शाप; गाली।

बदन (अ.) [सं-पु.] देह; शरीर; तन। [मु.] -टूटना : शरीर में ज्वर के कारण पीड़ा होना।

बदनज़र (फ़ा.) [वि.] अशुभचिंतक; बुरी नज़र वाला। [सं-स्त्री.] कुदृष्टि; बुरी निगाह।

बदनसीब (फ़ा.+अ.) [वि.] अभागा; ख़राब किस्मतवाला; बदकिस्मत।

बदना (सं.) [क्रि-स.] 1. खेलना; ललकारना 2. कहना; वर्णन करना; मान लेना 3. ठहरना; पक्का या नियत करना (कुश्ती आदि के लिए) 4. शर्त लगाना (खेल या कुश्ती आदि की) 5. कुछ महत्व का मानना या समझना; गिनना। [मु.] बदा होना : भाग्य में लिखा होना।

बदनाम (फ़ा.) [वि.] 1. कलंकित 2. कुख्यात 3. लोग जिसकी निंदा करते हों।

बदनामी (फ़ा.) [सं-स्त्री.] 1. लोकनिंदा; बेइज़्ज़ती 2. अपकीर्ति 3. वह गर्हित या निंदनीय लोकचर्चा जो कोई अनुचित या बुरा काम करने पर समाज में विपरीत धारणा फैलाने के लिए होती है।

बदनीयती (फ़ा.+अ.) [सं-स्त्री.] 1. ख़राब नीयत; बुरी नज़र 2. बुरी नीयत होने की अवस्था या भाव 3. लालच; बेईमानी 4. इरादे में खोट।

बदनुमा (फ़ा.) [वि.] देखने में बुरा लगने वाला; भद्दा; कुरूप; भोंडा।

बदपरहेज़ (फ़ा.) [वि.] जो ठीक तरह से परहेज़ न करता हो; जो खानपान या रहन-सहन में संयम न रखता हो; असंयमी।

बदबख़्त (फ़ा.) [वि.] कमबख़्त; अभागा; बदनसीब।

बदबू (फ़ा.) [सं-स्त्री.] दुर्गंध; बुरी गंध।

बदबूदार (फ़ा.) [वि.] दुर्गंधयुक्त; बुरी बास से भरा हुआ।

बदमज़ा (फ़ा.) [वि.] 1. जिसमें मज़ा या आनंद न आए 2. जिसका स्वाद बुरा हो; फीका; कुस्वाद 3. सारा मज़ा किरकिरा करने वाला।

बदमस्त (फ़ा.) [वि.] 1. बुरी तरह मस्त होना 2. नशे में चूर होना।

बदमस्ती (फ़ा.) [सं-स्त्री.] 1. मदहोशी; मतवालापन 2. नशे में चूर होने की अवस्था; मस्ती 3. मत्त होना; कामुकता 4. मस्त होकर किया जाने वाला उपद्रव या हो-हल्ला।

बदमाश (फ़ा.) [वि.] 1. जिसकी जीविका बुरे कामों से चलती हो 2. बुरे और निकृष्ट काम करने वाला 3. कुपथगामी 4. बदचलन 5. गुंडा; लुच्चा।

बदमाशी (फ़ा.) [सं-स्त्री.] 1. बदमाश होने की अवस्था या भाव 2. बदचलनी; व्यभिचार 2. दुष्टता; दुष्कर्म; कुकर्म 3. बदमाश द्वारा किया जाने वाला कोई कार्य; लुच्चापन; गुंडापन।

बदमिज़ाज (फ़ा.+अ.) [वि.] बुरे स्वभाव या मिज़ाज का; अहंकारी चिड़चिड़ा; तीखे स्वभाव का; दुष्ट; कलहकारी।

बदरंग (फ़ा.) [वि.] 1. भद्दा; जिसका रंग ख़राब हो चुका हो 2. बुरे रंगवाला 3. ख़राब; खोटा 4. नीरस [सं-पु.] 1. बदरंगी 2. चौसर के खेल में वह गोटी जो रंगी न गई हो।

बदरा (सं.) [सं-पु.] बादल; मेघ। [सं-स्त्री.] कपास का पौधा।

बदराह (फ़ा.) [वि.] 1. कुमार्गी; बुरे चालचलनवाला; बुरी राह पर चलने वाला 2. कुचाली; दुष्ट; खोटा।

बदरिका (सं.) [सं-स्त्री.] 1. बेर का वृक्ष 2. बेर का फल 3. गंगा का उद्गम स्थान 4. गंगा का निकटवर्ती क्षेत्र।

बदरीनाथ (सं.) [सं-पु.] 1. बद्रिकाश्रम का मंदिर या तीर्थ 2. उक्त आश्रम में प्रतिष्ठित विष्णु की मूर्ति 3. बद्रिका नामक स्थान।

बदल (अ.) [सं-पु.] 1. परिवर्तित 2. बदलने की क्रिया या भाव 3. बदले में दी हुई वस्तु 4. पलटा; प्रतिकार 5. क्षतिपूर्ति।

बदलगाम (फ़ा.) [सं-स्त्री.] 1. बोलते समय भले-बुरे का ज्ञान न रखने वाला; मुँहफट; धृष्ट 2. वह जो लगाम का संकेत या ज़ोर न मानता हो (घोड़ा आदि); सरकश 3. मुँहज़ोर।

बदलना [क्रि-अ.] 1. एक से दूसरी स्थिति में आना या होना 2. परिवर्तन या रूपांतरण होना 3. भिन्न होना 4. अपनी कही हुई बात से हटना; मुकरना 5. तबादला होना 6. गुण, रूप, रंग, विचार आदि में पहले से बहुत अलग होना। [क्रि-स.] 1. किसी पदार्थ के गुण या आकार में परिवर्तन एक से दूसरी स्थिति में करना 2. रूप, रंग, स्वभाव आदि में महत्वपूर्ण परिवर्तन कर देना 3. एक के बदले में दूसरी वस्तु लेना या रखना; विनिमय करना 4. तबादला करना।

बदलवाना [क्रि-स.] बदलने का काम किसी दूसरे से करवाना।

बदला (अ.) [सं-पु.] 1. प्रतिदान; विनिमय 2. प्रतिशोध 3. बदलने की क्रिया, भाव या व्यापार 4. किसी ने जैसा व्यवहार किया हो, उसके साथ किया जाने वाला वैसा ही व्यवहार; प्रतिकार; पलटा। [मु.] -लेना : जिसने जैसी हानि पहुँचाई हो उसे वैसी ही हानि पहुँचाना।

बदलाना [क्रि-स.] बदलवाना। [क्रि-अ.] बदला जाना।

बदलाव [सं-पु.] 1. परिवर्तन; रूपांतरण 2. अदल-बदल; विनिमय।

बदली (अ.) [सं-स्त्री.] 1. तबादला; स्थानांतरण; (ट्रांसफ़र) 2. एक के स्थान पर दूसरे का रखा, भेजा या लगाया जाना 3. छाया हुआ बादल।

बदशक्ल (फ़ा.) [वि.] भद्दा; कुरूप; बेडौल; भद्दी और बुरी शक्ल-सूरत का।

बदशगुनी (फ़ा.) [सं-स्त्री.] 1. बदशगुन होने की अवस्था 2. अपशगुनी व्यक्ति 3. अनिष्टसूचक बात।

बदसलूकी (फ़ा.) [वि.] 1. बुरा व्यवहार; दुर्व्यवहार 2. अशिष्ट व्यवहार।

बदसूरत (फ़ा.+अ.) [सं-स्त्री.] बदशक्ल; कुरूप।

बदस्तूर (फ़ा.) [अव्य.] 1. नियमपूर्वक 2. जिस प्रकार पहले से होता आया हो, उसी प्रकार से 3. जिस रूप में पहले रहा हो, उसी रूप में 4. बिना किसी परिवर्तन या हेर-फेर के; यथापूर्व; यथावत।

बदहज़मी (फ़ा.+अ.) [सं-स्त्री.] 1. अपच; अजीर्ण 2. {ला-अ.} कोई चीज़ या बात ठीक तरह से स्वीकार न होने की स्थिति; अस्वीकारता।

बदहवास (फ़ा.+अ.) [वि.] 1. जो होश और हवास में न हो 2. उद्विग्न; विकल 3. अचेत; बेहोश।

बदहवासी (फ़ा.+अ.) [सं-स्त्री.] 1. उद्विग्न; व्याकुलता 2. बेहोशी।

बदहाल (फ़ा.+अ.) [वि.] 1. जो होश खो दे; जिसका बुरा हाल हो 2. दुर्दशाग्रस्त 3. रोग से पीड़ित और आक्रांत 4. कंगाल।

बदहाली (फ़ा.+अ.) [सं-स्त्री.] ख़राब हालत; बुरा हाल; दुर्दशा।

बदा [क्रि.वि.] 1. होनी 2. भाग्य में लिखा हुआ।

बदी1 (सं.) [सं-स्त्री.] कृष्णपक्ष; अँधेरा पाख, जैसे- जेठ बदी दूज।

बदी2 (फ़ा.) [सं-स्त्री.] 1. बुराई; ख़राबी 2. बुरे होने की अवस्था या भाव।

बदौलत (फ़ा.) [क्रि.वि.] 1. वजह; कारण 2. कृपा से 3. अनुग्रह से।

बद्ध (सं.) [वि.] 1. बँधा हुआ; (बाउंड) 2. संसार के बंधन में पड़ा हुआ 3. जिसके लिए कोई रुकावट या बंधन हो 4. निर्धारित।

बद्धकोष्ठ (सं.) [वि.] 1. जिसे कब्ज़ हो; कब्ज़ से पीड़ित 2. जिसे बद्धकोष्ठता का रोग हो। [सं-पु.] पाख़ाना न होने या कम होने का रोग।

बद्धपरिकर (सं.) [वि.] 1. उद्यत; तत्पर; तैयार 2. जो कमर कसे हुए हो।

बद्धप्रतिज्ञ (सं.) [वि.] वचनबद्ध; बात का पक्का।

बद्धमन (सं.) [सं-पु.] 1. किसी बात में आसक्त मन 2. वासनाओं में फँसा हुआ मन।

बद्धमानसिकता (सं.) [सं-स्त्री.] 1. मन के बँधे होने की अवस्था या भाव 2. जड़ता; रुढ़िग्रस्तता।

बद्धमुष्टि (सं.) [वि.] 1. जिसकी मुट्ठी दान देने के लिए न खुलती हो; कंजूस 2. जिसकी मुट्ठी बँधी हो।

बद्धमूल (सं.) [वि.] 1. जिसने जड़ें पकड़ ली हों; आमूलित 2. जिसकी जड़ें मज़बूत हों; दृढ़मूल।

बद्धी (सं.) [सं-स्त्री.] 1. बाँधने की कोई चीज़ 2. बाँधने का साधन; डोर 3. रस्सी 4. गले का गहना।

बधाई (सं.) [सं-स्त्री.] 1. किसी शुभ अवसर पर अथवा किसी अच्छे कार्य के पूर्ण होने पर दिया जाने वाला संदेशा; मुबारकबाद 2. शुभ अवसर पर गाया जाने वाला गाना; मंगलाचार 3. बधावा; उत्सव 4. उक्त शुभ अवसर पर संबंधियों को दिया जाने वाला धन।

बधावा [सं-पु.] 1. बधाई; शुभकामना 2. बेटे या बेटी के जन्म के अवसर पर भेजा जाने वाला उपहार 3. बधावा या उपहार ले जाने वाले लोग 4. विवाह, जन्म आदि के अवसर पर होने वाला आनंदोत्सव; मंगलाचार।

बधिया [सं-पु.] 1. ऐसा बैल, घोड़ा, बकरा आदि जिसका अंडकोश निकाल दिया गया हो 2. नपुंसक हुआ नर पशु; खस्सी 3. खस्सी बैल जो हल में जुतता हो या बोझ ढोता हो।

बधिर (सं.) [वि.] 1. जो सुनता न हो 2. न सुन सकने वाला 3. बहरा।

बधिरता (सं.) [सं-स्त्री.] 1. बहरापन 2. सुनने की शक्ति का अभाव 3. बधिर होने की अवस्था।

बन1 [सं-स्त्री.] 1. सजधज; सजावट, जैसे- बन-ठन कर 2. भेष; वेश; बाना।

बन2 (इं.) [सं-पु.] 1. छोटी-मीठी पाव रोटी 2. मैदे में ख़मीर मिलाकर बनाई गई मीठी रोटी 3. गुलगुला।

बनकटी [सं-स्त्री.] 1. जंगल काटकर उसमें खेती-बारी करने और रहने के योग्य बनाने का हक 2. जंगली लकड़ी 3. एक प्रकार का बाँस।

बनजारन [सं-स्त्री.] 1. बनजारा समाज की स्त्री 2. सौदा या व्यापार करने वाली स्त्री।

बनजारा [सं-पु.] 1. वह व्यक्ति जो बैलों आदि पर अन्न लादकर दूसरे गाँव बेचने के लिए जाता है 2. बंजारा।

बनत [सं-स्त्री.] 1. रचना; बनावट 2. किसी वस्तु के बनने या बनाए जाने का ढंग 3. अभिकल; भाँत; (डिज़ाइन) 4. सामंजस्य; मैत्री; मेलमिलाप; अनुकूलता 5. देहानुपात; पूर्वलक्षण 6. गोटा लगी पट्टी की तरह की पतली पट्टी।

बनना (सं.) [क्रि-अ.] 1. बनाया जाना; निर्मित होना 2. उचित रूप प्राप्त करना; रचा जाना। [मु.] बन आना : किसी का असमंजस की दशा में पहुँचना; जान जाने की नौबत आना।

बनफ़शा (फ़ा.) [सं-पु.] नेपाल, कश्मीर, हिमालय आदि स्थानों पर पाया जाने वाला तथा औषधि के रूप में उपयोग में लाया जाने वाला एक पौधा।

बनफूल [सं-पु.] वन या जंगल में उपजने वाले पेड़-पौधों के फूल।

बनमानुस [सं-पु.] 1. मनुष्य की तरह का बंदर से कुछ विकसित वन्य जंतु का एक वर्ग 2. गोरिल्ला; चिंपैंजी तथा ओरंग-ऊटंग आदि प्राणी समूह।

बनमाली [सं-पु.] 1. वनरक्षक; वनमाली; बागवान; (गार्डनर) 2. माला बनाने वाला व्यक्ति 3. बादल; मेघ 4. बहुत घने जंगलों वाला प्रदेश। [वि.] जो बनमाला धारण करता हो।

बनमुरगी [सं-स्त्री.] 1. एक प्रकार का जंगली पक्षी 2. कुकही।

बनरा [सं-पु.] 1. दूल्हा; वर 2. विवाह के समय गाया जाने वाला एक लोकगीत 3. वानर।

बनवाना [क्रि-स.] 1. किसी को कुछ बनाने में प्रवृत्त करना; बनाने का काम कराना 2. तैयार कराना; निर्माण कराना 3. किसी को कुछ करने में सहायता करना।

बनवारी [सं-पु.] 1. वनमाली 2. कृष्ण।

बना-ठना [वि.] 1. सजा-सँवरा; ख़ूब सज-धजकर रहने वाला 2. बनाव शृंगार करने वाला।

बनाना [क्रि-स.] 1. रचना करना 2. निर्माण या तैयार करना 3. ठीक दशा या रूप देना 4. सुसज्जित करना; सजाना 5. सुधारना; मरम्मत करना 6. आपस में अच्छा संबंध या मेल-जोल बनाए रखना 7. पैदा करना या कमाना 8. अच्छी या उन्नत दशा में पहुँचाना 9. एक रूप से दूसरे रूप में लाना 10. उपहास करना 11. किसी कार्य को संपन्न करना 12. झूठी बातें कहना 13. स्वीकार करना; मानना 14. लाभ उठाना।

बनाफर (सं.) [सं-पु.] क्षत्रियों में एक कुलनाम या सरनेम।

बनाम (फ़ा.) [अव्य.] 1. किसी के नाम पर 2. किसी के विरुद्ध 3. किसी के प्रति।

बनारस (सं.) [सं-पु.] 1. वाराणसी; काशी 2. एक पौराणिक शहर 3. हिंदुओं का प्रसिद्ध तीर्थ।

बनाव [सं-पु.] 1. बनावट; सजावट 2. बनना-सँवरना 3. उपाय; युक्ति; तदबीर 4. किसी के मेल का।

बनावट [सं-स्त्री.] 1. निर्माण; रचना 2. बनने या बनाने का भाव या ढंग; रचना 3. ऊपरी दिखावा; आडंबर 4. कृत्रिमता।

बनावटी [वि.] 1. जिसमें तथ्य एवं वास्तविकता न हो 2. ऊपरी; बाहरी; दिखाऊ 3. नकली; कृत्रिम।

बनिया (सं.) [सं-पु.] 1. व्यापारी 2. आटा, दाल आदि बेचने वाला 3. वैश्य 4. {ला-अ.} कंजूस और स्वार्थी व्यक्ति।

बनियान [सं-स्त्री.] कुरते-कमीज़ के नीचे पहनने वाला हलका वस्त्र; गंजी।

बनिस्बत (फ़ा.) [अव्य.] 1. बजाय 2. तुलना में 3. अपेक्षाकृत।

बनिहार [सं-पु.] 1. खेतिहर मज़दूर 2. फ़सल आदि काटने और खेत की रखवाली का काम करने वाला व्यक्ति।

बनैनी [सं-स्त्री.] 1. बनिया या वैश्य समाज की स्त्री 2. बनिए की पत्नी।

बनैला [सं-पु.] वन्य शूकर; जंगली सुअर। [वि.] जंगल में पाया जाने वाला; वन्य; जंगली।

बन्ना [सं-पु.] 1. वर; दूल्हा 2. विवाह के समय वर पक्ष की स्त्रियों द्वारा गाए जाने वाले एक प्रकार के लोक गीत 3. दंडकला नामक छंद।

बन्नी [सं-स्त्री.] 1. वधू; दुल्हन 2. विवाह के समय वधू पक्ष की स्त्रियों द्वारा गाए जाने वाले एक प्रकार के गीत।

बपंस [सं-पु.] 1. पैतृक संपत्ति में पुत्र को मिलने वाला अंश 2. पिता से पुत्र को प्राप्त गुण।

बपतिस्मा (इं.) [सं-पु.] ईसाई धर्म में नवजात शिशु या अन्य धर्मावलंबी को दीक्षित करने वाला एक संस्कार; (बैपटिज़म)।

बपौती [सं-स्त्री.] 1. पैतृक संपत्ति 2. बाप द्वारा छोड़ी गई जायदाद।

बप्पा [सं-पु.] 1. पिता; बाप 2. पिता के लिए स्नेहवश या आत्मीयतापूर्वक किया जाने वाला संबोधन।

बफरना (सं.) [क्रि-अ.] 1. क्रोधित होना; उत्तेजित होना 2. बिगड़ना 3. घमंड में भरकर लड़ने के लिए ज़ोर की आवाज़ करना 2. उपद्रव करना; उत्पात करना।

बफारा [सं-पु.] 1. दवायुक्त जल को उबालने पर उसमें से निकलने वाली भाप 2. उक्त भाप से शरीर का कोई अंग सेकना 3. गरम पानी में उबाली जाने वाली औषधियाँ।

बबर (फ़ा.) [सं-पु.] शेर की एक बड़े आकार की प्रजाति जो अफ्रीका में पाई जाती है; सिंह।

बबूल [सं-पु.] एक प्रकार का कँटीला वृक्ष जिसकी लकड़ी कठोर और बहुत मज़बूत होती है तथा जिसके फल, पत्तियाँ, गोंद आदि दवा के काम आते हैं।

बभनी [सं-स्त्री.] जोंक के आकार का छिपकली जैसा एक रेंगने वाला कीड़ा।

बभ्रू (सं.) [वि.] 1. गहरे भूरे रंग का 2. गंजा; खल्वाट।

बम1 [सं-पु.] 1. शिव नामक देवता को प्रसन्न करने के लिए उच्चरित किया जाने वाला शब्द 2. बैलगाड़ी या इक्के आदि में आगे की ओर निकला हुआ बाँस या मोटी लकड़ी का हिस्सा जिनमें घोड़े या बैल जोते जाते हैं।

बम2 (इं.) [सं-पु.] युद्ध या लड़ाई में फेंककर मारा जाने वाला या तोप आदि से चलाया जाने वाला विस्फोटक पदार्थों या बारूद का गोला; (बॉम्ब)।

बमकना [क्रि-अ.] 1. क्रोधित या उत्तेजित होकर ज़ोर से बोलना 2. आवेश में आकर डींग हाँकना या शेखी बघारना 3. उछलना।

बमकाना [क्रि-स.] 1. किसी को बमकने में प्रवृत्त करना 2. किसी को उत्तेजित या क्रोधित करना।

बमगोला [सं-पु.] बम या बारूद आदि का गोला; विस्फोटक गोला।

बमबाज़ (हिं.+फ़ा.) [वि.] 1. विस्फोटक या गोला फेंककर मारने वाला व्यक्ति 2. बम फेंकने में कुशल सैनिक।

बम-भोला [सं-पु.] परंपरागत रूप से शिव के लिए प्रयोग किया जाने वाला शब्द।

बमवर्षक [सं-पु.] बहुत तेज़ी से बम बरसाने वाला लड़ाई का बड़ा हवाई जहाज़।

बमीठा [सं-पु.] दीमकों की बाँबी; वल्मीक।

बमुश्किल (फ़ा.+अ.) [अव्य.] कठिनता से या कठिनाई पूर्वक।

बमोट [सं-पु.] दीमकों की बाँबी; बमीठा।

बय [सं-पु.] जुलाहों का कंघा या बेसर नामक औज़ार। [सं-स्त्री.] अवस्था; उम्र; वय।

बयना (सं.) [सं-पु.] मांगलिक अवसर या उत्सव आदि में संबंधियों या मित्रों को भेजी जाने वाली मिठाई।

बया (सं.) [सं-स्त्री.] गौरैया की तरह का एक पक्षी जो बहुत ही कलात्मक तरीके से अपना घोंसला बनाती है।

बयान (अ.) [सं-पु.] 1. अभियुक्त या साक्षी द्वारा कही गई बात; कथन 2. वृत्तांत; वर्णन; ज़िक्र।

बयानबाज़ी (अ.+फ़ा.) [सं-स्त्री.] 1. बयान देने की क्रिया 2. किसी विषय या चर्चित मुद्दे पर किसी नेता या अधिकारी द्वारा की गई टिप्पणी या प्रतिक्रिया 3. बयान पर बयान देते चलने की क्रिया या भाव, परस्पर बहस।

बयाना (अ.+फ़ा.) [सं-पु.] सौदा पक्का करने के लिए ख़रीदार द्वारा बेचने वाले को दी जाने वाली अग्रिम धनराशि; पेशगी।

बयार [सं-स्त्री.] 1. हवा; पवन 2. {ला-अ.} चलन।

बयालीस [वि.] संख्या '42' का सूचक।

बयासी [सं-पु.] संख्या '82' का सूचक।

बर (फ़ा.) [अव्य.] 1. पर; ऊपर, जैसे- बरतर-किसी से ऊपर 2. बाहर 3. सामने की दिशा में, जैसे- बरअक्स 4. अलग; पृथक, जैसे- बरतरफ़। [सं-पु.] 1. वृक्ष का फल 2. क्रोड 3. देह 4. बगल। [परप्रत्य.] 1. ढोने वाला; ले जाने वाला, जैसे- राहबर 2. श्रेष्ठ पूर्ण उत्तम, जैसे- दिलबर 3. फल से युक्त 4. तुलना या प्रतिस्पर्धा आदि में किसी से बढ़कर; श्रेष्ठ।

बरंगा [सं-पु.] 1. छत बनाने के लिए दीवार पर रखी जाने वाली मोटी और मज़बूत लकड़ी 2. छत पाटने की पत्थर की पटिया।

बरअक्स (फ़ा.+अ.) [वि.] 1. विपरीत; उलटा; प्रतिकूल 2. प्रत्युत; बरख़िलाफ़।

बरकंदाज (अ.+फ़ा.) [सं-पु.] 1. बंदूकची 2. मध्यकाल में बड़ी लाठी या तोड़ेदार बंदूक रखने वाला सिपाही।

बरकत (अ.) [सं-स्त्री.] 1. बढ़ती; बढ़ोत्तरी 2. कल्याण; मंगल 3. कमी न पड़ना; प्रचुरता 4. सौभाग्य; ख़ुशकिस्मती 5. लाभ; फ़ायदा 6. प्रसाद; कृपा।

बरकरार (फ़ा.+अ.) [वि.] 1. स्थिर; कायम; अचल 2. पहले की तरह मौजूद; बना हुआ; वर्तमान 3. भली-भाँति स्थापित; दृढ़ 4. जीवित; ज़िंदा 5. बहाल; पुनर्नियुक्त।

बरकरारी (फ़ा.) [सं-स्त्री.] 1. बरकरार होने की अवस्था 2. स्थिरता; बहाली।

बरखा [सं-स्त्री.] बरसात; वर्षा; वर्षा-ऋतु।

बरख़ास्त (फ़ा.) [वि.] 1. जिसे किसी नौकरी या पद से हटा दिया गया हो; पदच्युत 2. समाप्त या विसर्जित (सभा, अधिवेशन आदि)।

बरख़ास्तगी (फ़ा.) [सं-स्त्री.] 1. नौकरी या पद से हटाया जाना; पदच्युति 2. समाप्ति या विसर्जन (सभा आदि) 3. निष्कासन।

बरख़ुरदार (फ़ा.) [सं-पु.] 1. पुत्र; बेटा 2. संतान 3. छोटों के लिए आशीर्वाद सूचक संबोधन। [वि.] 1. सौभाग्यशाली; ख़ुशनसीब 2. फलता-फूलता हुआ; संपन्न 3. सफ़ल।

बरगद (सं.) [सं-पु.] 1. एक प्रसिद्ध और बहुत आधिक आयु वाला विशाल वृक्ष; वट वृक्ष; बड़ 2. {ला-अ.} किसी बड़े व्यक्ति की छत्रछाया या सहयोग।

बरगलाना [क्रि-स.] बहकाना; भटकाना; दिग्भ्रमित करना; गुमराह करना; फुसलाना।

बरगीत [सं-पु.] विवाह के समय गाया जाने वाला गीत।

बरछा [सं-पु.] एक प्रकार का अस्त्र; भाला।

बरछी [सं-स्त्री.] 1. लोहे आदि से बनी नोकदार लंबी मोटी कील 2. एक प्रकार का नुकीला अस्त्र; भाला 3. छोटा बरछा।

बरजना [क्रि-स.] 1. वर्जित या मना करना 2. रोकना 3. सामने आने पर भी ग्रहण न करना; त्यागना; छोड़ना 4. प्रयोग या उपयोग में न लाना; बचाना।

बरज़ोर (हिं.+फ़ा.) [वि.] 1. जिसमें ज़ोर या बल हो; प्रबल 2. अत्याचारी 3. बहुत कठिन या भारी 4. शोषक। [क्रि.वि.] ज़ोर लगाकर; बलपूर्वक; ज़बरदस्ती से।

बरत [सं-स्त्री.] 1. रस्सी; डोरी 2. वह रस्सी जिसपर चढ़कर नट खेल करता है।

बरतन (सं.) [सं-पु.] 1. भोजन पकाने या खाने के पात्र 2. रसोई के स्टील या पीतल के पात्र, जैसे- भगोना, पतीली, थाली आदि।

बरतना [क्रि-स.] 1. व्यवहार करना 2. काम में लाना 3. इस्तेमाल करना 4. बरताव करना।

बरताव [सं-पु.] 1. बरतने का ढंग या भाव 2. व्यवहार।

बरदाना [क्रि-स.] गाय या घोड़ी आदि का गर्भाधान कराने के लिए उनकी जाति के नर से संयोग कराना। [क्रि-अ.] गाय या भैंस आदि का नर से संयोग होना; गर्भाधान होना।

बरदार (फ़ा.) [परप्रत्य.] एक प्रत्यय जो शब्दों के अंत में जुड़कर निम्न अर्थ देता है- 1. वहन करने वाला; ढोने वाला, जैसे- झंडाबरदार 2. पालन करने वाला; मानने वाला, जैसे- फ़रमाँबरदार 3. उठानेवाला; ढोनेवाला, जैसे- अमलबरदार, नाज़बरदार।

बरदाश्त (फ़ा.) [सं-स्त्री.] 1. सहन करने का भाव 2. सहन करने की शक्ति; सहनशीलता।

बरपना (फ़ा.) [क्रि-अ.] 1. मचना या फैलना 2. उठना।

बरपा (फ़ा.) [वि.] 1. जो उठ खड़ा हुआ हो; फैलनेवाला (उपद्रव या उत्पात) 2. अपने पैरों पर खड़ा होने वाला।

बरपाना [क्रि-स.] 1. मचाना या फैलाना 2. उठाना।

बरफ़ (फ़ा.) [सं-स्त्री.] 1. पानी का ठोस रूप या जमा हुआ पानी 2. हिम; पाला; तुषार; ओला 3. कृत्रिम उपायों द्वारा जमाया गया पानी। [वि.] जो बरफ़ के समान ठंडा हो।

बरफ़ानी (फ़ा.) [वि.] 1. बरफ़ से ढका हुआ (पहाड़) 2. बरफ़ का 3. बरफ़ जैसा ठंडा; बरफ़ीला।

बरफ़िस्तान (फ़ा.) [सं-पु.] 1. साल भर बरफ़ से ढका रहने वाला भू-भाग 2. बरफ़ीला क्षेत्र।

बरफ़ी (फ़ा.) [सं-स्त्री.] चौकोर टुकड़ों के रूप में कटी एक मिठाई जो चाशनी में खोया, काजू आदि मिलाकर बनाई जाती है; एक मीठा व्यंजन।

बरफ़ीला (फ़ा.) [वि.] 1. जो बरफ़ से युक्त हो 2. जो बरफ़ की तरह ठंडा हो 3. बहुत बरफ़वाला।

बरबटी [सं-स्त्री.] एक तरह की पतली लंबी फली जिसकी सब्ज़ी बनाई जाती है; चवले की फली।

बरबस [अव्य.] 1. ज़बरदस्ती; प्रयासपूर्वक 2. अकारण; व्यर्थ; बे-फ़ायदे। [वि.] जिसका कोई वश न चलता हो; लाचार।

बरबाद (फ़ा.) [वि.] 1. नष्ट; विनष्ट; समाप्त 2. ख़त्म; तबाह; फेंका हुआ 3. धराशायी 4. (कार्य) चौपट; उजड़ा हुआ 5. जिसकी हालत चिंताजनक हो, जैसे- देश या राज्य आदि 6. जो संपत्तिविहीन हो गया हो; जो लूट लिया गया हो।

बरबादी (फ़ा.) [सं-स्त्री.] 1. बरबाद होने का भाव; विनाश; नाश 2. दुरुपयोग; अपव्यय 3. तबाही; ख़राबी।

बरमा [सं-पु.] लकड़ी में छेद करने का औज़ार।

बरमी [सं-पु.] दे. बर्मी।

बरवक्त (फ़ा.) [अव्य.] समय पर; मौके पर।

बरवै [सं-पु.] (काव्यशास्त्र) एक मात्रिक छंद जिसमें चार चरण होते हैं। इसके विषम यानी पहले और तीसरे चरणों में बारह मात्राएँ और सम यानी दूसरे और चौथे चरणों में सात मात्राएँ होती हैं।

बरस [सं-पु.] 1. वर्ष; साल 2. काल का वह मान जिसमें पृथ्वी एक बार सूर्य की परिक्रमा पूर्ण कर लेती है।

बरसना [क्रि-अ.] 1. बादलों से पानी की बूँदें गिरना; आकाश से जल गिरना; वर्षा होना 2. बूँदों की तरह गिरना; झड़ना, जैसे- फूल बरसना 3. बहुतायत से प्राप्त होना; इफरात में मिलना 4. चारों ओर से ख़ूब मात्रा में पहुँचना, जैसे- पैसा बरसना 5. हवा आदि से कणों या टुकड़ों के रूप में बिखरना 6. साफ़ झलकना 7. झरना; निरंतर झरते रहना 8. पड़ना; टपकना 9. {ला-अ.} किसी को चिल्लाते हुए डाँटना; सरापना; फटकारना।

बरसात [सं-स्त्री.] 1. वर्ष की वह ऋतु या मास जिसमें प्रायः पानी बरसता रहता है; पावस ऋतु 2. वह समय जिसमें आकाश से जल बरस रहा हो।

बरसाती [सं-स्त्री.] 1. प्लास्टिक, मोमजामे आदि का बना हुआ एक प्रकार का ढीला-ढाला कोट जिसे पहनने से शरीर या कपड़ों पर वर्षा के पानी का प्रभाव नहीं पड़ता 2. कोठियों आदि के प्रवेश-द्वार पर बना हुआ वह छायादार थोड़ा-सा स्थान जहाँ सवारियाँ उतारने के लिए गाड़ियाँ खड़ी होती हैं। [वि.] 1. बरसात संबंधी; बरसात का 2. बरसात में होने वाला।

बरसाना [क्रि-स.] 1. बादलों का जल की वर्षा करना 2. बूँदों की तरह लगातार बहुत-सी चीज़ें ऊपर से नीचे गिराना 3. बड़ी संख्या या मात्रा में बिखेरना (फूल आदि) 4. ओसाना; डाली देना (अनाज)।

बरसी [सं-स्त्री.] 1. पुण्यतिथि 2. मृत व्यक्ति का वार्षिक श्राद्ध।

बरहम (फ़ा.) [वि.] 1. जिसे क्रोध आ गया हो 2. भड़का हुआ; क्रुद्ध; उत्तेजित 3. क्षुब्ध; परेशान 4. इधर-उधर बिखरा हुआ; बेतरतीब।

बरांडल [सं-पु.] जहाज़ में मस्तूल को सीधे रखने के काम में आने वाला रस्सा; जहाजी काम में आने वाला कोई रस्सा; बरांडा।

बरात (सं.) [सं-स्त्री.] 1. विवाह के समय वर के साथ वधू पक्ष के यहाँ जाने वाले लोगों का समूह 2. {ला-अ.} एक साथ मिलकर या दल बाँधकर कहीं जाने वालों का समूह; मज़मा; भीड़।

बराती [सं-पु.] बरात में जाने वाला व्यक्ति। [वि.] 1. बरात में सम्मिलित 2. बरात का।

बराना [क्रि-स.] 1. अवसर पर कोई बात न कहना; वारण; निषेध 2. मतलब छिपाकर इधर-उधर की बातें कहना 3. हिफ़ाज़त करना; बचाना; रक्षा करना 4. अनेक बातों या वस्तुओं से किसी एक को छोड़ देना 5. इच्छानुसार वस्तुओं को चुनना; वरण 6. चुनना; छाँटना 7. जलाना।

बराबर (फ़ा.) [वि.] 1. समान; तुल्य; सदृश 2. गुण, महत्व, मात्रा, मान, मूल्य संख्या आदि के विचार से जो किसी के तुल्य या समान हो 3. समतल। [अव्य.] 1. एक पंक्ति में 2. लगातार 3. साथ; पास 4. सदा।

बराबरी (फ़ा.) [सं-स्त्री.] 1. समानता; तुल्यता; समता 2. बराबर होने की अवस्था या भाव 3. मुकाबला; सामना; प्रतिस्पर्धा 4. तुलना 5. गुस्ताख़ी।

बरामद (फ़ा.) [वि.] 1. खोई या चुराई हुई वस्तु जो कहीं से पुनः खोज निकाली जाए 2. बाहर आया हुआ; सामने आया हुआ।

बरामदगी (फ़ा.) [सं-स्त्री.] 1. बरामद होने की अवस्था या भाव 2. छिपाई गई वस्तु की प्राप्ति।

बरामदा (फ़ा.) [सं-पु.] 1. घर का बाहरी बैठने आदि का सामने से खुला स्थान 2. दालान; ओसारा 3. मकानों में वह छाया हुआ लंबा सँकरा भाग जो कुछ आगे या बाहर निकला रहता है; बारजा; छज्जा।

बरार (फ़ा.) [सं-पु.] वह चंदा जो पूरे गाँव से वसूला जाता हो। [वि.] 1. लाने वाला 2. लाया हुआ।

बरारी (सं.) [सं-स्त्री.] 1. दोपहर में गाई जाने वाली एक रागिनी 2. बरार क्षेत्र में होने वाली एक प्रकार की रुई।

बरी (फ़ा.) [वि.] 1. जो अभियोग या आरोप से मुक्त किया गया हो 2. रिहा; बंधनमुक्त 3. स्वतंत्र; मुक्त; आज़ाद 4. बेकसूर; निर्दोष।

बरेच्छा [सं-पु.] 1. विवाह-संबंध निश्चित करने की एक रीति; फलदान; सगाई 2. एक गहना जो बाँह पर पहना जाता है; बरेखी।

बरेज [सं-पु.] पान की खेती के लिए बनाया गया एक प्रकार का खेत; पानवाड़ी; पनबाड़ी।

बरेठ [सं-पु.] धोबी; बरेठा।

बरेठा [सं-पु.] कपड़े धोने वाला व्यक्ति; धोबी।

बरेत [सं-पु.] दूध को बिलोने वाली मथानी की रस्सी।

बरेता [सं-पु.] 1. सन का मोटा रस्सा; नार 2. मथानी की रस्सी 3. कुएँ से पानी निकालने वाला रस्सा; उबहन।

बरोक [सं-पु.] 1. विवाह होने से पहले की एक रस्म; बरेच्छा; रुकाई; टीका 2. वह धन या दहेज जो कन्यापक्ष द्वारा वरपक्ष को विवाह संबंध निश्चित करते समय दिया जाता है।

बरोज (सं.) [सं-स्त्री.] बरगद के वृक्ष की डालियों से निकलने वाली जटा; बरोह।

बरोठा [सं-पु.] 1. ड्योढ़ी; बैठक 2. बरामदा 3. प्रकोष्ठ; पौरी।

बरोह (सं.) [सं-पु.] बरगद, पाकड़ आदि की डालियों से निकलने वाली प्रशाखा; वट वृक्ष की जटा।

बरौनी [सं-स्त्री.] 1. आँख की पलक के किनारे के बाल; नेत्रपक्ष; पपनी 2. पानी भरने आदि का काम करने वाली स्त्री; कहारिन।

बर्की (अ.) [वि.] 1. बिजली का; बिजली संबंधी 2. बिजली की शक्ति से चलने वाला।

बर्ख़ास्त (फ़ा.) [वि.] दे. बरख़ास्त।

बर्ख़ास्तगी (फ़ा.) [सं-स्त्री.] दे. बरख़ास्तगी।

बर्गर (इं.) [सं-पु.] जंक फूड की श्रेणी में रखा गया पाव से बनाया जाने वाला एक प्रकार का खाद्य जिसे ब्रेड की तरह के गोल बन को काट कर उसकी ऊपरी व निचली सतहों के बीच (शाकाहारी या मांसाहारी) चटपटे खाद्य पदार्थ को लगा कर बनाया जाता है।

बर्छा [सं-पु.] दे. बरछा।

बर्तन (सं.) [सं-पु.] दे. बरतन।

बर्ताव [सं-पु.] दे. बरताव।

बर्थ (इं.) [सं-स्त्री.] बस, ट्रेन, जलयान या वायुयान में यात्री के सोने के लिए स्थान; शायिका।

बर्थडे (इं.) [सं-पु.] जन्मदिन; जन्म दिवस; वर्षगाँठ।

बर्दाश्त (फ़ा.) [सं-स्त्री.] दे. बरदाश्त।

बर्फ़ (फ़ा.) [सं-स्त्री.] दे. बरफ़।

बर्फ़बारी (फ़ा.) [सं-स्त्री.] दे. बरफ़बारी।

बर्फ़ानी (फ़ा.) [वि.] दे. बरफ़ानी।

बर्फ़ी (फ़ा.) [सं-स्त्री.] दे. बरफ़ी।

बर्फ़ीला (फ़ा.) [वि.] दे. बरफ़ीला।

बर्बट (सं.) [सं-पु.] 1. राजमाष 2. काली उड़द।

बर्बर (अ.) [सं-पु.] जंगली या असभ्य प्राणी। [वि.] क्रूर; असभ्य; उजड्ड; जंगली।

बर्बरता (सं.) [सं-स्त्री.] 1. बर्बर होने की अवस्था या भाव 2. क्रूरता; असभ्यता; नृशंसता 3. बर्बर आचरण या कार्य 4. उद्दंडता; उजड्डता।

बर्बरतापूर्ण (सं.) [वि.] निर्दयतापूर्ण; कठोर; क्रूरतापूर्ण; हिसंक।

बर्बरा (सं.) [सं-स्त्री.] 1. वनतुलसी 2. एक प्राचीन नदी का नाम 3. एक प्रकार की मक्खी 4. पीत चंदन 5. एक प्रकार का फूल।

बर्बाद (फ़ा.) [वि.] दे. बरबाद।

बर्बादी (फ़ा.) [सं-स्त्री.] दे. बरबादी।

बर्मी (सं.) [सं-पु.] वह जो बर्मा (वर्तमान म्यांमार) देश में रहता हो। [सं-स्त्री.] बर्मा (वर्तमान म्यांमार) की भाषा। [वि.] 1. बर्मा (म्यांमार) का 2. बर्मा (म्यांमार) संबंधी।

बर्र (सं.) [सं-पु.] 1. एक प्रकार का कीट जिसके काटने पर पीड़ा होती है; ततैया 2. सरसों के आकार का पीले फूल वाला एक काँटेदार पौधा जिसके बीज से तेल निकाला जाता है।

बर्राक (अ.) [वि.] 1. चमकने वाला; चमकीला 2. वेगवान; तेज़ 3. चतुर; चालाक 4. कंठस्थ 5. बहुत उजला; सफ़ेद।

बर्राना [क्रि-अ.] 1. नींद में बातें करना 2. बड़बड़ाना; प्रलाप करना।

बल (सं.) [सं-पु.] 1. ताकत 2. सहारा 3. सैनिक शक्ति; सेना 4. कोई संगठित शक्ति जो समूह, दल, संस्था आदि के रूप में प्रकट होती है 5. दबाव 6. कोई बात दूसरों से मनवाने का गुण 7. किसी वस्तु की ऐंठन; मरोड़ 8. लपेट; फेरा। -खाना : इठलाना; लहराना।

बलंद (फ़ा.) [वि.] 1. ऊँचा; उच्च; विशाल 2. बहुत अधिक।

बलकटी [सं-स्त्री.] मुसलमानी राज्य-काल में फ़सल काटने के समय वसूल की जाने वाली राज कर की किस्त।

बलकारक (सं.) [वि.] जो बल या शक्ति प्रदान करता हो; शक्तिदायक; स्फूर्तिदायक।

बलगम (अ.) [सं-पु.] श्लेष्मा; कफ़।

बलजीत (सं.) [वि.] जो बल द्वारा जीत सकता हो; जिसमें शक्ति हो; बलशाली।

बलतंत्र (सं.) [सं-पु.] 1. सैनिक व्यवस्था; फ़ौजी शासन 2. सेना या पुलिस आदि द्वारा किया जाने वाला प्रबंध।

बलदिया [सं-पु.] 1. वह जो गाय-बैल चराता हो; चरवाहा 2. बनजारा।

बलदेव (सं.) [सं-पु.] 1. बलराम; बलदाऊ 2. वायु।

बलना (सं.) [क्रि-अ.] 1. दहकना; जलना 2. किसी वस्तु का लौ या लपट के साथ जलना।

बलप्रयोग (सं.) [सं-पु.] 1. शक्ति के ज़ोर से कोई कार्य कराने की अवस्था 2. डराना; धमकाना 3. आतंक जमाना 4. अनुचित दबाव।

बलबलाना [क्रि-अ.] 1. जल, दूध आदि का उबलते समय 'बल-बल' करना; उफनना 2. ऊँट का बोलना 3. बड़बड़ाना 4. उफनना।

बलबलाहट [सं-स्त्री.] 1. 'बल-बल' की ध्वनि 2. बलबलाने की क्रिया या अवस्था 3. ऊँट की बोली।

बलबूता [सं-पु.] 1. ताकत; बल; ज़ोर 2. शारीरिक शक्ति तथा आर्थिक सामर्थ्य।

बलभद्र (सं.) [सं-पु.] 1. बलराम का एक नाम 2. लोध का वृक्ष 3. (पुराण) एक पर्वत।

बलभी (फ़ा.) [सं-स्त्री.] 1. मकान की सबसे ऊपर की छत का कमरा या कोठरी 2. ऊपर का खंड; चौबारा।

बलम (सं.) [सं-पु.] 1. पति; बालम; बालमा 2. प्रियतम; प्रेमी; प्रणयी।

बलराम (सं.) [सं-पु.] 1. बलभद्र; बलदेव 2. (पुराण) कृष्ण के बड़े भाई जो वसुदेव और रोहिणी के पुत्र थे।

बलवंत (सं.) [वि.] 1. बलवान; ताकतवर; शक्तिशाली 2. पुष्ट; मज़बूत।

बलवती (सं.) [वि.] बलवान होने का भाव या स्थिति। [सं-स्त्री.] जो बहुत अधिक प्रबल हो।

बलवत्ता (सं.) [सं-स्त्री.] 1. बलवान होने की अवस्था या भाव 2. मज़बूती; पुष्टता 3. श्रेष्ठता।

बलवर्धक (सं.) [वि.] जो बल बढ़ाए; बलवर्धी; शक्तिवर्धक।

बलवर्धन (सं.) [सं-पु.] ताकत बढ़ाने का काम; शक्तिवर्धन।

बलवा (फ़ा.) [सं-पु.] 1. बगावत; विद्रोह 2. दो पक्षों या संप्रदायों में होने वाला उग्र संघर्ष; उपद्रव; दंगा 3. अशांति।

बलवाई (फ़ा.) [सं-पु.] 1. वह जो बलवा करे; विद्रोही; बागी 2. वह जो अशांति फैलाए। [वि.] 1. बलवा करने वाला 2. अशांति फैलाने वाला।

बलवान (सं.) [वि.] 1. शक्तिशाली 2. पुष्ट; मज़बूत; बलिष्ठ।

बलवीर (सं.) [सं-पु.] बलराम का एक नाम। [वि.] बलशाली; वीर।

बलवृद्धि (सं.) [सं-स्त्री.] 1. शक्तिवर्धन; बल में होने वाली वृद्धि 2. सैन्यबल में बढ़ोत्तरी।

बलशाली (सं.) [वि.] बलवान; शक्तिशाली; बली।

बलहीन (सं.) [वि.] 1. शक्तिहीन; अशक्त 2. जिसमें बल न हो|

बलहीनता (सं.) [सं-स्त्री.] 1. बलहीन होने की अवस्था 2. कमज़ोरी; दुर्बलता।

बला1 (सं.) [सं-स्त्री.] एक प्रकार का औषधीय पौधा।

बला2 (अ.‍) [सं-स्त्री.] 1. मुसीबत; आफ़त; संकट; विपत्ति 2. दैवीय आपदा 3. कष्ट 4. (अंधविश्वास) भूत-प्रेत बाधा; आसमानी मुसीबत 5. बहुत कष्ट देने वाला व्यक्ति या वस्तु 6. चालाक; धूर्त।

बलाक (सं.) [सं-पु.] 1. बक; बगुला 2. (पुराण) एक राजा जो पुरु का पुत्र और जह्नु का पौत्र था 3. एक राक्षस।

बलाका (सं.) [सं-स्त्री.] 1. मादा बगुला 2. बगुलों की कतार 3. प्रेयसी; सुंदर स्त्री 4. कामुक स्त्री 5. नृत्य का एक भेद।

बलाग्र (सं.) [सं-पु.] 1. सेनानायक; चमूपति (सेनापति) 2. सेना का अगला भाग 3. बहुत बड़ी शक्ति। [वि.] बलवान; ताकतवर; शक्तिशाली।

बलाघात (सं.) [सं-पु.] 1. किसी काम या बात पर आवश्यकता से अधिक ज़ोर देना 2. (भाषाविज्ञान) उच्चारण में किसी शब्द पर अन्य शब्दों से ज़्यादा ज़ोर देने की क्रिया; स्वराघात।

बलाढ्य (सं.) [वि.] बलशाली; बली; ताकतवर।

बलात (सं.) [क्रि.वि.] 1. बलपूर्वक; ज़बरदस्ती 2. बल से 3. हठात; हठपूर्वक।

बलात्कार (सं.) [सं-पु.] 1. स्त्री की इच्छा के विरुद्ध ज़बरदस्ती किया जाने वाला संभोग; (रेप) 2. धोखा, भय या आतंक के बल पर शारीरिक संबंध स्थापित करना; (परंपरागत अर्थ में) शीलभंग; सतीत्वभंग 3. अन्याय; अत्याचार 4. बल या ताकत से नीति विरोधी कार्य करना; बल प्रयोग करना 5. किसी वस्तु या संसाधन का घोर दुरुपयोग।

बलात्कारी (सं.) [सं-पु.] 1. वह पुरुष जो स्त्री की इच्छा के विरुद्ध बलपूर्वक संभोग करता है; दुष्कर्मी; (रेपिस्ट) 2. किसी की इच्छा के विरुद्ध बलपूर्वक उससे कोई काम कराने वाला व्यक्ति 3. अन्याय तथा अत्याचार करने वाला व्यक्ति।

बलात्कृत (सं.) [वि.] 1. जिसका बलात्कार किया गया हो 2. जिससे जबरन कोई काम कराया गया हो।

बलाद्ग्रहण (सं.) [सं-पु.] 1. डरा-धमका कर कोई वस्तु ले लेने का कार्य 2. धन की ज़बरन वसूली 3. छीनना।

बलाधिकृत (सं.) [सं-पु.] प्राचीन भारत में किसी राज्य की सेना का सेनापति या सर्वोच्च पदाधिकारी।

बलाधिक्य (सं.) [सं-स्त्री.] बल या ताकत की अधिकता।

बलान्नयन (सं.) [सं-पु.] 1. ज़बरदस्ती ले जाने का कार्य 2. चालक या पायलट को आतंकित करके या बलपूर्वक बस, ट्रेन, वायुयान आदि को गंतव्य स्थान के अतिरिक्त किसी अन्य (निर्जन या असुरक्षित) स्थान पर ले जाने का कार्य; (हाइजैकिंग)।

बलाय (अ.) [सं-स्त्री.] विपत्ति; संकट; आफ़त।

बलाहक (सं.) [सं-पु.] 1. बादल; मेघ 2. सर्पों का एक भेद 3. एक प्रकार का पक्षी 4. एक पर्वत।

बलि (सं.) [सं-स्त्री.] 1. किसी देवता या देवी के नाम पर मारा गया पशु 2. नैवेद्य; भोग 3. पूजन सामग्री 4. पेट में नाभि के ऊपर पड़ने वाली रेखा 5. बवासीर का मस्सा 6. शरीर की त्वचा पर होने वाली छाजन 7. गुदा के पास होने वाला एक फोड़ा 8. भूमि की उपज के बदले राजा को मिलने वाला कर; राजकर 9. वह स्थिति जिसमें कोई व्यक्ति अपने प्राण तक किसी पर न्योछावर कर देता है। [सं-पु.] 1. (पुराण) वह राजा जिसे विष्णु ने वामन रूप रखकर छला था 2. पंच महायज्ञों में से भूत यज्ञ नामक चौथा महायज्ञ 3. चँवर का डंडा।

बलिदान (सं.) [सं-पु.] 1. किसी उच्च उद्देश्य के लिए प्राण देना; शहादत; त्याग 2. देवता को नैवेद्य का अर्पण।

बलिदानी (सं.) [वि.] 1. महान उद्देश्य के लिए प्राण त्याग करने वाला 2. बलिदान संबंधी; बलिदान का 3. बलि चढ़ाने वाला।

बलिवेदी (सं.) [सं-स्त्री.] बलि देने की जगह; वह स्थल जहाँ पूजा या यज्ञ आदि में पशु की बलि दी जाती है।

बलिष्ठ (सं.) [वि.] जो शरीर से शक्तिशाली हो; बलवान; ताकतवर।

बलिष्ठता (सं.) [सं-स्त्री.] 1. बलिष्ठ होने की अवस्था या भाव 2. ताकत; शक्ति 3. कड़ापन; दम 4. मज़बूती।

बलिहारी [सं-स्त्री.] 1. न्योछावर करने की क्रिया या भाव 2. प्रेम, श्रद्धा आदि के कारण अपने आपको किसी के अधीन या किसी पर न्योछावर कर देना।

बली (सं.) [वि.] बलवान; पराक्रमी। [सं-स्त्री.] 1. सिलवट; बल 2. त्वचा पर शिकन से पड़ी हुई रेखा।

बलुआ [वि.] जिसमें बालू अधिक मिला हो; रेतीला। [सं-पु.] रेतीली भूमि।

बलूच [सं-पु.] बलूचिस्तान में बसने वाली एक जाति; बलोच; बिलोच।

बलूचिस्तान [सं-पु.] भारत के पश्चिम में स्थित एक देश।

बलूत (अ.) [सं-पु.] (यूरोप आदि) ठंडे देशों में पाया जाने वाला एक पेड़; (ओक)।

बलून (इं.) [सं-पु.] 1. गुब्बारा 2. एक प्रकार का बड़ा गुब्बारा जिसके सहारे हवा में उड़ा जाता है; (पैराशूट)।

बलोच [सं-पु.] बलूचिस्तान की एक जाति का नाम।

बल्कल (सं.) [सं-पु.] वृक्ष की छाल (खाल); वृक्ष की त्वचा; वल्कल।

बल्कस (सं.) [सं-पु.] आसव की तलछट।

बल्कि (फ़ा.) [अव्य.] 1. किंतु; वरन; अपितु 2. अच्छा हो कि।

बल्ब (इं.) [सं-पु.] 1. पतले शीशे का एक उपकरण जो बिजली के संपर्क से प्रकाश करता है 2. शीशे की नली का अधिक चौड़ा भाग; लट्टू।

बल्य (सं.) [वि.] बल बढ़ाने वाला; बलकारक; शक्तिवर्धक।

बल्या (सं.) [सं-स्त्री.] 1. अश्वगंधा नामक औषधीय पौधा 2. चंगोनी या चिंगोनी नाम का पौधा 3. एक अति प्राचीन युद्ध विद्या।

बल्लम (सं.) [सं-पु.] 1. भाला 2. बरछा 3. मोटी छड़ 4. सोने या चाँदी का पत्तर चढ़ा हुआ सोटा 5. लकड़ी का बड़ा और मोटा डंडा या बल्ला।

बल्लव (सं.) [सं-पु.] 1. भेड़, बकरी, पशु आदि चराने वाला; चरवाहा 2. अहीर; ग्वाला 3. रसोइया 4. (महाभारत) अज्ञातवास के समय राजा विराट के यहाँ रसोइए का काम करते हुए भीम का नाम।

बल्ला [सं-पु.] 1. लकड़ी का डंडा जिससे गेंद खेलते है 2. क्रिकेट के खेल में प्रयोग होने वाला काठ का वह चपटा सोंटा जिससे गेंद पर आघात करते हैं; (बैट) 3. नाव खेने का डंडा या बाँस 4. मोटी, सीधी और लंबी लकड़ी; लट्ठा; बड़ी बल्ली 5. मोटा डंडा 6. होली में जलाने के लिए गोबर की सुखाई हुई खोखली-सी टिकिया; उपला।

बल्लारी [सं-स्त्री.] (संगीत) एक रागिनी, जिसमें केवल कोमल गांधार लगता है।

बल्ली [सं-स्त्री.] 1. छोटा बल्ला 2. नाव खेने का बाँस; डंडा।

बल्लेबाज़ (हिं.+फ़ा.) [सं-पु.] क्रिकेट के खेल में बल्ले से खेल रहा खिलाड़ी; बल्ले से गेंद पर प्रहार करने की क्रिया या कला में निपुण खिलाड़ी; (बैट्समैन)।

बल्लेबाज़ी (हिं.+फ़ा.) [सं-स्त्री.] 1. क्रिकेट के खेल में बल्ले से गेंद पर प्रहार करने की क्रिया या कला 2. बल्ले से गेंद पर प्रहार करके रन बनाने का काम; (बैटिंग) 3. किसी टीम की रन बनाने की पारी।

बवंडर [सं-पु.] तेज़ हवा की वह अवस्था जिसमें वह घेरा बाँधकर चक्र की तरह घूमती हुई ऊपर उठती हुई आगे बढती है; चक्रवात; अंधड़।

बवाल [सं-पु.] 1. तमाशा खड़ा करना 2. बखेड़ा; फ़साद।

बवासीर (अ.) [सं-स्त्री.] एक रोग जिसमें गुदेंद्रिय में मस्से निकलते हैं; अर्श; ऐसा रोग जो ख़ूनी और बादी दो प्रकार का होता है; (पाइल्स)।

बशर (अ.) [सं-पु.] मनुष्य; आदमी; व्यक्ति।

बशर्त (फ़ा.+अ.) [अव्य.] शर्त के साथ; यदि।

बशर्ते (फ़ा.+अ.) [अव्य.] शर्त यह है कि।

बशीर (अ.) [वि.] शुभ संवाद सुनाने वाला।

बशीरी (अ.) [सं-पु.] एक तरह का मुलायम रेशमी कपड़ा।

बस1 (फ़ा.) [क्रि.वि.] और नहीं; और अधिक नहीं; इतना बहुत है।

बस2 (इं.) [सं-स्त्री.] सड़क यातायात के लिए बड़े आकार का सार्वजनिक यात्री वाहन।

बसंत (सं.) [सं-पु.] 1. एक पौधा 2. एक ऋतु जब शीतकाल समाप्त होता है और ग्रीष्म आरंभ नहीं होता; मधुमास; ऋतुराज।

बसंती (सं.) [सं-पु.] 1. चमकदार चटक पीला रंग 2. पीला कपड़ा। [वि.] 1. वसंत ऋतु से संबंधित 2. वसंत का 3. सरसों के फूल जैसे रंग का।

बसना (सं.) [क्रि-अ.] 1. रहना; स्थित होना 2. टिकना; ठहरना 3. आबाद होना 4. जीव-जंतुओं, पक्षियों आदि का बिल, गुफा या घोंसला बनाकर अथवा मनुष्यों का झोपड़ी या मकान बनाकर रहना। [सं-पु.] 1. वह कपड़ा जिसमें कोई वस्तु लपेटकर रखी जाए 2. वह थैली जिसमें दुकानदार अपने बटखरे आदि रखते हैं 3. वह कोठी जहाँ ऋण लेने-देने का कारोबार होता है।

बसपा [सं-स्त्री.] एक राजनीतिक दल का नाम; बहुजन समाज पार्टी का संक्षिप्त रूप; (बीएसपी)।

बसर (फ़ा.) [सं-स्त्री.] 1. गुज़र; निर्वाह 2. जीवनयापन।

बसाना (सं.) [क्रि-स.] 1. घर-गृहस्थी से युक्त करना; व्यवस्था करना 2. (व्यक्ति के संबंध में) रहने के लिए घर अथवा जीवन-निर्वाह के लिए उचित साधन या सुविधाएँ देना। [क्रि-अ.] दुर्गंध देना; बदबू करना।

बसाहट [सं-स्त्री.] 1. किसी स्थान के बसे होने की अवस्था 2. मुहल्ला; बस्ती।

बसीठ (सं.) [सं-पु.] 1. संदेशवाहक; दूत; पैगंबर 2. गाँव का मुखिया।

बसीत (अ.) [सं-पु.] 1. कमान 2. सूर्य का अक्षांश जानने का उपकरण (यंत्र) जो जहाज़ पर रहता है।

बसु [सं-पु.] बंगालियों में एक कुलनाम या सरनेम।

बसुमती [सं-स्त्री.] पृथ्वी; वसुधा; धरा।

बसूला [सं-पु.] बढ़ई का एक औज़ार (उपकरण) जिससे लकड़ी छीलने और काटने का काम किया जाता है।

बसेरा [सं-पु.] 1. रहने का स्थान 2. टिकने का ठिकाना 3. अस्थायी निवास 4. घोंसला; वह जगह जहाँ पक्षी रात बिताते हैं।

बस्त (सं.) [सं-पु.] बकरा 2. सूर्य।

बस्तर [सं-पु.] 1. छत्तीसगढ़ राज्य का ख़ूबसूरत जंगलों और आदिवासी संस्कृति वाला एक ज़िला जो प्रदेश‌ की सांस्कृतिक राजधानी के तौर पर जाना जाता है।

बस्ता (फ़ा.) [सं-पु.] 1. वह बैग जिसमें विद्यार्थी अपनी पुस्तकें रखकर विद्यालय जाते हैं 2. वह बैग या थैला जिसमें किताबें या कागज़-पत्र रखकर ले जाते हैं; बेठन 3. बेठन में बँधी हुई पुस्तकें; कागज़-पत्र। [वि.] बँधा हुआ; तह किया हुआ।

बस्ती (सं.) [सं-स्त्री.] 1. वह स्थान जहाँ बहुत से लोग घर बनाकर एक साथ रहते हों 2. स्थान विशेष में रहने वाले लोग; आबादी।

बहँगी [सं-पु.] मोटे बाँस के टुकड़े के दोनों सिरों पर रस्सियों से बना छींका या पलड़ा लटकाकर बनाया गया बोझ ढोने का उपकरण; काँवर।

बहक [सं-स्त्री.] 1. बहकने की अवस्था, क्रिया या भाव 2. केवल शब्दों के ध्वनि-सादृश्य के आधार पर बिना समझे-बूझे या अनुमान से कही हुई बहुत बड़ी भ्रमपूर्ण और हास्यास्पद बात 3. पथभ्रष्ट होने की अवस्था 4. बेसिर-पैर की बात; ऊलजलूल बात।

बहकना [क्रि-अ.] 1. सही रास्ते से हटकर गलत रास्ते पर जाना 2. पथभ्रष्ट होना 3. धोखा खाना 4. आवेश या मद में चूर होना 5. नशे में डूबे होने कारण व्यर्थ की बातें करना।

बहकाना [क्रि-स.] 1. ऐसा काम करना जिससे कोई बहक जाए 2. गलत रास्ते पर ले जाना; पथभ्रष्ट करना 3. चकमा या धोखा देना 4. भरमाना; बहलाना (बच्चों को)।

बहकावा [सं-पु.] 1. बहकाने की क्रिया या भाव 2. बहकाने की बात; भुलावा।

बहत्तर [वि.] संख्या '72' का सूचक।

बहन (सं.) [सं-स्त्री.] 1. अपनी माता से उत्पन्न कन्या 2. बुआ, चाचा, ताऊ, मामा, मौसी आदि की पुत्री 3. समवयस्क स्त्री के लिए संबोधन।

बहना1 (सं.) [क्रि-अ.] 1. प्रवाहित होना 2. द्रव का ढुलकना 3. द्रव पदार्थ का किसी नीचे तल की तरफ़ गिरना 4. अधिक मात्रा या मान में निरंतर किसी ओर गतिशील होना; उमड़ना 5. दुर्दशाग्रस्त होकर इधर-उधर घूमना; मारा-मारा फिरना।

बहना2 [सं-स्त्री.] बहन के लिए प्रयुक्त संबोधन।

बहनापा [सं-पु.] 1. बहन का नाता 2. स्त्रियों में बहन की तरह होने वाला आपसी संबंध।

बहनेली [सं-स्त्री.] 1. मुँहबोली बहन 2. सखी; सहेली 3. वह स्त्री जिसके साथ बहन का नाता जोड़ा जाए 4. बहन की तरह की कोई स्त्री।

बहनोई [सं-पु.] बहन का पति; जीजा।

बहनौरा [सं-पु.] 1. बहन की ससुराल 2. बहनोई या उसके परिवार से होने वाला संबंध।

बहरहाल (फ़ा.) [क्रि.वि.] 1. फिलहाल 2. फिर भी; तो भी।

बहरा (सं.) [वि.] 1. जिसे सुनाई न पड़े 2. जिसकी श्रवण शक्ति नष्ट हो गई हो 3. ऊँचा सुनने वाला 4. {ला-अ.} किसी की बात पर ध्यान न देने वाला।

बहराना [सं-पु.] किसी नगर की सीमा पर या उससे बाहर स्थित मुहल्ला या बस्ती। [क्रि-अ.] 1. बाहर होना; निकलना 2. बहरा हो जाना। [क्रि-स.] 1. सुनकर भी अनुसनी करना 2. बाहर करना; निकालना।

बहरी (अ.) [सं-पु.] बाज़ की तरह का एक शिकारी पक्षी।

बहल [सं-स्त्री.] 1. बैलगाड़ी 2. सवारी के काम आने वाली छतरीदार बैलगाड़ी; बहली।

बहलना [क्रि-अ.] 1. ध्यान को दूसरी ओर लगाने से दुख, उदासी या चिंता दूर होना 2. कुछ समय के लिए मन का ख़ुश और शांत होना 3. मनोरंजन होना।

बहलाना [क्रि-स.] 1. मन को दुख, क्लेश या चिंता देने वाली बात से हटाकर प्रसन्नताजनक विषय या काम में लगाना या ऐसा करने का प्रयास करना 2. कुछ समय के लिए मन को ख़ुश और शांत करना 3. मनोरंजन करना 4. बहकाना; भुलावा देना।

बहलावा [सं-पु.] 1. बहलाने की क्रिया या भाव; बहलाव 2. मनोरंजन 3. बहकाने की क्रिया या भाव; बहकावा।

बहस (अ.) [सं-स्त्री.] वाद-विवाद; ज़िरह।

बहसना [क्रि-अ.] 1. किसी से बातों में उलझना; बहस करना 2. विवाद या तर्क-वितर्क करना।

बहादुर (तु.) [वि.] 1. वीर; शूर 2. सूरमा; योद्धा 3. साहसी; निडर।

बहादुरी (तु.) [सं-स्त्री.] 1. वीरता; शूरता 2. दिलेरी।

बहाना1 [क्रि-स.] 1. जल या अन्य किसी द्रव को किसी दिशा में प्रवाहित करना 2. बहने के लिए किसी चीज़ को पानी की धारा या नदी आदि में गिराना 3. किसी पात्र आदि से कोई तरल धारा के रूप में गिराना 4. अश्रुपात करना 5. {ला-अ.} बरबाद करना; नष्ट करना; उड़ाना 6. {ला-अ.} गँवाना; लुटाना; कम दामों पर या सस्ता बेचना।

बहाना2 (फ़ा.) [सं-पु.] 1. काम या बात को पूरा न करने के लिए कहा जाने वाला झूठ 2. हीला; टालमटोल; बनावटी बात 3. अपना बचाव या किसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए कही गई झूठी बात 4. कारण; हेतु; वजह; निमित्त 5. नाममात्र का कारण।

बहानेबाज़ (फ़ा.) [वि.] जो ज़्यादातर बहाने बनाता हो; बहाने बनाने वाला; टालमटोल करने वाला।

बहानेबाज़ी (फ़ा.) [सं-स्त्री.] बहाना बनाने का काम या स्वभाव; टालमटोल; आनाकानी।

बहार (फ़ा.) [सं-स्त्री.] 1. फूलों के खिलने का मौसम; वसंत-ऋतु 2. हरियाली 3. शोभा; रौनक 4. (संगीत) एक रागिनी 5. {ला-अ.} मन का आनंद और प्रफुल्लता; मज़ा; मौज 6. {ला-अ.} यौवनकाल।

बहाल (फ़ा.) [वि.] 1. कायम 2. पूर्ववत स्थित; ज्यों का त्यों 3. मुअत्तली की समाप्ति होकर पुनर्नियुक्त 4. उच्च न्यायालय के द्वारा छोटी अदालत के निर्णय की यथावत स्थिति 5. शारीरिक दृष्टि से भला-चंगा।

बहाली (फ़ा.) [सं-स्त्री.] 1. अपने पद या नौकरी से अस्थायी रूप से हटाए जाने वाले व्यक्ति की फिर से उस पद या नौकरी पर नियुक्ति; पुनर्नियुक्ति 2. किसी को फिर उसी दशा या हालत में लाना जिसमें वह पहले था; पूर्व अवस्था की पुनः प्राप्ति 3. उच्च न्यायालय द्वारा छोटे न्यायालय या अदालत के निर्णय की यथावत स्थिति 4. मन की प्रसन्नता; ख़ुशी।

बहाव [सं-पु.] 1. बहने की क्रिया या भाव 2. प्रवाह; धारा 3. जल की धारा 4. {ला-अ.} किसी विचारधारा, प्रथा आदि की ऐसी वेगपूर्ण गति जिसे रोकना या जिसका विरोध करना बहुत मुश्किल हो।

बहिन (सं.) [सं-स्त्री.] दे. बहन।

बहिरंग (सं.) [सं-पु.] 1. बाहरी या ऊपरी अंग 2. पूजा के आरंभ में किए जाने वाले औपचारिक और बाह्य कृत्य। [वि.] 1. बाहर का; बाहरी 2. प्रारंभिक; 'अंतरंग' का विपर्यय।

बहिर्गमन (सं.) [सं-पु.] 1. बाहर जाना; बाहर निकलना 2. निर्गम।

बहिर्जगत (सं.) [सं-पु.] बाह्य संसार; दृश्य जगत।

बहिर्मुख (सं.) [वि.] 1. जिसका मुख बाहर की ओर हो 2. जिसका अगला भाग बाहर की ओर हो 3. जिसकी रुचि बाह्य जगत या विषय में हो।

बहिर्मुखी (सं.) [वि.] 1. जिसका मुँह बाहर की ओर हो 2. जो बाहर की ओर प्रवृत्त हो; बहिर्मनस्क; विमुख 3. बाहर की दुनिया में रुचि लेने वाला; आपसी संवाद स्थापित करने के स्वभाव वाला; (एक्स्ट्रोवर्ट)।

बहिला [सं-स्त्री.] 1. बच्चा न देने वाली (गाय, भैंस) 2. बाँझ; ठाँठ।

बहिश्त (फ़ा.) [सं-पु.] 1. स्वर्ग; बैकुंठ; ज़न्नत 2. {ला-अ.} स्वर्ग जैसा सुखमय स्थान।

बहिश्ती (फ़ा.) [सं-पु.] स्वर्ग का निवासी व्यक्ति। [वि.] 1. बहिश्त का 2. बहिश्त में रहने वाला।

बहिष्करण (सं.) [सं-पु.] 1. बहिष्कार करने की क्रिया 2. किसी कार्य या बात से अलग करना।

बहिष्कार (सं.) [सं-पु.] 1. बाहर करना; निकालना 2. अलग करना; दूर करना 3. किसी के साथ संबंधों का त्याग 4. पंचायत द्वारा दी जाने वाली सज़ा जिसके अनुसार अपराधी के परिवार के सभी सदस्यों को मदद से वंचित रखा जाता है 4. हटाना।

बहिष्कृत (सं.) [वि.] 1. जिसका बहिष्कार किया गया हो 2. बाहर किया या निकाला हुआ; निर्वासित 3. हटाया हुआ; दूर किया हुआ 4. जिसके साथ संबंध ख़त्म कर दिया गया हो; परित्यक्त 5. {ला-अ.} वर्जित।

बही [सं-स्त्री.] 1. सिली हुई मोटी कॉपी जो हिसाब लिखने के काम आती है; महाजनों व्यापारियों आदि के हिसाब का रजिस्टर 2. लेन-देन का नित्यप्रति हिसाब रखने या लिखने की पुस्तिका।

बहीखाता [सं-पु.] हिसाब-किताब लिखने की पंजी या पुस्तक; लेखा-बही; (अकाउंट बुक)।

बहु (सं.) [पूर्वप्रत्य.] एक प्रत्यय जो किसी शब्द के आरंभ में जुड़कर अधिकता या अनेकता का बोध कराता है, जैसे- बहुमूल्य, बहुउद्देशीय आदि।

बहुअर्थी (सं.) [वि.] जिसके कई अर्थ हों; अनेक अर्थों वाला।

बहुआयामी (सं.) [वि.] अनेक आयामों वाला; अनेक पक्षों वाला; अनेक स्तरों या कोणों वाला (लेखन या व्यक्तित्व)।

बहुकालिक (सं.) [वि.] दीर्घकालीन; लंबी अवधि में संपन्न होने वाला; सालों-साल का।

बहुकेंद्रिक (सं.) [वि.] जिसके अनेक केंद्र हों; जो अनेक केंद्रों पर स्थित हो।

बहुकेंद्रिकता (सं.) [सं-स्त्री.] बहुकेंद्रिक होने की अवस्था या भाव।

बहुकोणीय (सं.) [वि.] 1. जिसमें अनेक कोण हों 2. बहुभुज 3. कई तरह से होने वाला; अनेक दृष्टियों से होने वाला।

बहुगामी (सं.) [वि.] अनेक दिशाओं में जाने वाला।

बहुगुणित (सं.) [वि.] 1. कई गुना 2. जिसमें बहुत गुण हों।

बहुचर्चित [वि.] 1. प्रसिद्ध; मशहूर 2. जिसकी बहुत चर्चा हो; ख्यातनाम।

बहुजन (सं.) [सं-पु.] 1. जनता; जनसमूह 2. समाज में रहने वाले बहुसंख्यक लोग।

बहुज्ञ (सं.) [वि.] 1. बहुत-सी बातों का ज्ञान रखने वाला; अनेक विषयों का ज्ञाता 2. जानकार।

बहुत (सं.) [वि.] 1. अधिक 2. प्रभूत; प्रचुर 3. जो गिनती में सामान्य से अधिक हो 4. परिमाण, मात्रा आदि में आवश्यक या उचित से अधिक 5. जितना होना चाहिए उतना या उससे कुछ अधिक; यथेष्ट।

बहुतायत (सं.) [सं-स्त्री.] अधिक या बहुत होने का भाव; अधिकता; प्रचुरता।

बहुतेरा (सं.) [वि.] 1. बहुत बार; कई बार 2. मान में बहुत अधिक। [क्रि.वि.] 1. बहुत तरह से 2. अनेक प्रकार से।

बहुत्व (सं.) [सं-पु.] 1. संख्या या मात्रा में बहुत होने का भाव 2. अधिकता; आधिक्य; बहुलता; बहुतायत।

बहुदर्शी (सं.) [वि.] 1. जिसने बहुत कुछ देखा हो; जिसे संसार की रीति या व्यवहार का अच्छा अनुभव हो 2. अनुभवी; दुनियादार।

बहुदेववाद (सं.) [सं-पु.] अनेक देवी-देवताओं को मान्यता देने वाला सिद्धांत या धर्म।

बहुदेशीय (सं.) [वि.] जिसमें अनेक देश या उनकी जनता शामिल हो; जो कई देशों में हो; अंतरराष्ट्रीय।

बहुद्देशीय (सं.) [वि.] अनेक उद्देश्यों या कार्यों को पूरा करने वाला (नियम, परियोजना आदि); (मल्टीपरपज़)।

बहुधर्मी (सं.) [वि.] 1. जिस समाज में अनेक धर्मों को मानने वाले साथ रहते हों 2. अनेक विशेषताओं और गुणों से संपन्न; तरह-तरह के काम जानने और करने वाला।

बहुधा (सं.) [क्रि.वि.] हमेशा; अक्सर; ज़्यादातर।

बहुपक्षीय (सं.) [वि.] 1. अनेक पक्षों वाला 2. बहुत से पक्षों से संबंधित 3. बहुत से देशों के बीच का, जैसे- बहुपक्षीय संपर्क।

बहुपठित (सं.) [वि.] 1. जिसने बहुत सारा पढ़ा हो; विद्वान 2. जो बहुत पढ़ा गया हो, जैसे- बहुपठित उपन्यास।

बहुपतित्व (सं.) [सं-पु.] एक सामाजिक प्रथा जिसमें एक स्त्री के एक से अधिक पति होते हैं; बहुपति प्रथा; (पॉलिएंड्री)।

बहुपदीय (सं.) [वि.] 1. (काव्य) जिसमें बहुत से पद या चरण हों 2. अनेक पैरों वाला।

बहुप्रकार (सं.) [अव्य.] अनेक प्रकार से। [वि.] बहुविध।

बहुप्रचलित (सं.) [वि.] जो बहुत अधिक चलन में हो।

बहुप्रचारित (सं.) [वि.] जिसका बहुत प्रचार किया गया हो; जिसका बहुत प्रचार हो।

बहुप्रयोजनीय (सं.) [वि.] जिसके कई उद्देश्य या प्रयोजन हों।

बहुफला (सं.) [सं-स्त्री.] वह पौधा या लता जिसपर बहुत मात्रा में फल लगते हैं, जैसे- सेमफली, करेला, ककड़ी।

बहुबीज (सं.) [सं-पु.] जिस फल में बहुत बीज होते हैं, जैसे- शरीफा, बिजौरा नीबू आदि।

बहुब्रीहि (सं.) [सं-पु.] (व्याकरण) समास का एक प्रकार जिसमें समस्त पदों से कोई भिन्न अर्थ ग्रहण किया जाता है, जैसे- दशानन 'दस है जिसके मुख' अर्थात रावण।

बहुभाषाविद (सं.) [सं-पु.] वह व्यक्ति जिसे अनेक भाषाओं का ज्ञान हो और जो बहुत-सी भाषाएँ बोलता या जानता हो; बहुभाषी।

बहुभाषिक (सं.) [सं-पु.] 1. बहुत-सी भाषाएँ बोलने वाला व्यक्ति; बहुभाषी 2. वह जो कई भाषाएँ जानता हो।

बहुभाषिकता (सं.) [सं-स्त्री.] अनेक भाषाओं का जानकार या विद्वान होने की अवस्था भाव या गुण।

बहुभाषी (सं.) [सं-पु.] वह व्यक्ति जो एक से अधिक भाषा जानता हो। [वि.] बहुभाषा संबंधी; बहुभाषिक, जैसे- बहुभाषी समाज।

बहुभुज (सं.) [सं-पु.] 1. बहुबाहु; अनेक भुजाओं वाला क्षेत्र 2. बहुकोणीय।

बहुभुजा (सं.) [सं-स्त्री.] दुर्गा। [वि.] अनेक भुजाओं वाला या जिसकी कई भुजाएँ हों।

बहुमंजरी (सं.) [सं-स्त्री.] तुलसी नामक पौधा।

बहुमंज़िला [वि.] जिसमें अनेक मंज़िलें या तल हों; बहुखंडीय।

बहुमत (सं.) [सं-पु.] 1. बहुसंख्यकों की राय; अधिकांश की सहमति 2. चुनाव क्षेत्र में कुल पड़ने वाले मतों के आधे से अधिक मत 3. किसी संस्था, समिति आदि के आधे से अधिक सदस्यों का मत।

बहुमान (सं.) [सं-पु.] अति आदर या मान।

बहुमुखी (सं.) [वि.] 1. अनेक विषयों या क्षेत्रों से संबंधित 2. अनेक दिशाओं में लागू होने वाला या जाने वाला।

बहुमूल्य (सं.) [वि.] 1. बेशकीमती; अधिक कीमतवाला 2. गुण, महत्व आदि की दृष्टि से श्रेष्ठ; प्रशंसनीय।

बहुरंग (सं.) [वि.] 1. बहुत से रंगोंवाला; बहुवर्णीय; रंग-बिरंगा; (मल्टीकलर) 2. बहुपार्श्वीय 3. {ला-अ.} अनेक प्रकार का; विविधतापरक।

बहुरंगी (सं.) [सं-पु.] बहुरूपिया। [वि.] कई रंगोंवाला; रंग-बिरंगा।

बहुरना [क्रि-अ.] 1. वापस आना; लौटना; लौट आना 2. फिर मिलना।

बहुराष्ट्रीय (सं.) [वि.] 1. जो अनेक देशों से संबंधित हो 2. जिसका प्रसार बहुत से देशों में हो, (मल्टीनैशनल)।

बहुरूप (सं.) [वि.] 1. अनेक रूपों या आकारों वाला 2. अनेक रूप बनाने वाला (बहुरूपिया)।

बहुरूपिया (सं.) [सं-पु.] वह जो जीविका निर्वाह के लिए विविध वेष धारण करता है या स्वाँग बनाकर लोगों का मनोरंजन करता है। [वि.] 1. अनेक रूपोंवाला 2. अनेक प्रकार के रूप बनाने वाला या धारण करने वाला।

बहुल (सं.) [वि.] अनेक; बहुत; प्रचुर। [सं-पु.] 1. काला रंग 2. कृष्ण पक्ष।

बहुलक (सं.) [सं-पु.] (रसायनशास्त्र) अनेक छोटे अणुओं के योग से बनने वाला एक प्रकार का कार्बनिक यौगिक; (पॉलिमर)।

बहुलता (सं.) [सं-स्त्री.] 1. अधिकता; प्रचुरता 2. अनेकता; बहुतायत।

बहुलवादी (सं.) [वि.] 1. अनेक मतों, धर्मों तथा संस्कृतियोंवाला 2. बहुत्ववादी।

बहुला (सं.) [सं-स्त्री.] 1. गौ; गाय 2. नील का पौधा 3. इलायची 4. (पुराण) एक नदी का नाम 5. चंद्रमा की बारहवीं कला 6. एक देवी 7. समुद्री मछली।

बहुलिका (सं.) [सं-स्त्री.] सप्तर्षिमंडल।

बहुवचन (सं.) [सं-पु.] (व्याकरण) संज्ञा, क्रिया आदि का वह रूप जिससे एक से अधिक व्यक्तियों या वस्तुओं का बोध हो।

बहुवचनीय (सं.) [वि.] बहुवचन से संबंधित 2. बहुवचन के रूप में होने वाला।

बहुवर्षीय (सं.) [वि.] 1. अनेक वर्षों तक चलने या होने वाला; बहुवार्षिक 2. एक से अधिक सालों तक का।

बहुविकल्प (सं.) [वि.] जिसके अनेक विकल्प हो; बहुमार्गीय; जो कई तरह से हो सकता हो।

बहुविदित (सं.) [वि.] बहुत से लोगों द्वारा जाना हुआ; जिसकी जानकारी बहुतों को हो।

बहुविध (सं.) [वि.] अनेक प्रकार या भाँति का। [अव्य.] कई प्रकार से; अनेक तरह से।

बहुविवाह (सं.) [सं-पु.] एक पुरुष का कई स्त्रियों से विवाह करना या एक स्त्री का कई पुरुषों से विवाह करने की एक प्राचीन सामाजिक प्रथा, (पोलीगैमी)।

बहुवीर्य (सं.) [वि.] प्रचुर वीर्यवाला। [सं-पु.] 1. विभीतकी या बहेड़ा 2. शाल्मली या सेमल 4. दमनक या मरुवा नामक वनस्पति आदि।

बहुशः (सं.) [अव्य.] 1. कई तरह से 2. बहुत बार।

बहुश्रुत (सं.) [वि.] 1. शास्त्रों की बहुत-सी बातें सुनने वाला 2. जिसने अनेक शास्त्र या विषय पढ़े हों; जो पंडित या विद्वान हो 3. कई विषयों का ज्ञान रखने वाला; बहुज्ञ।

बहुसंख्य (सं.) [वि.] 1. जो बहुत संख्या में हों; अधिसंख्य 2. बहुसंख्यक; जो अधिकता में हो।

बहुसंख्यक (सं.) [वि.] जो संख्या में अधिक हों; जिनकी संख्या दूसरों की तुलना में बहुत अधिक हो।

बहुसंस्करण (सं.) [वि.] 1. जिसका (पत्र-पत्रिका) एकाधिक स्थानों से प्रकाशन हुआ हो 2. जिसके अनेक संस्करण हुए हों।

बहुसांस्कृतिक (सं.) [वि.] कई संस्कृतियों के सहअस्तित्व वाला।

बहुस्तरीय (सं.) [वि.] जिसके बहुत से स्तर हों; अनेक स्तरों वाला।

बहू (सं.) [सं-स्त्री.] 1. नवविवाहिता स्त्री; वधू; दुल्हन 2. पत्नी; बीवी 3. पुत्र की पत्नी; पतोहू; पुत्रवधू 4. छोटे भाई की पत्नी।

बहूँटा (सं.) [सं-पु.] बाँह पर पहना जाने वाला एक आभूषण।

बहूपयोगी (सं.) [वि.] 1. जिसके एक से अधिक उपयोग हों 2. बहुसंख्य के लिए लाभकारी।

बहेंगा (सं.) [सं-पु.] 1. एक प्रकार का पक्षी 2. चौपायों का एक रोग।

बहेड़ा (सं.) [सं-पु.] 1. औषधीय गुणों वाला एक जंगली वृक्ष 2. उक्त वृक्ष का फल; विभीतक।

बहेलिया (सं.) [सं-पु.] पक्षियों का शिकार करने वाला व्यक्ति; चिड़िया फँसाने का काम करने वाला व्यक्ति; चिड़ीमार।

बा1 (फ़ा.) [अव्य.] संज्ञा शब्दों के साथ मिलकर साथ, सहित, सामने, समक्ष का अर्थ देता है, जैसे- बाअदब; बाइज़्ज़त; बाख़ुशी।

बा2 (गु.) [सं-स्त्री.] माता; माँ।

बाँक (सं.) [सं-स्त्री.] 1. वक्रता; टेढ़ापन 2. घुमाव; मोड़ 3. लुहारों का वस्तुओं को कसने का लोहे का शिकंजा 4. बाँह में पहनने का एक गहना 5. धनुष; कमान 6. छुरी; चाकू; कृपाण 7. किसी नदी का घुमाव।

बाँकपन [सं-पु.] 1. वक्रता; टेढ़ापन; तिरछापन 2. किसी रचना का अद्भुत सौंदर्य 3. छवि; रूप; बनावट 4. शौकीनी 5. अदा; शोख़ी।

बाँका (सं.) [सं-पु.] 1. लोहे का बना हुआ एक प्रकार का हथियार जो टेढ़ा होता है 2. सदा बना-ठना रहने वाला बदमाश या गुंडा 3. धान की फ़सल को नुकसान पहुँचाने वाला एक प्रकार का कीड़ा। [वि.] 1. टेढ़ा; वक्र; घुमावदार; तिरछा 2. आकर्षक एवं सुंदर 3. छैला 4. बहादुर और हिम्मतवर 5. वीर और साहसी 6. विकट।

बाँकी [सं-स्त्री.] बाँस से काटकर तीलियाँ आदि बनाने का एक यंत्र।

बाँकुरा [वि.] 1. बाँका; टेढ़ा 2. नायक; योद्धा; वीर 3. साहसी; महारथी।

बाँग (फ़ा.) [सं-स्त्री.] 1. मुरगे की बोली या आवाज़ 2. {ला-अ.} किसी की आवाज़।

बाँगर [सं-पु.] 1. ऊँची भूमि 2. वह ज़मीन जो बाढ़ में न डूबे 3. चरागाह, चरी 4. एक तरह का बैल।

बाँगुर (सं.) [सं-पु.] 1. चिड़ियाँ फँसाने का एक जाल; फंदा 2. फँसने या फँसाने की कोई जगह।

बाँग्ला (सं.) [सं-स्त्री.] बंग देश या बंगाल (पश्चिम बंगाल और बाँग्ला देश) की भाषा; बंगाली। [वि.] 1. बंगाल का 2. बंग देश से संबंध रखने वाला, जैसे- बाँग्ला संस्कृति।

बाँचना [क्रि-स.] 1. पढ़ना 2. पत्र, लेख, पुस्तक आदि को पढ़ कर सुनाना।

बाँझ (सं.) [वि.] (वह स्त्री, पशु या पौधा) जिससे संतान, बच्चा या फल उत्पन्न न हो। [सं-स्त्री.] 1. वह स्त्री जो बच्चे पैदा करने में सक्षम न हो 2. ऐसी वनस्पति या वृक्ष जिसके किसी दोष के कारण उसमें फल या फूल न लगें।

बाँझपन [सं-पु.] 1. संतान न होने की अवस्था या स्थिति 2. बाँझ होना; बंध्यत्व।

बाँझिन [सं-स्त्री.] बाँझ स्त्री।

बाँट [सं-स्त्री.] 1. बाँटने की क्रिया या भाव 2. बँटवारा 3. अलग-अलग भाग या हिस्सा 4. चौपायों के लिए बनाया गया विशेष प्रकार का भोजन 5. एक प्रकार की घास 6. घास या पयाल की बनी हुई मोटी रस्सी।

बाँटना (सं.) [क्रि-स.] 1. किसी वस्तु के कई भाग करके अलग-अलग रखना या जमाना 2. संपत्ति आदि के हिस्से करके उसके हिस्सेदारों को देना 3. सब को थोड़ा-थोड़ा देना; वितरण करना (मिठाई आदि) 4. ताश आदि के पत्तों का खिलाड़ियों के बीच वितरण करना।

बाँदा (सं.) [सं-पु.] वह वनस्पति जो भूमि पर नहीं उगती वरन दूसरे पेड़ों पर फैलकर उनकी शाखाओं से पोषण लेती है; एक परजीवी वनस्पति।

बाँध [सं-पु.] 1. नदी का पानी रोकने के लिए बनाया गया घेरा; पुश्ता या बंद; (डैम) 2. बाँधने की क्रिया या भाव 3. वह बंधन जो किसी बात को आगे बढ़ने से रोकने के लिए लगाया जाता हो; (बार) 4. {ला-अ.} शोभा; दिखावे आदि के लिए किसी वस्तु के ऊपर बाँधी गई दूसरी वस्तु। [मु.] -बाँधना : आडंबर करना।

बाँधना (सं.) [क्रि-स.] 1. हिलने-डुलने, बिखरने आदि से रोकने के लिए किसी वस्तु के चारों ओर रस्सी, ज़ंजीर आदि लपेटना; गाँठ लगाना 2. नियम, बंधन आदि कारणों से कोई काम होने से रोकना 3. गठरी, बिस्तर आदि को लपेटना; कसना; समेटना 4. पकड़कर बंद या कैद करना; बँधुआ बनाना 5. गतिहीन करना 6. शक्ति, प्रभाव नष्ट कर देना 7. बेसन आदि को हाथ से दबाकर लड्डू बनाने की क्रिया 8. {ला-अ.} प्रेमपाश में बद्ध करना 9. {व्यं-अ.} भाव या विचार को गद्य या पद्य रचना का रूप देना।

बाँधव (सं.) [सं-पु.] 1. स्वजन; निकट संबंधी 2. भाई-बंधु 3. नाते-रिश्ते के लोग 4. घनिष्ठ मित्र।

बाँबी (सं.) [सं-स्त्री.] 1. साँप का बिल 2. दीमक का लगाया हुआ मिट्टी का ढेर; वल्मीक; विमौट।

बाँस (सं.) [सं-पु.] 1. घास की एक प्रकार की गिरहदार, लंबी, सीधी वृक्ष जैसी प्रजाति जो वनों और पहाड़ी भूमि में अधिक होती है और जो कागज़ बनाने, छप्पर छाने तथा टोकरियाँ आदि बनाने के काम आती है; वंश 2. भूमि या दूरी की एक पुरानी माप जो लगभग तीन मीटर के बराबर होती है 3. नाव की लग्गी। [मु.] -पर चढ़ना : बदनाम होना। -उछालना : बेहद ख़ुश होना; बहुत उछल कूद करना।

बाँसपूर [सं-पु.] पुराने समय की उत्तम गुणवत्ता वाली वह मलमल जिसका थान बाँस के पोर में समा जाता था; झीने सूती वस्त्र का थान।

बाँसा [सं-पु.] 1. नथुनों के ऊपर नाक के मध्य की उभरी हुई हड्डी 2. रीढ़ की हड्डी 3. एक प्रकार की घास।

बाँसुरी (सं.) [सं-स्त्री.] मुख से फूँककर बजाया जाने वाला एक वाद्य जिसे बाँस से बनाया जाता है; कच्चे या पक्के बाँस से बना एक वाद्य; मुरली; वेणु; वंशी।

बाँह (सं.) [सं-स्त्री.] 1. हाथ; बाज़ू 2. कमीज़ आदि का वह भाग जिससे भुजा ढकी रहती है 3. {ला-अ.} बाहुबल; शक्ति। [मु.] -पकड़ना : किसी को अपनाना, विवाह करना; किसी की सहायता करने का भार लेना।

बाँहदार (हिं.+फ़ा.) [वि.] 1. जिसमें बाँहे हों, जैसे- कमीज़, कुरता 2. जिसमें बाँह टिकाने के हत्थे लगे हों, जैसे- सोफ़ा, कुरसी आदि।

बाअदब (फ़ा.+अ.) [क्रि.वि.] सम्मान के साथ। [वि.] विनीत; तमीज़दार; शिष्ट; सभ्य।

बा-असर (फ़ा.) [वि.] 1. जिसका प्रभाव हो; असरदार 2. प्रभावशाली।

बाइक (इं.) [सं-स्त्री.] एक प्रकार का दुपहिया वाहन; मोटरसाइकिल।

बाइज़्ज़त (फ़ा.) [क्रि.वि.] इज़्ज़त के साथ; सम्मान के साथ। [वि.] आबरूदार; प्रतिष्ठित।

बाइट (इं.) [सं-स्त्री.] 1. (पत्रकारिता) समाचार के संदर्भ में किसी व्यक्ति का वक्तव्य 2. कौर; ग्रास 3. टुकड़ा 4. (कंप्यूटर और टेलीकम्यूनिकेशन) डिज़िटल सूचना की इकाई (एक बाइट आठ बिट के बराबर होती है)।

बाइबिल (इं.) [सं-स्त्री.] ईसाइयों का प्रमुख धार्मिक ग्रंथ।

बाइमेट्रिक सिस्टम (इं.) [सं-पु.] शरीर के अंगों जैसे उँगलियों के निशान तथा आँखों की पुतलियों से व्यक्ति की पहचान करने की प्रणाली।

बाइस (अ.) [अव्य.] कारण; हेतु; सबब।

बाइसिकल (इं.) [सं-स्त्री.] पैरों से चलाई जाने वाली दो पहियों की साइकिल।

बाई1 (सं.) [सं-स्त्री.] 1. शरीर के त्रिदोषों में से वात का दोष 2. शारीरिक वायु या वात की अधिकता से होने वाला रोग जिसमें किसी निश्चित स्थल पर तीव्र चुभन होती है 3. वात व्याधि; गठिया। [मु.] -चढ़ना : वायु का प्रकोप होना; पागल होना। -पचना : घमंड टूटना।

बाई2 [सं-स्त्री.] 1. राजस्थान, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र आदि राज्यों में स्त्रियों के लिए प्रयुक्त होने वाला एक आदरसूचक संबोधन 2. कहीं-कहीं माता, ननद आदि के लिए संबोधन का शब्द 3. वेतन लेकर घरेलू काम करने वाली स्त्री; महरी 4. उत्तरभारत में नाचने-गाने वाली स्त्रियों या वेश्याओं के लिए प्रयुक्त शब्द; तवायफ़।

बाईपास सर्जरी (इं.) [सं-स्त्री.] एक शल्यक्रिया जिसमें हृदय को रक्त पहुँचाने वाली धमनी के कोलेस्ट्रोल आदि से बाधित होने पर शरीर के अन्य हिस्से विशेषकर जाँघ से कोई बड़ी धमनी लेकर रक्त प्रवाह का मार्ग बदल दिया जाता है।

बाईलाइन (इं.) [सं-पु.] (पत्रकारिता) समाचार के ऊपर दिया जाने वाला संवाददाता का नाम अथवा विशेष संकेत।

बाईस [वि.] संख्या '22' का सूचक।

बाउंस (इं.) [सं-स्त्री.] उछाल; छलाँग। [क्रि-अ.] 1. किसी वस्तु का गिरकर उछलना; टकराकर वापस आना 2. किसी को जारी किए बैंक के चैक का पर्याप्त रकम के अभाव में वापस लौट आना।

बाउली (फ़ा.) [सं-स्त्री.] बावली; दीवानी।

बाकल [सं-पु.] वल्कल; वृक्ष की छाल।

बाकला [सं-पु.] एक छोटा फ़सली पौधा जिसकी फलियाँ सब्ज़ी के रूप में खाई जाती हैं।

बाका (सं.) [सं-स्त्री.] बोलने की शक्ति; वाचा; वाणी; वाक।

बाकायदा (फ़ा.) [क्रि.वि.] 1. विधिपूर्वक; कायदे से; नियम से 2. भलीभाँति 3. 'बेकायदा' का विलोम।

बाकी (अ.) [वि.] 1. शेष; अवशिष्ट; बचा हुआ 2. मौजूद; विद्यमान 3. बरकरार; सदा बना रहने वाला 4. जो (रकम) अदा होने को हो; देय; पावना (रकम)।

बाकीदार (अ.+फ़ा.) [वि.] जिसके पास कोई लगान या देनदारी बाकी हो; बाकी रखने वाला।

बाग़ (फ़ा.) [सं-पु.] उर्दू उच्चारणानुसार वर्तनी, (दे. बाग2)।

बाग1 [सं-स्त्री.] 1. शक्ति; सामर्थ्य 2. घोड़े की लगाम; वल्गा। [मु.] -बाग होना : बहुत ख़ुश होना। [मु.] -मोड़ना : किसी ओर घुमाना या लगाना।

बाग2 (फ़ा.) [सं-पु.] 1. उद्यान; उपवन; बगीचा; (गार्डन) 2. खेती के उद्देश्य से लगाए हुए वृक्षों का झुंड; बाड़ी।

बागड़ [सं-पु.] 1. उजाड़ क्षेत्र; बिना बस्ती का देश 2. मरुभूमि; रेगिस्तान 3. नदी के किनारे की ऊँची ज़मीन जहाँ नदी में आई बाढ़ का पानी कभी न पहुँच पाता हो।

बागडोर [सं-स्त्री.] 1. लगाम 2. घोड़े की लगाम में बाँधी जाने वाली रस्सी 3. प्रशासन; सत्ताधिकार 4. किसी कार्य या बात का नियंत्रण; दायित्व 5. {ला-अ.} वह चीज़ जिससे किसी पर नियंत्रण किया जाता है।

बागवान (फ़ा.) [सं-पु.] बाग या बगीचे में पेड़-पौधे उगाने और उनकी देखभाल करने वाला व्यक्ति; बाग का माली।

बागवानी (फ़ा.) [सं-स्त्री.] 1. बगीचे में पेड़-पौधे लगाने तथा उनकी देखभाल करने का काम 2. बागवान या माली का काम।

बागान (बां.) [सं-पु.] कोई फ़सल तैयार करने का बड़ा खेत या मैदान, जैसे- चाय बागान।

बागी (अ.) [वि.] 1. बगावत करने वाला 2. विद्रोही; न दबने वाला 3. अवज्ञाकारी; उपेक्षाकारी।

बागीचा (फ़ा.) [सं-पु.] छोटा बाग।

बाघ (सं.) [सं-पु.] शेर या सिंह की जाति का एक हिंसक पशु; व्याघ्र।

बाघा [सं-पु.] 1. पशुओं की एक बीमारी जिसमें उनका पेट फूल जाता है 2. एक तरह का कबूतर।

बाछा [सं-पु.] 1. गाय का नर बच्चा; बछड़ा 2. {ला-अ.} वत्स; बच्चा।

बाज़ (फ़ा.) [सं-पु.] 1. एक प्रसिद्ध शिकारी पक्षी; श्येन पक्षी। [परप्रत्य.] व्यसनी, शौकीन या कर्ता आदि का अर्थ देने वाला प्रत्यय, जैसे- बहानेबाज़; नशेबाज़। [अव्य.] दुबारा; फिर; पुनः। [मु.] -आना : जानबूझकर वंचित रहना, दूर रहना। -रखना : मना करना, रोकना।

बाज1 [सं-पु.] किसी वाद्ययंत्र को बजाने की विशिष्ट शैली।

बाज2 (अ.) [वि.] कतिपय; कोई-कोई; चंद कुछ; विशिष्ट।

बाज़-दावा (फ़ा.) [सं-पु.] 1. दावा वापस लेना 2. वह पत्र या लेख जिसमें अपना दावा वापस लेने का विवरण होता है 3. स्वत्व का त्याग।

बाजरा (सं.) [सं-पु.] 1. एक प्रकार का अनाज 2. उक्त अनाज का पौधा।

बाजा (सं.) [सं-पु.] (संगीत) वह उपकरण जो फूँकने अथवा आघात किए जाने पर ध्वनि उत्पन्न करता है; बजाने का यंत्र; वाद्य।

बाजा-गाजा [सं-पु.] 1. एक साथ बजाए जाने वाले अनेक प्रकार के बाजे 2. बाजे से होने वाली धूमधाम या होहल्ला, जैसे- बाजे-गाजे से शोभायात्रा निकली।

बाज़ाब्ता (फ़ा.+अ.) [क्रि.वि.] 1. नियम या विधान के अनुसार; ज़ाब्ते के साथ। [वि.] नियमानुकूल।

बाज़ार (फ़ा.) [सं-पु.] 1. वह स्थान जहाँ तरह-तरह की वस्तुओं की दुकानें हों; वस्तुओं के क्रय-विक्रय का निश्चित स्थान; हाट; मंडी; (मार्केट) 2. क्रय-विक्रय के लिए एकत्रित हुए लोग। [मु.] -करना : ख़रीददारी करना। -तेज़ होना : सभी वस्तुओं का मूल्य बढ़ना।

बाज़ारवाद (फ़ा.+सं.) [सं-पु.] वह मत या विचारधारा जिसमें जीवन से संबंधित हर वस्तु का मूल्यांकन केवल व्यक्तिगत लाभ या मुनाफ़े की दृष्टि से ही किया किया जाता है; मुनाफ़ा केंद्रित तंत्र को स्थापित करने वाली विचारधारा; हर वस्तु या विचार को उत्पाद समझकर बिकाऊ बना देने की विचारधारा।

बाज़ारी (फ़ा.) [वि.] 1. बाज़ार का; बाज़ार से संबंधित; बाज़ार में होने वाला 2. बाज़ारू; साधारण; मामूली।

बाज़ारीकरण (फ़ा.+सं.) [सं-पु.] 1. बाज़ार को बढ़ावा देने का कार्य; बाज़ारवाद की दृष्टि के अनुरूप ही व्यवस्था का संयोजन और संचालन 2. व्यक्ति को उपभोक्ता मात्र के रूप में अनुकूलित करने की क्रिया 3. पूँजीकरण; वस्तुकरण।

बाज़ारू (फ़ा.) [वि.] 1. बाज़ार का; बाज़ार संबंधी; बाज़ारी 2. साधारण; मामूली; घटिया 3. बाज़ार में रहने या बैठने वाला 4. अशिष्ट (शब्द)।

बाज़ी (फ़ा.) [सं-स्त्री.] 1. करतब; तमाशा 2. शतरंज या ताश आदि का एक पूरा खेल 3. किसी खेल का दाँव; बारी 4. शर्त। [मु.] -मारना : जीतना; विजयी होना। -ले जाना : प्रतियोगिता में आगे बढ़ जाना या सफल होना। -हारना : शर्त हार जाना।

बाजी1 (सं.) [सं-पु.] घोड़ा; अश्व; वाजि।

बाजी2 (तु.) [सं-स्त्री.] बड़ी बहन; आपा।

बाज़ीगर (फ़ा.) [सं-पु.] 1. जादू दिखाने वाला व्यक्ति 2. ऐंद्रजालिक; जादूगर।

बाज़ीगरी (फ़ा.) [सं-स्त्री.] 1. जादू दिखाने की क्रिया; कलात्मक करतब 2. खेल-तमाशे करना 3. माया-कर्म।

बाज़ू (फ़ा.) [सं-पु.] 1. भुजा; बाँह 2. किसी चीज़ का कोई अंग, पक्ष या पार्श्व 3. बाज़ूबंद नामक आभूषण 4. दरवाज़े की चौखट की लकड़ी 5. {ला-अ.} सहायक। [अव्य.] ओर; तरफ़।

बाज़ूबंद (फ़ा.) [सं-पु.] बाँह पर पहनने का एक प्रकार का आभूषण; भुजबंद; केयूर।

बाट (सं.) [सं-पु.] 1. रास्ता; मार्ग 2. तराज़ू पर चीज़ें तौलने का बटखरा; बट्टा। [मु.] -जोहना : प्रतीक्षा करना। -पड़ना : पीछे पड़ना। -कहीं बाट पड़ना : डाका पड़ना।

बाटी (सं.) [सं-स्त्री.] 1. कंडे या उपलों आदि पर सेका गया आटे का गोला जो दाल के साथ खाया जाता है; लिट्टी; टिक्कड़; अंगाकड़ी 2. पिंड; गोली 3. चौड़े मुँह वाली कटोरी।

बाड़ [सं-स्त्री.] 1. फ़सल की सुरक्षा के लिए बनाया गया काँटे-बाँस आदि का घेरा 2. झाड़बंदी; टट्टी; टट्टर; घेरा 3. दो नदियों के संगम के बीच की ज़मीन।

बाड़ा (सं.) [सं-पु.] 1. पशुशाला 2. घेरा 3. चारों-ओर से घिरा हुआ बड़ा मैदान।

बाढ़ [सं-स्त्री.] 1. बढ़ाव; वृद्धि; विकास 2. नदी आदि के जल का बढ़ना; सैलाब 3. अधिक वर्षा होने से धरती का जलमग्न होना 4. किसी प्रकार का ज़ोर, तेज़ी या प्रबलता 5. लाभ; नफ़ा 6. किनारे की ऊँचाई; किनारा; आगे बढ़ने की स्थिति या भाव; वृद्धि। [मु.] -दगना : गोलियों का लगातार छूटना। -रूँधना : आने-जाने का रास्ता बंद करना।

बाण (सं.) [सं-पु.] 1. तीर; शायक; शर 2. बाण का फल; गाँसी।

बाणाग्र (सं.) [सं-पु.] 1. तीर के ऊपरी हिस्से में लगा पत्थर; हड्डी या धातु से बनी नुकीली चीज़; बाण की नोंक 2. तलवार आदि की धार, कोर, सान।

बाणावली (सं.) [सं-स्त्री.] 1. बाणों की पंक्ति या समूह 2. दुश्मनों पर होने वाली तीरों की बौछार।

बाणाश्रय (सं.) [सं-पु.] तरकश; तूणीर।

बाणासुर (सं.) [सं-पु.] (पुराण) राजा बलि के सौ पुत्रों में से सबसे बड़ा।

बात (सं.) [सं-स्त्री.] 1. कथन; कहा हुआ सार्थक वाक्य 2. घटित होने वाली या प्रस्तुत अवस्था; परिस्थिति। [मु.] -उठाना : बातचीत शुरू करना।-उलटना : बात पलटना। -काटना : किसी की बात का विरोध करना, किसी के बोलते समय पूरी बात सुने बिना बीच में ही बोल उठना।-टालना : ध्यान न देना। -बढ़ना : झगड़े का रूप ले लेना। -बनना : प्रयोजन सिद्ध होना। -बिगड़ जाना : काम ख़राब हो जाना। -रखना : अपनी बात पर अडिग रहना। -खोना : प्रतिष्ठा गँवाना।

बातचीत [सं-स्त्री.] 1. दो या दो से अधिक व्यक्तियों के बीच होने वाली बातें; वार्तालाप 2. किसी उद्देश्य विशेष के लिए होने वाली लिखा-पढ़ी या संवाद।

बातफ़रोश (हिं.+फ़ा.) [सं-पु.] जो अपनी वाकपटुता के माध्यम से रोज़ी कमाता हो।

बातिनी (अ.) [वि.] 1. भीतरी; आंतरिक 2. अंतर्मन का।

बातिल (अ.) [वि.] 1. झूठ; गलत; मिथ्या 2. खंडित 3. रद्द किया हुआ।

बातूनी [वि.] 1. जो बहुत बोलता हो; बक्की 2. व्यर्थ की बातें करने वाला; बकवादी; वाचाल।

बाथरूम (इं.) [सं-पु.] स्नानघर; गुसलख़ाना।

बाद (अ.) [वि.] 1. पश्चात 2. अलग हटाया या छोड़ा हुआ 3. अतिरिक्त।

बादबान (फ़ा.) [सं-पु.] नाव, जहाज़ आदि का पाल।

बादर (सं.) [सं-पु.] 1. कपास का पौधा 2. कपास का सूत 3. सूती कपड़ा। [वि.] 1. कपास से बनने वाला 2. बेर से संबंधित 3. मोटा; भारी।

बादल (सं.) [सं-पु.] 1. वायुमंडल में संचित घनीभूत वाष्पकण; मेघ 2. एक तरह का दूधिया रंग का पत्थर।

बादला [सं-पु.] 1. कसीदाकारी का तार; ज़री 2. गोटा या कलाबत्तू बटने का सुनहरा और चपटा तार; चमकीला तार 3. सोने-चाँदी का तार।

बादशाह (फ़ा.) [सं-पु.] 1. वह जो किसी बड़े साम्राज्य का शासक या स्वामी हो; सम्राट 2. शतरंज का एक मोहरा जो सब मोहरों में प्रधान होता है 3. ताश का एक पत्ता जिसमें बादशाह की तस्वीर बनी रहती है 4. {ला-अ.} वह जो किसी कला, कार्य-क्षेत्र या वर्ग में सबसे बढ़-चढ़कर हो।

बादशाहत (फ़ा.) [सं-स्त्री.] 1. बादशाह का पद; राजत्व 2. शासन 3. राज्य।

बादाम (फ़ा.) [सं-पु.] 1. एक वृक्ष जिसके फल के बीज मेवों में गिने जाते हैं 2. आम नामक फल की एक प्रजाति।

बादामी (फ़ा.) [सं-पु.] 1. बादाम के छिलके जैसा रंग 2. आभूषण आदि रखने की एक डिबिया 3. एक प्रकार का धान 4. बादाम के रंग का घोड़ा 5. एक तरह की चिड़िया; किलकिला। [वि.] 1. बादाम के छिलके के रंग का 2. बादाम संबंधी; बादाम का 3. बादाम के आकार का; गोलाकार; लंबोतरा।

बादी [सं-स्त्री.] शरीर में वायु का प्रकोप। [वि.] 1. वायुविकार से संबंधित; वायु का 2. शरीर में वायुविकार उत्पन्न करने वाला 3. जो वातविकार बढ़ाए।

बाध (सं.) [सं-पु.] 1. बाधा; अड़चन 2. प्रतिरोध; रोक 3. प्रतिबंध 4. कष्ट; पीड़ा 5. कठिनता; दिक्कत 6. उन्नति या प्रगति की राह में आने वाली रुकावट जिसे पार करने के लिए विशिष्ट योग्यता की ज़रूरत पड़ती हो।

बाधन (सं.) [सं-पु.] 1. बाधा डालने की क्रिया या भाव 2. विरोध करना 3. कष्ट या पीड़ा देना 4. प्रतिवाद 5. अनुचित या बुरे काम के संबंध में होने वाली मनाही या निषेध।

बाधा (सं.) [सं-स्त्री.] 1. अड़चन; विघ्न; रुकावट 2. रोक; प्रतिबंध 3. कष्ट; पीड़ा; संकट।

बाधाहीन (सं.) [वि.] जिसमें अड़चन या बाधा न हो; बाधारहित।

बाधित (सं.) [वि.] 1. जिसमें रुकावट पड़ी हो; जिसमें व्यवधान आया हो 2. ग्रस्त 3. आभारी।

बाध्य (सं.) [वि.] 1. विवश; मज़बूर किया हुआ 2. जो विधि, नियम या आज्ञा आदि के द्वारा बँधा हो 3. बाधित; रोका हुआ।

बाध्यक (सं.) [वि.] 1. बाधा के रूप में होने वाला 2. जिसको पूरा करना ज़रूरी हो।

बाध्यता (सं.) [सं-स्त्री.] 1. वह दबाव या दायित्व जिससे न चाहते हुए भी किसी काम को करना पड़ता है; विवशता; दबाव; मज़बूरी 2. अनिवार्यता।

बान (सं.) [सं-पु.] 1. एक तरह की आतिशबाज़ी 2. रुई धुनने का डंडा 3. मूँज की रस्सी।

बानक [सं-पु.] 1. वेष; भेष; बाना 2. सुंदर बनावट; सजावट; सज-धज 3. किसी घटना के लिए उपयुक्त परिस्थिति; संयोग।

बानगी (सं.) [सं-स्त्री.] थोड़ी-सी चीज़ जो ग्राहक को देखने के लिए दी जाए; नमूना।

बानवे [वि.] संख्या '92' का सूचक।

बाना1 [सं-पु.] 1. वेश; विशेषतः वह पहनावा जो वीर लोग पहनकर रणक्षेत्र में जाते हैं 2. पहनावा; पोशाक 3. व्यापार में कुछ विशिष्ट प्रकार की वस्तुओं का समूह 4. रीति; चाल।

बाना2 (सं.) [सं-पु.] 1. भाले की तरह का एक हथियार जिसका ऊपरी हिस्सा दुधारी तलवार की तरह होता है 2. कपड़े की बुनावट में ताना में भरा जाने वाला आड़ा सूत 3. पीले या सफ़ेद रंग का एक प्रकार का रेशम 4. वह रेशमी धागा जिससे कपड़े सिले जाते हैं। [क्रि-स.] प्रसारित करना; फैलाना, जैसे- मुँह बाना।

बानी (सं.) [सं-स्त्री.] 1. बोली; भाषा 2. मुँह से निकलने वाला सार्थक शब्द; बात; वचन 3. बाना नामक हथियार।

बानैत (सं.) [सं-पु.] 1. बाण चलाने वाला 2. धनुषधारी योद्धा 3. वह जो बाना या वेष धारण किए हुए हो।

बानो (फ़ा.) [सं-स्त्री.] मुसलमानों में किसी स्त्री के नाम के साथ लगाया जाने वाला आदरसूचक शब्द, जैसे- ज़ाहिदा बानो, फ़रीदा बानो आदि।

बाप [सं-पु.] पिता; जनक।

बाप-दादा [सं-पु.] पूर्वज; पुरखे; पूर्वपुरुष।

बापिका [सं-स्त्री.] 1. चौड़े मुँह का एक प्रकार का कुआँ या जलाशय जिसमें पानी तक पहुँचने के लिए सीढ़ियाँ बनी हों; वापी; बावड़ी 2. ऐसा छोटा तालाब जिसके किनारे चारों ओर सीढ़ियाँ बनी हों; वापिका 3. हजामत का एक प्रकार जिसमें माथे से लेकर चोटी के पास तक के बाल चार-पाँच अंगुल की चौड़ाई में मूँड़ दिए जाते हैं।

बापू [सं-पु.] 1. पिता या अन्य आदरणीय जन के लिए एक संबोधन 2. महात्मा गांधी के लिए प्रयुक्त एक आदरसूचक संबोधन।

बाफ़ (फ़ा.) [परप्रत्य.] एक प्रत्यय जो संज्ञा पद से जुड़कर 'बनने वाला' का अर्थ प्रदान करता है, जैसे- शालबाफ़ अर्थात शाल बुनने वाला।

बाफ़ता (फ़ा.) [सं-पु.] 1. एक तरह का बेलबूटेदार रेशमी कपड़ा 2. कबूतरों का एक रंग। [वि.] बुना हुआ।

बाब (सं.) [सं-पु.] 1. किताब का अध्याय, विभाग या परिच्छेद 2. द्वार; दरवाज़ा 3. दरबार।

बाबत (फ़ा.) [सं-स्त्री.] किसी के संबंध में; विषय में।

बाबर (फ़ा.) [सं-पु.] भारत में मुगल साम्राज्य की स्थापना करने वाला एक शासक, जो मूलतः मध्य एशिया का निवासी था।

बाबरी [सं-स्त्री.] ज़ुल्फ़; लट; घुँघराले केश; काकुल।

बाबा (अ.) [सं-पु.] 1. पितामह; दादा 2. साधु-सन्यासियों तथा बुज़ुर्गों के लिए प्रयुक्त सम्मान सूचक शब्द 3. बच्चे के लिए प्यार का संबोधन 4. पके केशों वाला व्यक्ति 5. एक संबोधन।

बाबिल [सं-पु.] एशिया उपमहाद्वीप का एक प्राचीन ऐतिहासिक नगर; (बैबिलोन)।

बाबुल [सं-पु.] 1. लड़की का पिता 2. पिता को लक्ष्य कर गाए जाने वाले लड़की की विदाई के गीत।

बाबू [सं-पु.] 1. मुंशी; क्लर्क 2. पिता के लिए एक संबोधन 3. प्रतिष्ठित जनों के नाम के साथ आदरार्थ जुड़ने वाला शब्द।

बाबूराज [सं-पु.] वह व्यवस्था जिसमें वास्तविक अधिकार कार्यालय के बाबुओं के हाथ में होता है; बाबुओं या क्लर्कों का राज; नौकरशाही।

बाम्हन [सं-पु.] एक वर्ण; एक जाति; ब्राह्मण।

बाय (इं.) [सं-पु.] विदा लेते समय कहा जाने वाला शब्द; अलविदा।

बायन (सं.) [सं-पु.] 1. परिचितों, रिश्तेदारों के यहाँ भेजी जाने वाली मिठाई आदि, बैना; बायना 2. पेशगी; बयाना 3. भेंट; उपहार 4. निमंत्रण। [मु.] -देना : उकसाना, छेड़-छाड़ करना।

बायरा [सं-पु.] कुश्ती का एक पेंच या दाँव।

बायस्कोप (इं.) [सं-पु.] 1. परदे पर चलते-फिरते चित्र दिखाने वाला एक यंत्र 2. पुराने समय में वह बड़ा डिब्बा जिसमें चलते हुए चित्रों और संगीत के माध्यम से मनोरंजन किया जाता था 3. किसी समय सिनेमा के लिए प्रयुक्त शब्द।

बायोडाटा (इं.) [सं-पु.] व्यक्तिगत जीवन, शैक्षिक योग्यताओं तथा कार्यानुभव आदि का ब्योरा; अपने जीवन, कार्यकलापों और उपलब्धियों का विवरण; आत्मवृत्त।

बायोडीज़ल (इं.) [सं-पु.] जैविक स्रोतों से प्राप्त तथा डीज़ल के समतुल्य ईंधन; वनस्पतियों के बीजों से निकलने वाले एथेनाल और डीजल का मिश्रण जो ईंधन के रूप में प्रयुक्त होता है।

बायोनेट (इं.) [सं-पु.] रायफल में जड़ी रहने वाली एक प्रकार की बरछी; संगीन।

बायोलॉजी (इं.) [सं-स्त्री.] जैविकी; सृष्टि के समस्त जीव-जंतुओं और वनस्पतियों के उद्भव और विकास का अध्ययन-विश्लेषण करने वाला विज्ञान; जीवविज्ञान; जैविकी।

बार1 (सं.) [सं-पु.] द्वार; दरवाज़ा। [सं-स्त्री.] 1. समय; वक्त; काल 2. विलंब; देर।

बार2 (फ़ा.) [सं-पु.] 1. भार; बोझ 2. गाड़ी आदि पर लादा जाने वाला माल। [सं-स्त्री.] दफ़ा; मरतबा, जैसे- पहली बार।

बार3 (इं.) [सं-पु.] 1. मदिरालय; मधुशाला 2. किसी समय अदालत में लगने वाला अवरोधक जिसके आधार पर वकालत के पेशे को बार से जुड़ा पेशा कहा जाता है।

बारंबार (सं.) [क्रि.वि.] 1. बार-बार; कई बार 2. फिर-फिर।

बारंबारता (सं.) [सं-स्त्री.] बार-बार होने की क्रिया अवस्था या भाव; आवृत्ति।

बारगाह (फ़ा.) [सं-स्त्री.] 1. राजाओं या नवाबों आदि का दरबार; राजसभा 2. कचहरी; न्यायालय 3. ड्योढ़ी 4. डेरा; तंबू 5. महल।

बारगेनिंग (इं.) [सं-स्त्री.] दुकान आदि पर ख़रीददारी के समय दुकानदार से मोलभाव करने की प्रक्रिया मोलभाव; सौदेबाज़ी।

बारजा [सं-पु.] 1. छत के ऊपर का कमरा; कोठा; अटारी 2. खुला छतदार बरामदा 3. मकान के सामने के दरवाज़े के ऊपर बनाया हुआ छज्जा 4. कमरे के आगे का दालान।

बारदाना (फ़ा.) [सं-पु.] 1. वह जिसमें कुछ रखा जाए; बड़ा थैला; बोरा 2. वह टाट जिसमें माल को बाँधकर भेजा जाता है 3. फ़ौज के खाने-पीने की सामग्री 4. विभिन्न प्रकार के अनाज; रसद।

बारबरदार (फ़ा.) [सं-पु.] 1. भार उठाने वाला; बोझा ढोने वाला; कुली 2. पालकी ढोने वाला।

बारह [वि.] संख्या '12' का सूचक।

बारहखड़ी (सं.) [सं-स्त्री.] 1. देवनागरी वर्णमाला में प्रत्येक व्यंजन के साथ अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ आदि बारह स्वरों को मात्रा के रूप में लगाकर (संयुक्त कर) वाचन या लेखन की क्रिया; व्यंजन के बारह स्वरों से युक्त रूप 2. {ला-अ.} किसी विषय का आरंभिक ज्ञान।

बारहदरी (हिं.+फ़ा.) [सं-स्त्री.] 1. अतिथियों या पथिकों के रहने का स्थान जिसमें बारह द्वार हों 2. वह बैठक जिसमें चारों-तरफ़ दरवाज़े हों।

बारहपंथी [वि.] जिसमें बारह पंथ हो। [सं-पु.] योगी गोरखनाथ द्वारा प्रवर्तित नाथ संप्रदाय जिसकी बारह शाखाएँ कही जाती हैं।

बारहबाट [वि.] 1. विखंडित; खंडित; नष्ट-भ्रष्ट 2. छिन्न-भिन्न; तितर-बितर।

बारहमासा [सं-पु.] विरह प्रधान लोकगीत; वह पद्य या गीत जिसमें बारह महीनों की प्राकृतिक विशेषताओं का वर्णन किसी विरही या विरहिणी के मुँह से कराया गया हो; वर्ष भर के बारह मास में नायक-नायिका की श्रृंगारिक विरह एवं मिलन की क्रियाओं के चित्रण।

बारहमासी [वि.] पूरे वर्ष भर होने वाला; सब ऋतुओं में फलने या फूलने वाला; सदाबहार वृक्ष।

बारहवफ़ात (हिं.+अ.) [सं-स्त्री.] अरबी महीने रवीउल अव्वल की वे बारह तिथियाँ जिनके विषय में मान्यता है कि इनमें मुहम्मद साहब बहुत बीमार रहे थे और अंततः उनकी वफ़ात अर्थात मृत्यु हो गई थी।

बारहसिंगा [सं-पु.] एक प्रकार का बड़ा नर हिरण जिसकी सींगों में अनेक शाखाएँ होती हैं; चिंकारा; साल-साँभर।

बारहा (फ़ा.) [अव्य.] बहुधा; प्रायः; अनेक बार; बार-बार।

बारानी (फ़ा.) [सं-स्त्री.] 1. वह भूमि जिसमें सिर्फ़ वर्षा में सिंचाई हो 2. उक्त प्रकार की सिंचाई से होने वाली फ़सल। [वि.] 1. जो वर्षा पर निर्भर हो; बरसाती 2. अन्य किसी प्रकार सींची न जा सकने वाली।

बारास्ता (फ़ा.) [क्रि.वि.] रास्ते से; (से) होकर या गुज़र कर; (वाया)।

बारिश (फ़ा.) [सं-स्त्री.] 1. वर्षा; बरसात; वृष्टि; बरखा 2. बादलों से निरंतर गिरने वाली जल की बूँदें; पानी की फुहार; बौछार।

बारी (सं.) [सं-स्त्री.] 1. क्रमवार स्थिति; पारी 2. एक वर्ग जो दोने-पत्तल आदि बनाने का काम करता है 3. खेत या बाग की क्यारी 4. बरतन का ऊपरी घेरा।

बारीक (फ़ा.) [वि.] 1. महीन; सूक्ष्म; आयतन में बहुत पतला 2. गंभीर; गूढ़ 3. {ला-अ.} जिससे कला की निपुणता और सूक्ष्मता प्रकट हो।

बारीकी (फ़ा.) [सं-स्त्री.] 1. बारीक या पतले होने की अवस्था या भाव 2. {ला-अ.} भाव, विचार आदि की सूक्ष्मता।

बारूद (फ़ा.) [सं-स्त्री.] 1. एक रासायनिक यौगिक जिसका प्रयोग सुरंग बनाने, पहाड़ियों में मार्ग निर्माण आदि के लिए किया जाता है 2. एक प्रसिद्ध विस्फोटक चूर्ण जो आग लगने से भड़क उठता है और जिससे तोप-बंदूक चलती है।

बारूदी (फ़ा.) [वि.] 1. बारूद का; बारूद संबंधी 2. जिसमें बारूद हो; बारूद से बना हुआ।

बारे (फ़ा.) [क्रि.वि.] 1. आखिरकार 2. अंत में 3. खैर 4. लेकिन।

बार्बर (इं.) [सं-पु.] बाल काटने वाला व्यक्ति; नाई; हज्जाम।

बार्ह (सं.) [वि.] 1. मोर संबंधी 2. मोर के पंख से बना हुआ।

बार्हस्पत्य (सं.) [सं-पु.] 1. एक संवत्सर 2. गुरु बृहस्पति द्वारा प्रवर्तित नास्तिक भूतवादियों अर्थात भौतिकता पर बल देने वालों का एक संप्रदाय। [वि.] 1. बृहस्पति संबंधी 2. भौतिकवादी विचारों वाला।

बाल (सं.) [सं-पु.] 1. केश 2. बालक 3. किसी पशु का बच्चा 4. शरीर का रोआँ; रोम। [सं-स्त्री.] जौ, गेहूँ आदि का वह भाग जिसमें दाने लगे होते हैं। [वि.] जो सयाना न हो; जिसे अभी यथेष्ट ज्ञान और समझ न हो; जिसका जन्म हुए अभी अधिक समय न हुआ हो। [मु.] -की खाल निकालना : व्यर्थ तर्क करना, व्यर्थ का दोष निकालना। -तक बाँका न होना : किसी प्रकार की क्षति या कष्ट न होना। -बाल बचना : किसी संकट से किसी प्रकार निकल जाना।

बालक (सं.) [सं-पु.] 1. लड़का; बच्चा 2. नाबालिग 3. {ला-अ.} अनजान; नासमझ 4. एक जलीय पौधा; मोथा।

बालकनी (इं.) [सं-पु.] 1. बरामदा; बारजा 2. प्रेक्षागृहों या सभागारों में मंच के तल से ऊपर वाले तल पर बैठने की व्यवस्था; दर्शकदीर्घा।

बालकपन [सं-पु.] 1. बचपन; लड़कपन 2. {ला-अ.} बच्चों जैसी नासमझी; बचकानापन।

बालक्रीड़ा (सं.) [सं-स्त्री.] छोटे बच्चों के हँसी-ख़ुशी और मस्ती भरे खेल।

बालचंद्रिका (सं.) [सं-स्त्री.] (संगीत) कर्नाटक संगीत शैली की एक रागिनी।

बालचर (सं.) [सं-पु.] 1. बालकों में चरित्र, लोकसेवा और स्वावलंबन का भाव लाने के लिए स्थापित संघ 2. उक्त संघ का सदस्य; (स्काउट)।

बालटी [सं-स्त्री.] एक प्रकार का पात्र या बरतन जिसमें पानी रखा जाता है; डोल की तरह का पानी रखने का एक पात्र।

बालतोड़ [सं-पु.] बाल के जड़ से उखड़ने या टूट जाने से होने वाला फोड़ा या घाव।

बालना (सं.) [क्रि-स.] जलाना।

बालपन (सं.) [सं-पु.] बचपन; बाल्यकाल।

बाल-बच्चे [सं-पु.] 1. संतान; औलाद 2. गृहस्थी; परिवारजन 3. छोटे लड़के-लड़कियाँ।

बालबुद्धि (सं.) [सं-स्त्री.] 1. बचपना 2. बालोचित बुद्धि 3. नासमझी 4. कमअक्ली। [वि.] बच्चों-सी अक्ल रखने वाला; अल्पबुद्धि।

बालबोध (सं.) [वि.] बच्चों की समझ में आने वाला; सरल; आसान।

बालब्रह्मचारी (सं.) [सं-पु.] 1. वह जिसने बचपन से ही ब्रह्मचर्य का व्रत धारण कर लिया हो; आजन्म ब्रह्मचारी 2. अविवाहित; कुँवारा।

बालभवन (सं.) [सं-पु.] दे. बालवाड़ी।

बालभोग (सं.) [सं-पु.] देवताओं के आगे सुबह रखा जाने वाला नैवेद्य या प्रसाद; कलेवा।

बालम (सं.) [सं-पु.] 1. पति; पिया 2. प्रेमी; प्रियतम।

बालमन (सं.) [सं-पु.] 1. बालक जैसा मन; बालमति; बालबुद्धि 2. बालक जैसी सरलता 3. बच्चों का मनोविज्ञान।

बालमुकुंद (सं.) [सं-पु.] 1. बालक आयु के कृष्ण; बालकृष्ण; कन्हैया 2. कृष्ण के बाल रूप की वह मूर्ति जिसमें उन्हें घुटनों के बल चलता दिखाया जाता है।

बाललीला (सं.) [सं-स्त्री.] बच्चों के खेल और कार्यकलाप; बालक्रीड़ा; बालचरित।

बालवाड़ी [सं-स्त्री.] वह स्थान जहाँ बच्चों के अनुसार खेलने-सीखने की चीज़ें रखी जाती हैं; बच्चों के लिए बना सार्वजनिक स्थल; बालभवन; बच्चों का उपवन; आँगनवाड़ी।

बालविधवा (सं.) [सं-स्त्री.] 1. वह स्त्री जो बाल्यावस्था में ही विधवा हो गई हो 2. पति सहवास से पहले ही विधवा हो जाने वाली स्त्री।

बालविनोद (सं.) [सं-पु.] 1. बच्चों का खेल 2. बच्चों का हँसी-मज़ाक।

बालविवाह (सं.) [सं-पु.] वह विवाह जो बाल्यावस्था में हुआ हो; छोटी उम्र में होने वाला विवाह।

बालसुलभ (सं.) [वि.] बच्चों की तरह; बच्चों का-सा; शिशुवत।

बालसूर्य (सं.) [सं-पु.] सुबह उगता हुआ सूर्य; उदयकाल का सूर्य; बालार्क।

बालहठ (सं.) [सं-पु.] 1. बच्चे का वह हठ जिसमें अक्सर वह अपनी बात मनवा ही लेता है; ठिनक 2. बच्चे की ज़िद।

बाला (सं.) [सं-पु.] 1. कान में पहनने का एक प्रकार का छल्लेनुमा गहना; बड़ी बाली 2. हाथ में पहनने का कड़ा 3. गेहूँ, जौ की फ़सल में लगने वाला एक तरह का कीड़ा। [सं-स्त्री.] 1. बारह-तेरह वर्ष से सोलह-सत्रह वर्ष तक की अवस्था की लड़की; बालिका; किशोरी।

बालाग्र (सं.) [सं-पु.] 1. बाल का अगला भाग; सिरा 2. {अ-अ.} एक प्राचीन माप या परिमाण। [वि.] बाल की नोक जैसा।

बालावस्था (सं.) [सं-स्त्री.] दे. बाल्यावस्था।

बालिका (सं.) [सं-स्त्री.] 1. छोटी लड़की; कन्या 2. बेटी।

बालिग (अ.) [वि.] 1. वयस्क; वयः प्राप्त 2. सयाना।

बालिश1 (सं.) [सं-पु.] 1. बच्चों के समान व्यवहार या आचरण करने वाला व्यक्ति 2. मूर्ख व्यक्ति। [वि.] 1. नासमझ; अबोध; अज्ञानी 2. बालबुद्धि; बालमति 3. लापरवाह।

बालिश2 (फ़ा.) [सं-पु.] 1. तकिया; सिरहाना 2. मसनद 3. बढ़ती।

बालिश्त (फ़ा.) [सं-पु.] हाथ की सब उँगलियों को फैलाने पर अँगूठे के शीर्ष से कनिष्ठिका के शीर्ष तक की दूरी; बित्ता; हाथ के पंजे के बराबर लंबाई।

बाली (सं.) [सं-पु.] (रामायण) किष्किंधा का एक प्रसिद्ध वानर राजा जिसका वध राम ने किया था; बालि। [सं-स्त्री.] 1. कान या नाक में पहना जाने वाला एक प्रकार का गोल आभूषण 2. गेहूँ, जौ आदि के पौधे पर लगने वाला अनाज के दानों का समूह या गुच्छा।

बालुका (सं.) [सं-स्त्री.] 1. बालू; रेत 2. ककड़ी 3. कपूर।

बालू [सं-स्त्री.] रेत; बहुत महीन मिट्टी।

बालूशाही (हिं.+फ़ा.) [सं-स्त्री.] मैदे से बनाई जाने वाली एक तरह की मिठाई।

बालेंदु (सं.) [सं-पु.] शुक्ल पक्ष की द्वितीय