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वर्धा हिंदी शब्दकोश

संपादन - राम प्रकाश सक्सेना


हिंदी वर्णमाला का व्यंजन वर्ण। उच्चारण की दृष्टि से यह द्वि-ओष्ठ्य, सघोष, अल्पप्राण नासिक्य है।

मँगता [सं-पु.] भिखारी; भिखमंगा; याचक; मंगन।

मँगनी (सं.) [सं-स्त्री.] 1. वह वैवाहिक रस्म जिसमें वर-कन्या का संबंध पक्का और तय होता है; सगाई वाग्दान; वचन 2. माँगने की क्रिया 3. किसी को कुछ समय के लिए कोई वस्तु देना या किसी से कुछ समय के लिए कुछ माँग कर लेना 4. माँगी गई वस्तु।

मँगवाना [क्रि-स.] किसी दूसरे के हाथ से कोई वस्तु मँगाना; मँगाने का काम कराना।

मँगाना [क्रि-स.] 1. माँगने का काम दूसरे से कराना 2. किसी से कोई चीज़ लाने के लिए कहना।

मँगुरी [सं-स्त्री.] एक प्रकार की छोटी मछली।

मँगेतर [वि.] 1. वह जिसके साथ किसी की मँगनी हुई हो या विवाह होना निश्चित हुआ हो 2. वह युवक या युवती जिसकी मँगनी हो चुकी हो।

मँजना [क्रि-अ.] 1. माँजा जाना; साफ़ करना 2. परिष्कृत होना 3. {ला-अ.} अभ्यास करना; सीखना; दक्षता प्राप्त करना।

मँजाई [सं-स्त्री.] 1. माँजने की क्रिया या भाव 2. माँजने का पारिश्रमिक 3. परिमार्जन; घिसाई; रगड़ाई 4. शुद्धि।

मँजाना [क्रि-स.] 1. माँजने में प्रवृत्त करना; मँजवाना; स्वच्छ कराना 2. शुद्धिकरण कराना; परिष्कृत कराना 3. अभ्यास कराना; कुशल बनाना।

मँजीरा (सं.) [सं-पु.] संगीत में ताल देने की धातु की दो छोटी कटोरियाँ जिन्हें आपस में टकराकर बजाया जाता है।

मँझधार [सं-स्त्री.] 1. नदी या उसके प्रवाह का मध्य भाग 2. {ला-अ.} किसी काम का मध्य।

मँझला [वि.] 1. बिचला; बीच का; मध्यम; मध्य का 2. बड़े भाई से छोटा और छोटे भाई से बड़ा।

मँझार [क्रि.वि.] बीच में। [सं-स्त्री.] 1. मध्य; बीच 2. मँझधार।

मँझोला [वि.] बीच का; मध्य का; मँझला।

मँड़ई [सं-स्त्री.] फूस की बनी हुई कुटी; पर्णकुटी; झोपड़ी; मड़ैया।

मँडनी [सं-स्त्री.] 1. फ़सल के डंठल और अनाज को अलग करने की क्रिया या भाव; मँडाई 2. पके हुए और सूखे अनाज के पौधों को बैलों से रौंदवाना; दँवरी।

मँडराना (सं.) [क्रि-अ.] 1. पक्षियों तथा कीट-पतंगों का किसी चीज़ के चारों ओर घूमते हुए उड़ना 2. स्वार्थवश किसी के आसपास चक्कर लगाना या घूमना 3. मंडल या घेरा बनाकर छा जाना 4. उमड़ना; घुमड़ना; घिरना।

मँडवा [सं-पु.] 1. सरपट आदि से छाकर बनाया गया स्थान 2. मंडप; शामियाना 3. किसी मंडप के अंदर होने वाला तमाशा या खेल।

मँड़ुआ [सं-पु.] एक मोटा अनाज जिसकी रोटी आदि बनाई जाती है।

मँढ़ा [सं-पु.] 1. मंडप 2. प्रकोष्ठ; कमरा; कोठरी।

मँदरा [वि.] जिसका आकार छोटा हो; नाटा; ठिगना। [सं-पु.] एक प्रकार का वाद्य।

मंगन [सं-पु.] 1. माँगने की क्रिया या भाव 2. भीख माँगने वाला व्यक्ति; मँगता; याचक; भिक्षुक।

मंगल (सं.) [सं-पु.] 1. कल्याण; भलाई 2. सप्ताह का एक वार 3. सौर जगत का एक ग्रह 4. शुभ; आनंद; इच्छापूर्ति।

मंगलकरण (सं.) [सं-पु.] किसी कार्य या बात के आरंभ में सफलता के लिए की जाने वाली प्रार्थना।

मंगलकलश (सं.) [सं-पु.] मांगलिक या शुभ अवसरों पर पूजा आदि के स्थानों पर रखा जाने वाला पानी का घड़ा; मंगलघट।

मंगलकाम (सं.) [सं-पु.] मंगल या कल्याण चाहने वाला व्यक्ति; शुभचिंतक; हितैषी।

मंगलकामना (सं.) [सं-स्त्री.] हित या कल्याणकामना; शुभकामना; बधाई; दुआ।

मंगलकारक (सं.) [वि.] 1. मंगल करने वाला; शुभ 2. कल्याणकारी; भलाई करने वाला 3. आनंदप्रद।

मंगलकारी (सं.) [वि.] 1. मंगल करने वाला; सुखद; शुभ 2. कल्याणकारी; भलाई या हित करने वाला 3. आनंदप्रद।

मंगलकार्य (सं.) [सं-पु.] 1. भलाई या हित का कार्य; जनहित का कार्य 2. मंगलोत्सव।

मंगलगान (सं.) [सं-पु.] विवाह आदि शुभ अवसरों पर होने वाला गाना-बजाना।

मंगलगीत (सं.) [सं-पु.] विवाह और अन्य मंगल अवसरों पर गाए जाने वाले गीत; मंगलगान; उत्सवगीत।

मंगल ग्रह (सं.) [सं-पु.] पृथ्वी के सौरमंडल का मंगल नामक ग्रह; (मार्स)।

मंगलघट (सं.) [सं-पु.] मांगलिक या शुभ अवसरों पर पूजा आदि के स्थानों पर रखा जाने वाला पानी का घड़ा; मंगलकलश।

मंगलचिंतन (सं.) [सं-पु.] समाज हित में होने वाला विचार-विमर्श; कल्याणकामना।

मंगलच्छाय (सं.) [सं-पु.] पर्यावरण हितैषी वृक्ष; बरगद, पाकड़, नीम, पीपल आदि।

मंगलदायक (सं.) [वि.] 1. मंगल करने वाला; कल्याणकारी 2. आनंदप्रद।

मंगलद्वार (सं.) [सं-पु.] उत्सव-समारोहों आदि में बनाया जाने वाला द्वार या दरवाज़ा; महल या दुर्ग का मुख्य द्वार।

मंगलध्वनि (सं.) [सं-स्त्री.] मांगलिक अवसरों या उत्सव आदि में होने वाली ध्वनि; मंगलगीत।

मंगलना (सं.) [क्रि-स.] किसी शुभ अवसर पर अग्नि जलाना। [क्रि-अ.] प्रज्वलित होना; जलना।

मंगलपाठ (सं.) [सं-पु.] किसी कार्य से पहले मंगलकामना के लिए कहा जाने वाला पद्य; मंगलाचरण।

मंगलपाठक (सं.) [सं-पु.] 1. मंगलपाठ करने वाला व्यक्ति 2. राजाओं के दरबार में स्तुति करने वाला व्यक्ति; भाट; चारण; बंदीजन।

मंगलपाणि (सं.) [वि.] 1. जिसका हाथ शुभ हो 2. सहायता करने वाला (हाथ)।

मंगलप्रद (सं.) [वि.] 1. आनंद या सुख देने वाला 2. कल्याणकारी; मंगलकारी; शुभ।

मंगलप्रदा (सं.) [सं-स्त्री.] 1. हल्दी 2. शमी का वृक्ष।

मंगलभाषण (सं.) [सं-पु.] किसी अशुभ बात को शुभ रूप से कहने का ढंग।

मंगलभेरी (सं.) [सं-स्त्री.] मांगलिक अवसर या उत्सव आदि में बजाया जाने वाला ढोल।

मंगलमय (सं.) [वि.] 1. जिससे सब प्रकार का मंगल ही होता हो 2. मंगलरूप; कल्याणमय 3. ख़ुश; सुखी; सुखद।

मंगलवर्षा (सं.) [सं-स्त्री.] 1. उत्तम कार्यों से सुख और आनंद की प्राप्ति 2. धन-धान्य की प्राप्ति।

मंगलवाद्य (सं.) [सं-पु.] मांगलिक अवसरों पर बजाए जाने वाले वाद्य यंत्र, जैसे- शहनाई, ढोलक आदि।

मंगलवार (सं.) [सं-पु.] 1. सोमवार के ठीक बाद का दिन 2. सप्ताह के दूसरे दिन का नाम।

मंगलसूत्र (सं.) [सं-पु.] 1. स्त्रियों द्वारा गले में पहना जाने वाला एक आभूषण 2. धार्मिक भावना से कलाई पर बाँधा जाने वाला डोरा या धागा; कलावा।

मंगला [सं-स्त्री.] 1. गुणवान स्त्री 2. दूब; तुलसी 3. सुंदर स्त्री 4. दुर्गा और पार्वती नामक देवी। [वि.] जो मंगल के दिन जन्मी हो; मंगली।

मंगलांकुर (सं.) [सं-पु.] जौ के अंकुर, जो शुभ और मंगलदायक माने जाते हैं; ज्वारे।

मंगलाचरण (सं.) [सं-पु.] शुभ कार्य के प्रारंभ में ईश्वर से की गई स्तुति या प्रार्थना।

मंगलाचार (सं.) [सं-पु.] 1. किसी शुभ कार्य से पहले होने वाला मंगलगान; मंगलाचरण 2. शुभानुष्ठान 3. विवाहोत्सव।

मंगलायन (सं.) [सं-पु.] सुख-समृद्धि का मार्ग; सदाचार का मार्ग। [वि.] जो सुख-समृद्धि के मार्ग पर हो।

मंगलाष्टक (सं.) [सं-पु.] विवाह के अवसर पर वर-वधू के कल्याण के लिए होने वाला मंत्र पाठ।

मंगली (सं.) [वि.] 1. आनंदकारी; मंगलकारी 2. (ज्योतिष) जिसकी जन्मकुंडली के प्रथम, चौथे, आठवें या बारहवें स्थान में मंगल ग्रह हो 3. जिसका मंगलवार को जन्म हुआ हो; मंगला। [सं-स्त्री.] हल्दी।

मंगलीय (सं.) [वि.] 1. मंगलकारी; कल्याणकारक 2. भाग्यवान; शुभावह।

मंगलोत्सव (सं.) [सं-पु.] आनंद के अवसर पर मनाया जाने वाला उत्सव या समारोह; अनुष्ठान; मांगलिक कार्य; बधावा।

मंगल्य (सं.) [वि.] 1. कल्याणकारक; मंगलकारी 2. सुंदर 3. पवित्र। [सं-पु.] 1. पीपल, नारियल, बेल आदि वृक्ष 2. दही 3. चंदन 4. अनाज।

मंगल्या (सं.) [सं-स्त्री.] 1. हल्दी 2. दूब।

मंगोल [सं-पु.] 1. मनुष्य की चार मूल जातियों में से एक जो मध्य एशिया, चीन, जापान आदि देशों में निवास करती है तथा जिसका रंग हलका पीला एवं नाक चपटी होती है 2. उक्त जाति का व्यक्ति।

मंच (सं.) [सं-पु.] 1. ऊँचा बना हुआ स्थान; चबूतरा 2. भाषण स्थल 3. रंगमंच 4. खाट; खटिया; मचिया।

मंचन (सं.) [सं-पु.] मंच पर अभिनय प्रस्तुत करना; मंच पर कोई नाटक खेलना।

मंचित (सं.) [वि.] 1. (नाटक) जो मंच पर अभिनीत हुआ हो ; जिसका मंचन हो चुका हो; मंच पर खेला हुआ 2. घटित 3. प्रस्तुत।

मंचीय (सं.) [वि.] 1. मंच संबंधी; मंचन के योग्य; रंगमंचीय 2. घटनापूर्ण; नाटकीय।

मंजन (सं.) [सं-पु.] दाँत साफ़ करने का चूर्ण; दंतमंजन।

मंजर (सं.) [सं-पु.] 1. मोती 2. तिलक वृक्ष 3. फूलों का गुच्छा।

मंज़र (अ.) [सं-पु.] देखने योग्य वस्तु या स्थान; दृश्यावली; दृश्य; नज़ारा।

मंजरित (सं.) [वि.] 1. जिसमें मंजरी लगी हो; मंजरियों से युक्त 2. पुष्पित।

मंजरी (सं.) [सं-स्त्री.] 1. आम्र पुष्प; आम के बौर 2. नया कल्ला; कोंपल 3. तुलसी।

मंजरीक (सं.) [सं-पु.] 1. वह पौधा जिसपर मंजरीदार या गुच्छे में फूल लगते हो 2. तुलसी, बेंत, अशोक आदि।

मंजा (पं.) [सं-पु.] खाट; चारपाई; मंझा; मंजी।

मंजिमा (सं.) [सं-स्त्री.] सुंदर होने की अवस्था; सुंदरता; मनोहरता।

मंज़िल (अ.) [सं-स्त्री.] 1. मुकाम; गंतव्य; पड़ाव; यात्रा में ठहरने का स्थान 2. मकान का खंड; तल; मरातिब 3. मकान; भवन 4. एक दिन का सफ़र 5. मकान का छत या दरजा।

मंज़िलत (अ.) [सं-स्त्री.] 1. पद; ओहदा 2. सत्कार; आदर।

मंज़िला (अ.) [वि.] जिसमें अनेक तल या मंजिलें हों; तल्लेवाला।

मंजिष्ठा (सं.) [सं-स्त्री.] मंजीठ नामक पौधा और उसका फल।

मंजिष्ठाराग (सं.) [सं-पु.] 1. मंजीठ का रंग 2. {ला-अ.} मंजीठ के रंग की तरह पक्का और स्थायी प्रेम या अनुराग।

मंजीर (सं.) [सं-पु.] 1. नुपूर; घुँघरू 2. वह स्तंभ जिसपर मथानी का डंडा बँधा रहता है।

मंजु (सं.) [वि.] मनोहर; सुंदर।

मंजुगति (सं.) [वि.] मोहक चाल में चलने वाला; सुंदर गति वाला; मंजुगमन।

मंजुघोष (सं.) [वि.] मधुर ध्वनि में बोलने वाला; प्रिय बातें करने वाला; मधुरभाषी; मंजुभाषी; मिष्टभाषी। [सं-पु.] 1. एक बौद्ध आचार्य जो धर्म प्रचार के लिए चीन गए थे 2. तांत्रिकों के एक देवता का नाम।

मंजुभाषी (सं.) [वि.] मीठी और प्रिय बातें करने वाला; मधुरभाषी; मिष्टभाषी; मंजुघोष।

मंजुल (सं.) [वि.] 1. मनोहर; दर्शनीय; सुंदर; सजा हुआ 2. उपवनित; सुरम्य। [सं-पु.] 1. उपवन; कुंज 2. जलाशय का किनारा 3. (संगीत) कर्नाटकी शैली का एक राग।

मंजुस्वर (सं.) [वि.] मीठे स्वरवाला; जिसकी बोली मधुर और प्रिय हो।

मंज़ूर (अ.) [वि.] 1. जो मान लिया गया हो; पसंद; स्वीकार; स्वीकृत 2. देखा हुआ।

मंजूरी (अ.) [सं-स्त्री.] स्वीकृति; अनुमति।

मंजूषा (सं.) [सं-स्त्री.] 1. छोटा पिटारा या डिब्बा 2. पिंजरा 3. मंजीठ।

मंडन (सं.) [सं-पु.] 1. तर्क या वाद-विवाद में किसी विचार या सिद्धांत की पुष्टि करना; पैरवी 2. किसी की शोभा बढ़ाने वाली वस्तु; आभूषण 3. शृंगार करना; सजाना। [वि.] शृंगार करने वाला; मंडित करने या सजाने वाला।

मंडप (सं.) [सं-पु.] 1. छाया हुआ वह स्थान जो चारों तरफ़ से खुला हो; वितान; चँदोवा; मँड़वा; शामियाना 2. किसी भवन आदि के ऊपर की गोल बनावट और उसके नीचे का स्थान।

मंडपी [सं-स्त्री.] 1. छोटा मंडप; मढ़ी 2. कुटी।

मंडल (सं.) [सं-पु.] 1. नगर खंड, क्षेत्र, जनपद आदि 2. गोलाई के आकार का घेरा 3. संस्था; समिति; समुदाय 4. (खगोलविज्ञान) कक्षा; ग्रहों का गतिपथ 5. चक्कर; परिधि।

मंडलवर्ती (सं.) [सं-पु.] मंडल का शासक; राजा।

मंडलाकार (सं.) [वि.] जो मंडल के आकार का हो; गोलाकार; गोला; चक्राकार।

मंडलाधिप (सं.) [सं-पु.] 1. साधुओं के मंडल या मठ का प्रधान साधु 2. किसी जनपद समूह का शासक 3. किसी मंडल का अधिपति; मंडलाधीश 4. राजा 5. मंडलेश्वर।

मंडलाधीश (सं.) [सं-पु.] मंडलेश्वर; मंडलाधिप।

मंडलित (सं.) [वि.] 1. जिसका मंडल बना हो; चक्र के आकार का 2. वर्तुलाकार या गोलाकार।

मंडली (सं.) [सं-स्त्री.] 1. समूह 2. झुंड; दल 3. गोष्ठी; सभा।

मंडलीकरण (सं.) [सं-पु.] 1. मंडल या घेरा बनाना 2. कुंडली बनाना या मारना (साँप आदि का)।

मंडलेश (सं.) [सं-पु.] 1. मंडल का स्वामी; शासक; मंडलाधीश 2. राजा; नरेश।

मंडलेश्वर (सं.) [सं-पु.] 1. साधु समाज या किसी मठ में किसी समूह का मुखिया; मंडलाधीश; मठाधीश 2. किसी मंडल का शासक या अधिपति 3. किसी बड़े प्रदेश या जनपद का स्वामी; राजा।

मंडार [सं-पु.] 1. टोकरा; बड़ा झाबा; डलिया 2. गड्ढा 3. मँडारा।

मंडित (सं.) [वि.] 1. सजाया हुआ; विभूषित; शोभित 2. छाया हुआ; आच्छादित 3. भरा हुआ 4. युक्त।

मंडी (सं.) [सं-स्त्री.] 1. थोक बिक्री का बाज़ार; बड़ा बाज़ार, जैसे- सब्ज़ी मंडी, फल मंडी आदि 2. हाट।

मंडुकपर्णी (सं.) [सं-स्त्री.] 1. ब्राह्मी नामक वनस्पति 2. मंजिष्ठा; मजीठ।

मंडूक (सं.) [सं-पु.] 1. मेंढक 2. प्राचीन काल का एक प्रकार का बाजा 3. एक प्रकार का नृत्य 4. प्राचीन ऋषि 5. एक ताल 6. (कामशास्त्र) एक रतिबंध या आसन।

मंडूका [सं-स्त्री.] मंजिष्ठा; मजीठ।

मंडूकी (सं.) [सं-स्त्री.] मेंढकी।

मंतव्य (सं.) [सं-पु.] 1. मत; विचार 2. विचार के लिए दिया जाने वाला प्रस्ताव 3. संकल्प; निर्णय। [वि.] मानने योग्य; मान्य; माननीय।

मंत्र (सं.) [सं-पु.] 1. नीतिवाक्य; सूत्रवाक्य 2. स्तुति; प्रार्थना 3. मंत्रणा; सलाह 4. कार्यसिद्धि का गुर (मूलमंत्र) 5. ऐसे वैदिक वाक्य जिनके द्वारा यज्ञ आदि क्रिया करने का विधान हो; वेद का संहिता भाग।

मंत्रण (सं.) [सं-पु.] 1. मंत्रणा करने की क्रिया; विचार-विमर्श 2. सलाह करना; मशविरा करना; परामर्श।

मंत्रणा (सं.) [सं-स्त्री.] 1. विचार-विमर्श के बाद का स्थिर मत; मंतव्य 2. बातचीत; मशविरा; परामर्श; विचार-विमर्श; सलाह।

मंत्रदृष्टा (सं.) [वि.] मंत्रों का अर्थ जानने और बताने वाला।

मंत्रभेद (सं.) [सं-पु.] मंत्रणा या गोपनीय बातचीत का भेद प्रकट कर दिया जाना।

मंत्रमुग्ध (सं.) [वि.] 1. मंत्र द्वारा वश में किया हुआ; वशीकृत; सम्मोहित 2. मोहित; आसक्त 3. जड़वत।

मंत्रश्रुति (सं.) [सं-स्त्री.] 1. वह मंत्रणा जिसका भेद खुल गया हो 2. दूसरे के द्वारा सुनी गई बातचीत।

मंत्रस्नान (सं.) [सं-पु.] वह मंत्र जो स्नान के बदले पढ़ा जाता है।

मंत्रहीन (सं.) [वि.] जिसमें मंत्र न हो; जो मंत्र न जानता हो; असंस्कृत।

मंत्रालय (सं.) [सं-पु.] 1. किसी मंत्री या उसके विभाग का कार्यालय 2. मंत्री और उसका विभाग; (मिनिस्टरी)।

मंत्रित (सं.) [वि.] 1. जिसे मंत्रणा या परामर्श दिया गया हो; जिसे मंत्र दिया गया हो 2. मंत्र द्वारा संस्कारित किया गया।

मंत्रित्व (सं.) [सं-पु.] 1. मंत्री का पद या प्रतिष्ठा 2. मंत्री का कार्य।

मंत्रिमंडल (सं.) [सं-पु.] मंत्रियों का समूह या वर्ग; (कैबिनेट)।

मंत्री (सं.) [सं-पु.] 1. आदेश और सलाह देने वाला राज्य का प्रमुख व्यक्ति 2. (मध्यकाल) परामर्शदाता; सचिव; राजा का प्रधान सलाहकार; अमात्य; वज़ीर; (मिनिस्टर)।

मंत्रोक्त (सं.) [वि.] मंत्र में उल्लेखित; मंत्र के अनुसार।

मंत्रोच्चार (सं.) [सं-पु.] मंत्र का उच्चारण करना; मंत्र पढ़ना।

मंथक (सं.) [सं-पु.] चँवर डुलाने पर होने वाली हवा। [वि.] मंथन करने वाला।

मंथन (सं.) [सं-पु.] 1. मथना; बिलोना 2. किसी समस्या या सिद्धांत के लिए किया जाने वाला गंभीर विचार-विमर्श; चिंतन 3. {ला-अ.} गूढ़ तत्व की छानबीन।

मंथर (सं.) [वि.] 1. धीमा; मंद; सुस्त 2. मंदबुद्धि; जड़माति 3. स्थूल; बड़ा या भारी 4. नीच, अधम।

मंथर गति (सं.) [सं-स्त्री.] धीमी गति; मंद गति; रुक-रुक कर चलना।

मंथरित (सं.) [वि.] मंद या धीमा किया हुआ; मंदित।

मंथरु (सं.) [सं-पु.] चँवर की मंद गति की हवा।

मंथान (सं.) [सं-पु.] 1. दही मथने की बड़ी मथानी 2. (पुराण) मंदर पर्वत 3. अमलतास।

मंथिनी (सं.) [सं-स्त्री.] दही मथने या बिलोने का मिट्टी का बड़ा और चौड़े मुँह का मटका; मटकी।

मंथी (सं.) [वि.] 1. मंथन करने वाला; मथने वाला; बिलोने वाला 2. कष्ट या दुख देने वाला; पीड़क। [सं-पु.] 1. मथा हुआ पदार्थ 2. सोमरस।

मंथ्य (सं.) [वि.] 1. मंथन करने योग्य; मंथनीय 2. विवेचनीय।

मंद1 (सं.) [वि.] 1. धीमा; सुस्त 2. हलका; थोड़ा; कम 4. बेवकूफ़; मूर्ख 5. दुष्ट; नीच 6. गंभीर।

मंद2 (फ़ा.) [परप्रत्य.] एक प्रकार का प्रत्यय जो कुछ शब्दों के अंत में जुड़कर 'रखने वाला' अर्थ देता है, जैसे- अक्लमंद, ख़्वाहिशमंद।

मंदक (सं.) [सं-पु.] परमाणु रिएक्टर के अंदर रखे गए ऐसे पदार्थ जिनमें से गुजरने पर तीव्रगामी न्यूट्रॉन मंद हो जाते हैं; मंद या धीमा करने वाला पदार्थ। [वि.] मंद बुद्धि; मूर्ख; बुद्धू; नासमझ।

मंदकांति (सं.) [वि.] 1. जिसकी कांति या चमक फ़ीकी पड़ गई हो; मुरझाया हुआ; मलिन 2. {ला-अ.} वैभवहीन।

मंदगति (सं.) [वि.] 1. धीमी चाल वाला; धीमा या मंद गति से चलने वाला; मंदवेग 2. {ला-अ.} जिसका विकास न हुआ हो, पिछड़ा।

मंदचेता (सं.) [वि.] मंदबुद्धि; जो समझदार न हो; कमअक्ल।

मंदन (सं.) [सं-पु.] धीमा या मंद करने की क्रिया; धीमा करना। [वि.] मंदबुद्धि; बेवकूफ़; मूर्ख।

मंदबुद्धि (सं.) [वि.] मूर्ख; अहमक; जिसकी बुद्धि मंद या हीन हो; मोटी अक्लवाला; अल्पबुद्धि।

मंदभाग्य (सं.) [वि.] जो भाग्यहीन हो; अभागा; बदनसीब।

मंदमति (सं.) [वि.] जो मानसिक रूप से कमज़ोर हो; मोटी अक्लवाला; मंदबुद्धि; कमदिमाग; हीनबुद्धि; मूर्ख।

मंदर (सं.) [सं-पु.] 1. (पुराण) एक पर्वत जिससे देवताओं और असुरों ने समुद्र का मंथन किया था 2. पारिजात वृक्ष 3. स्वर्ग 4. मोतियों का हार 5. दर्पण, आईना 6. गंभीर आवाज़। [वि.] मंद; धीमा।

मंदराचल (सं.) [सं-पु.] (पुराण) एक पर्वत जिससे समुद्र मंथन किया गया था; मंदर पर्वत।

मंदराजी [सं-स्त्री.] भारी शरीर वाली भैंस की एक प्रजाति।

मंदविभव (सं.) [वि.] वैभवहीन; अकिंचन; दरिद्र।

मंदवीर्य (सं.) [वि.] शक्तिहीन; कमज़ोर; जिसमें उत्साह न हो।

मंदसमीर (सं.) [सं-पु.] मंद-मंद चलने वाली हवा; बयार; सुखद प्रतीत होने वाली वायु; मंदसमीरण।

मंदसमीरण (सं.) [सं-पु.] मंद-मंद चलने वाली पवन, बयार या हवा; सुखद प्रतीत होने वाली वायु; मंदसमीर।

मंदस्मित (सं.) [सं-पु.] हलकी हँसी; मुस्कान; मंदहास्य।

मंदा (सं.) [वि.] 1. कम मूल्य; सस्ता 2. मंद; धीमा 3. ढीला 4. ख़राब; घटिया 5. जिसकी माँग कम हो; नीचे भाव पर बिकने वाला 7. बुरा; ख़राब गुणवत्तावाला।

मंदाकिनी (सं.) [सं-स्त्री.] 1. मंद गति से बहने वाली धारा 2. (पुराण) गंगा की वह धारा जो स्वर्ग में बहती है; आकाशगंगा 3. एक वर्णवृत 4. संक्रांति का एक भेद।

मंदाक्रांत (सं.) [वि.] मंद गति से जाने वाला; धीरे-धीरे आगे बढ़ने वाला।

मंदाक्रांता (सं.) [सं-स्त्री.] (काव्यशास्त्र) सत्रह वर्णों का एक छंद जिसके प्रत्येक चरण में क्रमशः मगण, भगण, नगण और तगण तथा अंत में दो गुरु होते हैं।

मंदाक्ष (सं.) [वि.] जिसकी आँखें संकुचित हों। [सं-पु.] लज्जा; शरम; हया।

मंदाग्नि (सं.) [सं-स्त्री.] एक प्रकार का रोग जिसमें रोगी की पाचन शक्ति मंद पर जाती है; अन्न न पचने का रोग; हाज़मे का बिगड़ जाना; बदहज़मी; अपच।

मंदार (सं.) [सं-पु.] 1. (पुराण) स्वर्ग का एक वृक्ष 2. स्वर्ग 3. धतूरा 4. हाथी 5. मदार; आक।

मंदारक (सं.) [सं-पु.] 1. मदार; आक 2. (पुराण) स्वर्ग का एक वृक्ष।

मंदिमा (सं.) [सं-स्त्री.] 1. मंद होने की अवस्था; शिथिलता; धीमापन; सुस्ती 2. अल्पता; कमी; अभाव।

मंदिर (सं.) [सं-पु.] 1. वह स्थान जहाँ लोग पूजा के लिए जाते हैं; देवालय 2. स्थान 3. {अ-अ.} रहने का घर; मकान; निवास।

मंदी [सं-स्त्री.] 1. कीमत या भाव का कम होना 2. बिक्री का कम होना 3. 'तेज़ी' का विलोम; सस्ता।

मंदुरा (सं.) [सं-स्त्री.] 1. घोडों के रहने और बाँधने का स्थान; अश्वशाला; घुड़साल 2. चटाई।

मंदोदरी (सं.) [वि.] 1. मंद उदरवाली 2. छोटे पेटवाली; छरहरी। [सं-पु.] (रामायण) रावण की पत्नी का नाम।

मंदोष्ण (सं.) [वि.] हलका या थोड़ा गरम; सुष्म; कवोष्ण; कुनकुना; गुनगुना।

मंद्र (सं.) [वि.] 1. धीमा; मंद 2. मनोहर; सुंदर 3. प्रसन्न 4. {ला‌-अ.} गहरा; गंभीर। [सं-पु.] 1. गंभीर ध्वनि 2. मृदंग 3. एक प्रकार का हाथी 4. (संगीत) तीन प्रकार के स्वरों में से एक जो धीमा या मंद होता है।

मंद्रध्वनि (सं.) [सं-स्त्री.] गरजने की आवाज़; गरजन; गंभीर ध्वनि।

मंशा (अ.) [सं-स्त्री.] 1. अभिप्राय; आशय 2. इच्छा; इरादा; चाह; अभिलाषा।

मंसूख (अ.) [वि.] जो रद्दकर दिया गया हो, रद्द किया हुआ; काटा हुआ।

मंसूबा (अ.‍) [सं-पु.] 1. विचार; इरादा 2. मंशा; सोच 3. कोई काम करने से पहले मन में सोची जाने वाली युक्ति 4. योजना।

मंसूर (अ.) [वि.] 1. विजयी 2. जिसे ईश्वरीय सहायता मिली हो।

मई (इं.) [सं-स्त्री.] ईसवी सन का पाँचवाँ महीना जो अप्रैल के उपरांत और जून से पहले आता है।

मकई [सं-स्त्री.] 1. एक प्रकार का पौधा; मक्का; भुट्टा 2. उक्त पौधे से प्राप्त दाने।

मकड़जाल [सं-पु.] 1. मकड़ी द्वारा बनाया गया जाला 2. जाल; जंजाल 3. {ला-अ.} किसी के द्वारा किया गया षड्यंत्र; साजिश; फ़रेब।

मकड़ा [सं-पु.] 1. नर मकड़ी; बड़ी मकड़ी 2. एक प्रकार की घास; खमकरा।

मकड़ी [सं-स्त्री.] एक प्रसिद्ध कीड़ा जो अपने मुँह से निकले लार से जाला बनाता है; (स्पाइडर)।

मकतब (अ.) [सं-पु.] 1. इस्लाम धर्म की शिक्षा-दीक्षा की पाठशाला 2. छोटे बच्चों का मदरसा या पाठशाला।

मकतल (अ.) [सं-पु.] कत्ल करने की जगह; कत्लगाह; वधस्थान।

मकतूल (अ.) [वि.] जो कत्ल कर डाला गया हो।

मकदूर (अ.) [सं-पु.] 1. सामर्थ्य; शक्ति; क्षमता; ताकत 2. वश 3. धन।

मकफ़ूल (अ.) [वि.] 1. जो रेहन या बंधक रखा हो; गिरवी 2. ज़मानत में दिया हुआ 3. ताले में बंद किया हुआ।

मकबरा (अ.‍) [सं-पु.] कब्र पर बनी हुई इमारत या गुंबद; स्मारक; रौज़ा; मज़ार।

मकबूज़ा (अ.) [वि.] कब्ज़ा किया हुआ; अधिकृत; अधीन।

मकबूल (अ.) [वि.] 1. पसंद होने लायक; बढ़िया; अच्छा 2. कबूल किया हुआ; स्वीकारा हुआ; माना हुआ 3. प्यारा; प्रिय।

मकर1 (सं.) [सं-पु.] घड़ियाल; मगरमच्छ 2. मछली 3. बारह राशियों में से दसवीं राशि 4. नौ निधियों में से एक।

मकर2 (फ़ा.) [सं-पु.] 1. धोखा; छल 2. नख़रा।

मकरंद (सं.) [सं-पु.] 1. पुष्प रस; फूलों का रस; पराग 2. शहद; मधु 3. फूलों का केसर 4. भ्रमर 5. कोयल 6. एक प्रकार का छंद 7. एक ताल।

मकरकुंडल (सं.) [सं-पु.] मकर या मछली के आकार का कानों में पहनने का आभूषण या कुंडल; मकराकृत कुंडल।

मकरकेतु (सं.) [सं-पु.] कामदेव; मदन।

मकरध्वज (सं.) [सं-पु.] 1. कामदेव 2. (रामायण) अहिरावण का द्वारपाल जो हनुमान के पसीने से उत्पन्न माना जाता है; मत्स्योदर 3. (आयुर्वेद) चंद्रोदय नामक एक प्रसिद्ध औषधि; रससिंदूर 4. लौंग।

मकर राशि (सं.) [सं-स्त्री.] बारह राशियों में से दसवीं राशि।

मकररेखा (सं.) [सं-स्त्री.] (भूगोल) एक रेखा जो दक्षिणी गोलार्द्ध में भूमध्य रेखा‎ के समानांतर 23 डिग्री 26' 22" पर स्थित है; ग्लोब पर पश्चिम से पूरब की ओर खींची गई काल्पनिक रेखा।

मकरवाहन (सं.) [सं-पु.] 1. (पुराण) मगरमच्छ पर सवारी करने वाले देवता 2. देवता जिनका वाहन मकर है; वरुण।

मकरव्यूह (सं.) [सं-पु.] मकर के आकार में की गई सैनिकों की व्यूह-रचना।

मकरसंक्रांति (सं.) [सं-स्त्री.] वह समय जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है; माघ मास की संक्रांति जब सूर्य उत्तरायण होता है।

मकरांक (सं.) [सं-पु.] 1. कामदेव 2. समुद्र।

मकराकर (सं.) [सं-पु.] 1. समुद्र; सागर 2. मगरमच्छों का निवास स्थल; मकरालय।

मकराकृत (सं.) [वि.] 1. मगरमच्छ या मछली की आकृति का 2. जो मछली जैसी आकृति का हो, जैसे- मकराकृत कुंडल।

मकरालय (सं.) [सं-पु.] समुद्र।

मकरूह (अ.) [वि.] 1. ख़राब; गंदा; बहुत दूषित; बुरा; घृणित; अपवित्र 2. नाजायज़; अवैध (काम)।

मकसद (अ.) [सं-पु.] 1. उद्देश्य; इरादा 2. मनोरथ; कामना 3. अभिप्राय; मतलब; अभीष्ट।

मकसूद (अ.) [सं-पु.] उद्देश्य; मतलब। [वि.] अभिप्रेत; इच्छित; उद्दिष्ट।

मकसूम (अ.) [सं-पु.] भाग्य; किस्मत; तकदीर [वि.] बाँटा हुआ; विभक्त; तकसीम किया हुआ।

मकान (अ.‍) [सं-पु.] घर; आवास; भवन; गृह; निवास स्थल।

मकान भाड़ा (अ.) [सं-पु.] वह रकम जो मकान इस्तेमाल करने के बदले दी जाए; मकान का किराया।

मकाम (अ.) [सं-पु.] 1. ठहरने का स्थान या जगह 2. स्थान; जगह 3. पड़ाव 4. ठहराव 5. घर; वासस्थल 6. भूमिका।

मकामी (अ.) [वि.] ठहरा हुआ; स्थिर।

मकुना (सं.) [सं-पु.] 1. बिना दाँत वाला छोटा नर हाथी 2. बिना मूँछों का पुरुष; वह जिसके अभी मूँछें न उगी हो। [वि.] कम ऊँचाई का; छोटा; नाटा।

मकुनी [सं-स्त्री.] 1. आटे की लोई में बेसन भरकर बनाई गई बाटी 2. पीठी भरी हुई कचौरी 3. बेसन की रोटी; मटर के आटे की रोटी।

मकुर (सं.) [सं-पु.] 1. वह डंडा जिससे कुम्हार चाक चलाता है 2. मौलसिरी; बकुल 3. दर्पण; शीशा; आईना; मुकुर 4. फूल की कली।

मकूला (अ.) [सं-पु.] 1. कहावत; उक्ति; मसला 2. वचन; कौल।

मकोड़ा [सं-पु.] 1. चींटी की तरह का कीट; चींटा 2. छोटा कीड़ा (कीड़ा के साथ प्रयुक्त), जैसे- कीड़ा-मकोड़ा।

मकोय [सं-स्त्री.] 1. एक पौधा जिसके फल और पत्ते औषधि के काम आते हैं; गुच्छफला; काकमाची या भटकोइंया 2. मकोई।

मक्का1 [सं-पु.] एक प्रसिद्ध खाद्यान्न, मकई।

मक्का2 (अ.) [सं-पु.] सऊदी अरब का एक प्रसिद्ध नगर जो मुसलमानों का सबसे बड़ा तीर्थस्थल है; मुहम्मद साहब का जन्म स्थान।

मक्कार (अ.) [वि.] धोखा देने वाला; छली; मक्र करने वाला; फ़रेबी।

मक्कारी (अ.) [सं-स्त्री.] छल; फ़रेब; धोखा; कुचाल; वह काम जो किसी को धोखे में डालकर कोई स्वार्थ साधने के लिए किया जाए; छल या धूर्ततापूर्ण कार्य; चालाकी; धेाखेबाज़ी।

मक्खन (सं.) [सं-पु.] दही के रूप जमाए हुए दूध को मथकर निकाला गया पदार्थ; नवनीत; क्षीरज; (बटर)। [मु.] -लगाना : चापलूसी करना।

मक्खनबाज़ (हिं.+फ़ा.) [वि.] चापलूसी करने वाला; ख़ुशामद करने वाला; आगे-पीछे लगा रहने वाला; हाँ में हाँ मिलाने वाला।

मक्खनबाज़ी (हिं.+फ़ा.) [सं-स्त्री.] किसी की ख़ुशामद करने की क्रिया; चापलूसी; चाटुकारिता; जी-हुज़ूरी।

मक्खनी [वि.] मक्खन से बना हुआ; चिकना; घी-तेल या चिकनाईयुक्त।

मक्खी [सं-स्त्री.] 1. घरों और आसपास के स्थानों पर पाया जाने वाला एक पंखदार कीट; घरेलू मक्खी 2. फूलों के पराग से शहद बनाने वाली मधु मक्खी; मक्षिका। [मु.] जीती मक्खी निगलना : जान-बूझकर ऐसा काम करना जिससे बाद में हानि हो। मक्खी की तरह निकाल फेंकना : निकृष्ट या त्याज्य समझकर अलग कर देना।

मक्खीचूस [वि.] बहुत कंजूस; कृपण; जो ज़रूरत पड़ने पर भी धन का भोग या व्यय न करे और न ही किसी को दे।

मक्षिका (सं.) [सं-स्त्री.] 1. मधुमक्खी 2. मक्खी।

मख (सं.) [सं-पु.] यज्ञ; प्राचीन भारतीय आर्यों का एक धार्मिक कृत्य जिसमें हवन आदि होते थे।

मख़ज़न (अ.) [सं-पु.] 1. जमा करने का स्थान 2. खज़ाना; कोष 3. शब्दों का बड़ा संग्रह; शब्दकोश 4. गोला-बारूद का भंडार।

मखतूल (सं.) [सं-पु.] काला रेशम।

मख़दूम (अ.) [वि.] 1. सेवा या ख़िदमत के योग्य 2. पूज्य; पूजनीय 2. जिसकी सेवा की गई हो 3. स्वामी; मालिक 4. मान्य 5. मुस्लिम धर्माधिकारी।

मख़दूमी (अ.) [सं-पु.] (संबोधन में प्रयुक्त) पूज्य; सेव्य।

मखनिया [सं-पु.] मक्खन बनाने वाला या बेचने वाला व्यक्ति। [वि.] मक्खन निकाला हुआ; मक्खन संबंधी।

मख़मल (अ.) [सं-पु.] एक प्रकार का कपड़ा जिसकी ऊपरी परत बहुत ही मुलायम और कोमल होती है।

मख़मली (अ.) [वि.] मख़मल का बना हुआ; मख़मल सा कोमल और चमकदार।

मख़मसा (अ.) [सं-पु.] 1. झगड़ा; झमेला; विवाद 2. विकट समस्या 3. भय; डर।

मख़मूर (अ.) [वि.] नशे में चूर; मदिरोन्मत; मतवाला; मदमस्त।

मख़रज (अ.) [सं-पु.] 1. स्रोत 2. उद्गम या मूल स्थान 3. शब्द की व्युत्पत्ति 4. निकलने का रास्ता 5. मुखेंद्रिय; मुख।

मख़लूक (अ.) [वि.] रचा या बनाया हुआ। [सं-स्त्री.] जीव-समष्टि; सृष्टि; दुनिया; जगत; जीव-जंतु।

मख़सूस (अ.) [वि.] 1. किसी कार्य विशेष के लिए अलग किया हुआ 2. विशिष्ट; ख़ास 3. प्रमुख; प्रधान।

मखाना [सं-पु.] एक पौधा जिसके बीज के अंदर का सफ़ेद हिस्सा खाने में उपयोग होता है; एक प्रसिद्ध मेवा; तालमखाना।

मखान्न (सं.) [सं-पु.] 1. तालमखाना 2. यज्ञान्न।

मखौल [सं-पु.] उपहास; खिल्ली; निंदा; व्यंग्य।

मखौलिया [वि.] 1. मखौल उड़ाने वाला; विनोदप्रिय; दिल्लगीबाज़; हँसोंड़ 2. मखौल के रूप में होने वाला।

मग [सं-पु.] 1. मगध का निवासी 2. पीपल 3. मगह देश; मगध 4. शाक द्वीप का भाग।

मगज़ (फ़ा.) [सं-पु.] 1. दिमाग; मस्तिष्क; सिर 2. गिरी; मींगी। [मु.] -खाना या चाटना : बेकार की बकवास करके तंग करना।

मगण (सं.) [सं-पु.] (छंदशास्त्र) तीन गुरु वर्णों का एक गण, जैसे- जामाता।

मगध (सं.) [सं-पु.] 1. बिहार राज्य का प्राचीन नाम 2. बंदीजन; भाट 3. मगध निवासी; मागध।

मगन (सं.) [वि.] 1. डूबा हुआ; मग्न 2. {ला-अ.} बहुत अधिक आनंदित या प्रसन्न; मस्त।

मगर1 (सं.) [सं-पु.] 1. घड़ियाल 2. मछली 3. नेपाल देश की एक जाति।

मगर2 (फ़ा.) [अव्य.] 1. लेकिन; पर 2. किसी प्रकार भी।

मगरमच्छ [सं-पु.] विशालकाय मांसाहारी जलचर प्राणी; घड़ियाल; मगर।

मगरिब (अ.) [सं-पु.] पश्चिम दिशा; सूरज डूबने की दिशा।

मगरिबी (अ.) [वि.] मगरिब या पश्चिम का; पाश्चात्य; पश्चिमी।

मगरूर (अ.) [वि.] जिसे गरूर हो; गरूरवाला; घमंडी; अभिमानी।

मगलूब (अ.) [वि.] 1. दबाया हुआ; दबा 2. पराजित; परास्त।

मगसिर [सं-पु.] मार्गशीर्ष माह; अगहन।

मगही [वि.] 1. मगध देश का; मगध संबंधी 2. मगध या बिहार में उत्पन्न होने वाला। [सं-पु.] मगध या बिहार क्षेत्र में पैदा होने वाले पान की एक बढ़िया किस्म।

मग्न (सं.) [वि.] 1. डुबा हुआ, जैसे- जलमग्न, शोकमग्न 2. {ला-अ.} किसी कार्य में तल्लीन 3. प्रसन्न; आनंदित।

मघा (सं.) [सं-पु.] सत्ताईस नक्षत्रों में से दसवाँ नक्षत्र।

मचक [सं-स्त्री.] मचकने की क्रिया या भाव; लचक; दाब; दबक।

मचकना [क्रि-अ.] लकड़ी या चमड़े आदि के सामान का दबकर या हिलकर 'मच-मच' करना; लचकना; चरमराना। [क्रि-स.] किसी वस्तु को दबाकर 'मचमच' की आवाज़ करना।

मचका [सं-पु.] 1. धक्का; लचका; दबक 2. पेंग; झोंटा; झूले की पेंग।

मचना [क्रि-अ.] 1. फैलना; छा जाना; व्यापना 2. आरंभ होना, जैसे- आपाधापी मचना 3. हलचल होना, जैसे- शोर मचना 4. ज़ोर-शोर से शुरू होना, जैसे- उत्सव की धूम मची है।

मचमच [सं-स्त्री.] 1. किसी वस्तु के दबने या दबाए जाने पर होने वाला शब्द 2. लपलपाहट।

मचमचाना [क्रि-अ.] 1. इस प्रकार दबना या दबाना कि मचमच शब्द होने लगे; लचकना 2. कामवासना से उत्तेजित होना; कामातुर होना।

मचमचाहट [सं-स्त्री.] 1. खलबली; उतावली 2. लपलपाहट 3. कामोत्तेजना का आवेग।

मचलना [क्रि-अ.] 1. किसी वस्तु के पाने या न देने की जिद पकड़ लेना; आतुर होना; हठ करना; ठिनकना 2. {ला-अ.} उफनना; भड़कना।

मचला [सं-पु.] बाँस की बनी डिबिया। [वि.] 1. हठी; मचलने वाला 2. जान-बूझकर अनजान बनने वाला।

मचलाना [क्रि-स.] 1. मचलने के लिए प्रवृत्त करना 2. किसी वस्तु की प्राप्ति के लिए ललचाना 3. उफनाना 4. रुलाना। [क्रि-अ.] उलटी या मतली मालूम होना।

मचान (सं.) [सं-स्त्री.] लट्ठे या बाँस आदि के फट्ठे बाँधकर बनाया हुआ ऊँचा स्थान जिसपर बैठकर शिकार या खेत की रखवाली करते हैं; मंच।

मचाना [क्रि-स.] 1. आरंभ करना; जारी करना, जैसे- शोर मचाना 2. साधक होना 3. चारों ओर फैलाना।

मचामच [सं-स्त्री.] मचक। [वि.] कसकर या ठँसकर भरा हुआ।

मचिया (सं.) [सं-स्त्री.] 1. छोटी चारपाई 2. बैठने की पीढ़ी।

मच्छ (सं.) [सं-पु.] 1. बहुत बड़ी मछली; मत्स्य 2. (काव्यशास्त्र) दोहे का एक भेद जिसमें सात गुरु और चौंतीस लघु मात्राएँ होती है।

मच्छर (सं.) [सं-पु.] एक प्रसिद्ध उड़ने वाला छोटा कीट जिसकी मादा मनुष्य-पशुओं के शरीर पर बैठकर ख़ून चूसती है; मलेरिया डेंगू आदि रोग फैलाने वाले कीट।

मच्छरदानी [सं-स्त्री.] मच्छरों आदि से बचने के लिए पलंग या चारपाई पर लगाया जाने वाला जालीदार परदा; मसहरी।

मछली (सं.) [सं-स्त्री.] एक जलजंतु जिसकी छोटी-बड़ी अनेक जातियाँ होती हैं तथा जो फेफड़े से साँस न लेकर गलफड़े से साँस लेती हैं; मत्स्य; मीन।

मछुआ [सं-पु.] मछलियों को पकड़कर तथा बेचकर जीविका अर्जित करने वाला व्यक्ति; मल्लाह; माहीगीर; मछुआरा; धीवर।

मछुआरिन [सं-स्त्री.] मछुआ या मल्लाह समाज की स्त्री।

मज़कूर (अ.) [वि.] जिसका ज़िक्र किया गया हो; कहा हुआ; कथित; उक्त। [सं-पु.] 1. लिखित विवरण 2. चर्चा; ज़िक्र।

मज़कूरा (अ.) [वि.] कहा हुआ; कथित; उक्त।

मज़कूरी (फ़ा.) [सं-पु.] सम्मन तामील करने वाला कर्मचारी या चपरासी।

मजज़ूब (अ.) [वि.] 1. जो जज़्ब हो गया हो; जो सोख लिया गया हो 2. किसी विषय में डूबा हुआ; तल्लीन; तन्मय। [सं-पु.] वह संत या फ़कीर जो ब्रह्म में लीन हो।

मज़दूर (फ़ा.) [सं-पु.] 1. शारीरिक श्रम के द्वारा जीविका कमाने वाला व्यक्ति; श्रमिक 2. कल-कारख़ाने में काम करने वाला व्यक्ति 3. उजरत पर काम करने वाला व्यक्ति।

मज़दूर वर्ग (फ़ा.+सं.) [सं-पु.] श्रमिक वर्ग; कामगारों का वर्ग।

मज़दूर संघ (फ़ा.+सं.) [सं-पु.] मज़दूरों का संगठन; श्रमिक संगठन; (ट्रेड यूनियन)।

मज़दूरी (फ़ा.) [सं-स्त्री.] 1. मज़दूर का काम 2. मज़दूर को काम के बदले दिया जाने वाला पारिश्रमिक; उजरत 3. ढुलाई आदि का काम; कुलीगिरी।

मजनूँ (अ.) [सं-पु.] लैला-मजनूँ नामक प्रसिद्ध लोककथा का नायक। [वि.] 1. किसी पर मरने वाला; आशिक; प्रेमी 2. पागल; बावला; सिड़ी 3. दुबला-पतला (व्यक्ति)।

मज़बह (अ.) [सं-पु.] ज़बह या कत्ल करने की जगह; मकतल; वधस्थल।

मज़बूत (अ.) [वि.] 1. अखंडनीय; अटूट; दृढ़; पुष्ट; पक्का; टिकाऊ 2. प्रबल; बलवान; शक्तिशाली।

मज़बूती (अ.) [सं-स्त्री.] 1. मज़बूत होने का भाव; दृढ़ता; सबलता 2. टिकाऊपन; पक्कापन 3. ताकत; शक्ति; साहस; बल; हिम्मत।

मज़बूर (अ.) [वि.] विवश; लाचार; जिसपर ज़ब्र किया गया हो; निःसहाय।

मज़बूरन (अ.) [अव्य.] मजबूर होकर; विवश होकर; विवशतावश; लाचारी से।

मज़बूरी (अ.) [सं-स्त्री.] विवशता; लाचारी।

मजमा (अ.) [सं-पु.] भीड़भाड़; जमघट; तमाशबीनों का जमाव।

मजमूआ (अ.) [सं-पु.] 1. संग्रह; जोड़ 2. बहुत-सी चीज़ों का समूह; ढेर; राशि। [वि.] एकत्र किया हुआ; ज़मा किया हुआ; संगृहीत।

मजमूई (अ.) [वि.] 1. कुल; सब 2. इकट्ठा किया हुआ; एक में मिलाया हुआ; सामूहिक।

मज़मून (अ.) [सं-पु.] 1. वह विषय जिसपर कुछ कहा या लिखा जाए 2. लेख; निबंध; पाठ।

मज़मून नवीस (अ.+फ़ा.) [सं-पु.] लेख लिखने वाला; निबंधकार; लेखक।

मज़मून निगार (अ.+फ़ा.) [सं-पु.] दे. मज़मून नवीस।

मज़मूम (अ.) [वि.] 1. जिसकी मज़म्मत या निंदा की गई हो; बुरा; निंदित; ख़राब 2. नीच; अश्लील 3. संबद्ध; मिलाया हुआ।

मजमेबाज़ (अ.+फ़ा.) [वि.] 1. मजमा लगाने वाला; तमाशाई 2. कलंदर; तमाशेबाज़।

मज़म्मत (अ.) [सं-स्त्री.] 1. निंदा; बुराई; भर्त्सना 2. निंदात्मक लेख या कविता।

मज़रूअ (अ.) [वि.] जोता-बोया हुआ। [सं-पु.] वह खेत जो जोता-बोया गया हो।

मज़रूब (अ.) [वि.] पीटा हुआ; जिसपर ज़रब या चोट लगाई गई हो; जिसपर आघात किया गया हो। [सं-पु.] (गणित) वह संख्या जिसका गुणा किया जाए।

मज़रूह (अ.) [वि.] 1. जिसे घाव हुआ हो; घायल; आहत; चोट खाया हुआ; ज़ख्मी 2. {ला-अ.} प्रेम या विरह में व्याकुल।

मजलिस (अ.) [सं-स्त्री.] 1. सभास्थल 2. सभा 3. महफ़िल; जलसा; अधिवेशन; उर्स।

मजलिसी (अ.) [वि.] 1. मजलिस या सभा संबंधी; मजलिस का 2. मजलिस में जाने वाला; मजलिस करने वाला। [सं-पु.] 1. सभा में शामिल होने वाला व्यक्ति 2. मजलिस में आमंत्रित किया गया व्यक्ति 3. सभ्य।

मज़लूम (अ.) [वि.] जिसपर ज़ुल्म किया गया हो, पीड़ित; त्रस्त, सताया हुआ।

मज़हब (अ.) [सं-पु.] 1. धर्म 2. पंथ; दीन; संप्रदाय 3. रास्ता।

मज़हबी (अ.) [वि.] 1. धर्म विशेष से संबंध रखने वाला; धार्मिक; धर्म संबंधी 2. सांप्रदायिक।

मज़ा (फ़ा.) [सं-स्त्री.] 1. स्वाद; लुत्फ़; ज़ायका 2. आनंद; सुख 3. हँसी; दिल्लगी 4. चस्का 5. तमाशा।

मज़ाक (अ.) [सं-पु.] परिहास; हँसी; दिल्लगी; उपहास; ठट्टा।

मज़ाकन (अ.) [अव्य.] मज़ाक या परिहास के रूप में; मज़ाक में; हँसी में; हँसी के तौर पर।

मज़ाकपसंद (अ.) [वि.] जो ख़ूब मज़ाक करता हो; हँसोड़; विनोदप्रिय।

मज़ाकिया (अ.) [वि.] 1. मज़ाक संबंधी 2. हँसोड़; परिहासप्रिय; विनोदी।

मजाज़ (अ.) [सं-पु.] नियमानुसार मिला हुआ अधिकार या सामर्थ्य। [वि.] 1. अधिकारप्राप्त 2. अवास्तविक; कल्पित; बनावटी; लौकिक।

मजाज़न (अ.) [अव्य.] 1. कानून, नियम या विधि आदि के अनुसार; आधिकारिक रूप से; नियमानुसार 2. काल्पनिक रूप से; मानकर 3. लक्षणा से।

मजाज़ी (अ.) [वि.] 1. कल्पित; अवास्तविक 2. कृत्रिम; नकली; बनावटी 3. संसार या लोक संबंधी; लौकिक; सांसारिक।

मजाज़े-समाअत (अ.) [वि.] 1. जिसे विचार करने या सुनने का अधिकार हो 2. नियमानुसार समर्थ।

मज़ार (अ.) [सं-पु.] 1. वह स्थान जहाँ लोग ज़ियारत या दर्शन करने जाते हैं; दरगाह; समाधिस्थल 2. कब्र।

मजाल (अ.) [सं-स्त्री.] हिम्मत; साहस; योग्यता; क्षमता; सामर्थ्य; शक्ति।

मजिस्ट्रेट (इं.) [सं-पु.] 1. जज; न्यायाधीश; दंडाधिकारी; दंडनायक; फ़ौजदारी अदालत का अफ़सर 2. मुकदमे सुनने तथा शासन-प्रबंध का काम करने वाला व्यक्ति।

मजीठ (सं.) [सं-स्त्री.] एक लता जिसकी जड़ों और डंठलों को उबालकर उससे लाल रंग निकाला जाता है।

मजीठी [वि.] 1. मजीठ के रंग का 2. गहरा लाल या सुर्ख़। [सं-पु.] मजीठ का रंग।

मजीद (अ.) [वि.] 1. पवित्र; पूज्य 2. बड़ा।

मज़ीद (अ.) [सं-पु.] 1. अधिकता 2. ज़्यादती। [वि.] 1. अधिक; ज़्यादा; अतिरिक्त 2. बढ़ाया हुआ; जिसमें अधिकता की गई हो।

मजीरा [सं-पु.] दे. मँजीरा।

मजूमदार [सं-पु.] बंगाली समाज में एक कुलनाम या सरनेम।

मजूरी [सं-स्त्री.] मज़दूरी; मेहनत; दिहाड़ी।

मजेजवंत [वि.] 1. ऊँचे दिमाग या स्वभाववाला; अभिमानी 2. अहंकारी; घमंडी।

मजेठी (सं.) [सं-स्त्री.] 1. चरखे में दोनों डंडों को जोड़कर रखने वाली लकड़ी 2. चरखे की डोरी 3. जोत; माल।

मज़ेदार (फ़ा.) [वि.] 1. ज़ायकेदार; स्वादिष्ट; लज्ज़तदार 2. बढ़िया; सुखदायी; जिसमें आनंद आता हो 3. दिलचस्प; रोचक; मनोरंजक।

मज़ेदारी (अ.) [सं-स्त्री.] 1. मज़ेदार होने की अवस्था या भाव; मज़ा; आनंद 2. मज़ेदार बात।

मज्जन (सं.) [सं-पु.] 1. स्नान; नहाना 2. डुबकी; गोता 3. {ला-अ.} अनुरक्त होना।

मज्जा (सं.) [सं-स्त्री.] (जीवविज्ञान) हड्डी के अंदर का सार तत्व; अस्थिमज्जा; (बोनमैरो)।

मझधार [सं-स्त्री.] दे. मँझधार।

मझला (सं.) [वि.] दे. मँझला।

मझोला [वि.] दे. मँझोला।

मटक (सं.) [सं-स्त्री.] 1. मटकने की क्रिया या भाव; लचक; इठलाहट 2. नखरे का भाव 3. गति; चाल।

मटकना (सं.) [क्रि-अ.] 1. लय के साथ अंगों का हिलना; नाचना 2. इठलाना; इतराना; नाज़-नख़रे दिखाना।

मटका [सं-पु.] पानी भरने के लिए मिट्टी का बना एक बरतन; घड़ा; मंथनपात्र; माट।

मटकाना [क्रि-स.] 1. नख़रे की अदा से हिलाना 2. किसी अंग में मटक लाना, जैसे- कमर मटकाना, आँखें मटकाना 3. भाव विशेष के साथ आँखें या हाथ आदि नचाना।

मटकी [सं-स्त्री.] 1. छोटा मटका या घड़ा 2. मटकने की क्रिया या भाव; मटक।

मटकीला [वि.] 1. मटकने वाला 2. जिसमें किसी तरह की मटक या लचक हो 2. नख़रीला।

मटन (इं.) [सं-पु.] भेड़ या बकरी का मांस।

मटमैला [वि.] मिट्टी आदि के रंग का; ख़ाकी; धूसर।

मटर [सं-पु.] 1. एक प्रकार का पौधा और उसकी फली से निकलने वाले दाने, जिससे सब्ज़ी बनती है 2. एक प्रकार की दाल।

मटरगश्त [सं-पु.] सैर-सपाटा; धीरे-धीरे घूमना; निश्चिंत होकर व्यर्थ में इधर-उधर घूमना; आवारा फिरना।

मटरगश्ती [सं-स्त्री.] 1. मटरगश्त होने की अवस्था या भाव; व्यर्थ में इधर-उधर घूमने की क्रिया या भाव; आवारा होकर घूमना-फिरना 2. विचरण; सैर-सपाटा।

मटियाना [क्रि-स.] 1. मिट्टी लगाना; मिट्टी से माँजना; मिट्टी से युक्त करना 2. मिट्टी से धोना (हाथ, बरतन आदि)।

मटियामेट [वि.] 1. मिट्टी में मिला हुआ 2. नष्ट; बरबाद 3. धूल-धूसरित।

मटियाला [वि.] मिट्टी से युक्त; मटमैला; कीचड़दार; धूलमय।

मट्ठर [वि.] 1. कामकाज करने में सुस्त 2. धीरे-धीरे चलने वाला; मंद; धीमा 3. आलसी; कामचोर 4. लस्त-पस्त।

मट्ठा [सं-पु.] मक्खन निकला दही; छाँछ; मही।

मठ (सं.) [सं-पु.] 1. साधु-संन्यासियों के रहने का स्थान; अखाड़ा; आश्रम 2. उपासनालय; देवालय।

मठरना [सं-पु.] धातु के पत्तर को पीटने का सुनारों और कसेरों का एक औज़ार। [क्रि-अ.] 1. धातु की चद्दर या पत्तर को पीटना; धातु पत्तरों को गोलाई में लाना 2. फ़ालतू घूमना-फिरना; विचरना।

मठरी [सं-स्त्री.] घी आदि में तली हुई मैदे की छोटी बूँदी या टिकिया; एक प्रकार का नमकीन या मीठा खाद्य पदार्थ।

मठाधीश (सं.) [सं-पु.] 1. मठ में रहने वाले साधुओं का प्रधान; पीठाधीश; धर्माध्यक्ष; आचार्य; कुलगुरु; मठ का महंत 2. (व्यंग्य) किसी संस्था या संगठन का प्रधान व्यक्ति।

मठिया [सं-स्त्री.] 1. छोटा मठ 2. एक प्रकार की चूड़ी।

मठोर [सं-स्त्री.] 1. दही मथने और रखने की मटकी या घड़ा; मंथनपात्र 2. नील पकाने का पात्र।

मड़क [सं-स्त्री.] 1. शीघ्र समझ में न आने वाली बात 2. किसी बात के अंदर छिपा कारण या हेतु; भेद; रहस्य; आंतरिक सूक्ष्म आशय।

मड़ैया [सं-स्त्री.] छप्पर; छोटी झोंपड़ी; कुटी; पलानी; मँड़ई।

मढ़ना (सं.) [क्रि-स.] 1. चारों ओर लपेटना; चिपकाना; लगाना; जड़ना 2. कोई कार्य या बात बलपूर्वक किसी के ज़िम्मे लगाना 3. ढोलक आदि बाजे के मुँह पर चमड़ा लगाना 4. चित्र आदि पर चौखट जड़ना 5. किसी के सिर पर काम या दोष थोपना। [क्रि-अ.] 1. अस्तित्व में आना; वर्तमान होना 2. आरंभ होना 3. मचना।

मढ़ा [सं-पु.] 1. मिट्टी का बना छोटा घर 2. मंडप 3. घेरा।

मढ़ाई [सं-स्त्री.] 1. मढ़ने की क्रिया या भाव 2. मढ़ने की मज़दूरी।

मढ़ी (सं.) [सं-स्त्री.] 1. छोटा-सा मठ 2. छोटा मंदिर या देवालय 3. साधु या संन्यासी की समाधि स्थल के समीप बनी हुई कुटिया; झोपड़ी 4. छोटा घर 5. छोटा मंडप।

मणक (सं.) [सं-पु.] एक प्रकार का बहुमूल्य रत्न।

मणि (सं.) [सं-स्त्री.] 1. बहुमूल्य पत्थर 2. मोती; जवाहिर; रत्न 3. लिंग या योनि का अग्रभाग 4. घड़ा 5. कलाई।

मणिक (सं.) [सं-पु.] 1. मिट्टी का घड़ा 2. आँख का लेंस 3. योनि का अग्रभाग 3. स्फटिक निर्मित महल।

मणिकंठ (सं.) [सं-पु.] नीलकंठ पक्षी।

मणिकर्णिका (सं.) [सं-स्त्री.] 1. मणियों से जड़ा हुआ कान में पहनने का आभूषण; मणिमय; कर्णाभूषण 2. वाराणसी या काशी का एक प्रसिद्ध घाट।

मणिकांचन (सं.) [वि.] मणि और सुवर्ण का मेल; रत्न और सोने का मेल।

मणिकार (सं.) [सं-पु.] गहने बनाने वाला व्यक्ति; जौहरी; सुनार।

मणिधर (सं.) [सं-पु.] 1. साँप; भुजंग 2. एक प्रकार की समाधि।

मणिपुर (सं.) [सं-पु.] एक पूर्वोत्तर भारतीय राज्य।

मणिपूर (सं.) [सं-पु.] सुषुम्ना नाड़ी के अंदर माने जाने वाले छह चक्रों में से तीसरा चक्र जो नाभि क्षेत्र में स्थित है।

मणिबंध (सं.) [सं-पु.] 1. (काव्यशास्त्र) एक छंद जिसके प्रत्येक चरण में भगण, मगण और सगण होते हैं 2. कलाई पर बाँधी जाने वाली पट्टी 3. पहुँचा; कलाई; गट्ठा 4. (हठयोग) शरीर के अंदर छह चक्रों में से एक।

मणिभ (सं.) [सं-पु.] 1. स्फटिक 2. रवा; क्रिस्टल 3. किसी द्रव को सुखाकर बनाए गए कण।

मणिभारव (सं.) [सं-पु.] सारस नामक पक्षी।

मणिमान (सं.) [वि.] मणियुक्त; मणिवाला। [सं-पु.] 1. सूर्य 2. पहाड़।

मणिमाला (सं.) [सं-स्त्री.] 1. मणियों की माला 2. (काव्यशास्त्र) छंद का एक प्रकार।

मणींद्र (सं.) [सं-पु.] हीरा।

मत (सं.) [सं-पु.] 1. ख़याल; नज़रिया; विचार; राय 2. मति; बुद्धि; सम्मति 3. पंथ; अनुयायी संप्रदाय 4. भाव; आशय; अभिप्राय 5. निर्वाचन के समय किसी प्रतिनिधि को दी जाने वाली सम्मति; (वोट)। [क्रि.वि.] 1. नहीं; न 2. निषेध के अर्थ में।

मतंग (सं.) [सं-पु.] 1. हाथी; गज 2. बादल; मेघ।

मतंगी (सं.) [सं-पु.] हाथी पर सवार।

मतकेंद्र (सं.) [सं-पु.] 1. चुनाव में मतदान के लिए निश्चित किया गया केंद्र 2. वह स्थान जहाँ निर्वाचकों के लिए मतदान की व्यवस्था की जाती है; (पोलिंग बूथ)।

मतगणक (सं.) [सं-पु.] 1. एक प्रकार की मशीन जिसकी सहायता से मतों की गिनती होती है 2. मतों की गणना करने वाला व्यक्ति।

मतगणना (सं.) [सं-स्त्री.] निर्वाचन प्रक्रिया में मतों या वोटों की गिनती।

मतदाता (सं.) [सं-पु.] निर्वाचक; राय या वोट देने वाला व्यक्ति; वह व्यक्ति जिसे लोकतंत्र के क्षेत्र में मत देने का अधिकार हो; (वोटर)।

मतदातासूची (सं.) [सं-स्त्री.] किसी राज्य या देश के उन बालिग व्यक्तियों की सूची जिन्हें मतदान का अधिकार प्राप्त हो; (वोटर्स लिस्ट)।

मतदान (सं.) [सं-पु.] 1. लोकतांत्रिक व्यवस्था में या अन्य समय किसी के पक्ष में अपना मत देने की क्रिया; (वोटिंग) 2. राय; मत; (वोट)।

मतपत्र [सं-पु.] वह पत्र या परचा जिसपर चिह्न लगा कर उसे मतदान पेटिका में डाला जाता है (वोटिंग पेपर); (बैलेट पेपर)।

मतपेटी (सं.) [सं-स्त्री.] वह पेटी या डिब्बा जिसमें चुनाव के समय मतदाता अपना मतपत्र डालता है; (बैलेटबॉक्स)।

मतप्रार्थी (सं.) [सं-पु.] 1. वोट माँगने वाला व्यक्ति; निवेदक 2. किसी क्षेत्र के मतदाताओं के पास जाकर अपने पक्ष में मत देने की प्रार्थना करने वाला व्यक्ति; मतानुयाचक।

मतभिन्नता (सं.) [सं-स्त्री.] 1. दो या दो से अधिक व्यक्तियों के मतों में होने वाली भिन्नता या विरोध; विचारों की भिन्नता 2. राय या विचारों का न मिलना; मतवैभिन्य; आपस में मत का न मिलना 3. किसी दल या समूह के सदस्यों में किसी विषय पर होने वाला मतभेद।

मतभेद (सं.) [सं-पु.] राय न मिलना; मत की भिन्नता; मतांतर; वैमत्य; पारस्परिक मतभेद।

मतमतांतर (सं.) [सं-पु.] 1. किसी विषय के पक्ष और विपक्ष में आने वाले अनेक मत 2. मत परिवर्तन; मतभेद।

मतरुक (अ.) [वि.] निरस्त; ख़ारिज; रद्द।

मतलब (अ.) [सं-पु.] 1. तात्पर्य; अर्थ 2. किसी पद, वाक्य और शब्द का मायने या अर्थ 3. स्वार्थ; अपने भले या हित का विचार 4. मन में रहने वाला आशय या उद्देश्य।

मतलबी (अ.) [वि.] स्वार्थी; ख़ुदगरज़; स्वार्थपरायण; अपना मतलब निकालने वाला।

मतला (अ.) [सं-पु.] ग़ज़ल का पहला शेर।

मतली [सं-स्त्री.] उलटी या कै करने की इच्छा या क्रिया; जी-मिचलाना; मिचली।

मतलूबा (अ.) [वि.] 1. जिसकी चाहत की गई हो 2. माशूका; प्रेमिका।

मतवाद (सं.) [सं-पु.] 1. वह मत जो वाद या सिद्धांत के रूप में प्रयोग होता हो 2. किसी मत या विचारधारा को अन्य मतों से अधिक श्रेष्ठ सिद्ध करने का आग्रह या दुराग्रह।

मतवादी (सं.) [सं-पु.] 1. किसी मत या विचारधारा का समर्थक 2. किसी मत का प्रतिपादक। [वि.] मत या सिद्धांत संबंधी।

मतवाला (सं.) [वि.] 1. उन्मत्त; बदमस्त; नशे में चूर 2. उत्साही 3. पागल। [सं-पु.] प्राचीन समय में शत्रुओं को मारने के लिए पहाड़ या किले पर से लुढ़काया जाने वाला भारी पत्थर।

मत विभाजन (सं.) [सं-पु.] मतभेद; मतभिन्नता।

मत विभिन्नता (सं.) [सं-स्त्री.] 1. मत या विचारों की विभिन्नता 2. मतवैभिन्य 3. राय या विचार की असमानता 4. वैचारिक मतभेद।

मत संग्रह (सं.) [सं-पु.] 1. मतों को एकत्र या इकट्ठा किया जाना 2. जनमत-संग्रह।

मतांतर (सं.) [सं-पु.] अपने मत या धर्म को छोड़कर अन्य मत या धर्म को अपनाने की क्रिया या भाव; मत परिवर्तन; मतभेद; दूसरा मत; भिन्न मत।

मतांतरण (सं.) [सं-पु.] मत में परिवर्तन होने की क्रिया या भाव; मत परिवर्तन; धर्म परिवर्तन।

मतांध (सं.) [वि.] 1. जो केवल अपने विचार को श्रेष्ठ मानता हो; अनुदार; दुराग्रही; अड़ियल; उग्र 2. संकीर्ण; असहिष्णु; असहनशील; उग्रवादी 3. कट्टरपंथी; तास्सुबी 4. बंददिमाग।

मताग्रह (सं.) [सं-पु.] अपने मत या विचार की स्थापना या प्रचार के लिए किया जाने वाला आग्रह या हठधर्मिता।

मताग्रही (सं.) [वि.] मत या विचार को मनवाने के लिए हठ या आग्रह करने वाला।

मताधिकार [सं-पु.] 1. किसी चुनाव में आम नागरिक को मत देने का अधिकार जो शासन या व्यवस्था से प्राप्त हो; मत देने का हक 2. रिआयत 3. सुविधा।

मताधिकारी (सं.) [वि.] 1. मत देने का अधिकारी 2. निर्वाचन करने वाला; निर्वाचक; (वोटर)।

मतानुगमन (सं.) [सं-पु.] किसी मत या विचार का समर्थन करने की क्रिया या भाव; अनुगमन; अनुसरण; तरफ़दारी; समर्थन; हिमायत।

मतानुगामी (सं.) [वि.] 1. किसी मत या विचार का समर्थक या अनुगामी; अनुयायी; तरफ़दार; समर्थक; हिमायती; पंथी; पक्षधर 2. पिछलग्गू; पिट्ठू; मतावलंबी; झंडाबरदारी।

मतानुयायी (सं.) [सं-पु.] 1. किसी धार्मिक संप्रदाय या किसी व्यक्ति के मत या विचारों को मानने वाला व्यक्ति; मत विशेष का अनुगमन करने वाला व्यक्ति; मतावलंबी; मतानुगामी 2. पंथी; अनुचर; पिछलग्गू; समर्थक; हिमायती; पक्षधर।

मतालबा (अ.) [सं-पु.] 1. माँग; इच्छा 2. अपेक्षा 3. तकाज़ा।

मतावलंबी [सं-पु.] 1. मत या सिद्धांत का अनुयायी 2. धर्म विशेष का अवलंबन करने वाला व्यक्ति।

मति (सं.) [सं-स्त्री.] 1. प्रज्ञा; अक्ल; बुद्धि; समझ 2. इच्छा; कामना 3. अभिप्राय 4. याद; स्मृति।

मतिगति (सं.) [सं-स्त्री.] विचारधारा; विचारसरणी; सोचने का ढंग।

मतिभंगी (सं.) [वि.] मति या बुद्धि को नष्ट करने वाला।

मतिभ्रंश (सं.) [सं-पु.] सोचने-समझने की शक्ति या बुद्धि की असमर्थता; बुद्धिभ्रंश; पागलपन।

मतिभ्रम (सं.) [सं-पु.] 1. बुद्धि की भ्रांति 2. बीमारी या नशे आदि के कारण होने वाला वह भ्रम जिसके फलस्वरूप व्यक्ति कुछ का कुछ समझने लगता है; पागलपन।

मतिभ्रांत (सं.) [वि.] 1. मंदबुद्धिवाला; कमअक्ल 2. चकित; भ्रमित।

मतिमंद (सं.) [वि.] 1. मंदबुद्धि; नासमझ; कम बुद्धि रखने वाला 2. बेवकूफ़; मूर्ख।

मतिमान (सं.) [वि.] जिसमें मति हो; बुद्धिमान; समझदार; ज्ञानी।

मतिहीन (सं.) [वि.] कमअक्ल; बुद्धहीन; विवेकहीन; अज्ञानी; मूर्ख।

मती (सं.) [वि.] 1. मत या विचार रखने वाला 2. किसी मत या संप्रदाय का अनुयायी। [सं-स्त्री.] सामर्थ्य, जैसे- बुद्धिमती।

मतैक्य (सं.) [सं-पु.] मतों की समानता; दो या दो से अधिक व्यक्तियों की राय का समान होना; एक ही राय का होना; विचारों में होने वाली एकता।

मत्त (सं.) [वि.] 1. मस्त; नशे आदि में चूर; उन्मत्त 2. घमंडी।

मत्तकाशी (सं.) [वि.] बहुत सुंदर; रूपवान।

मत्तगयंद (सं.) [सं-पु.] (काव्यशास्त्र) सवैया छंद का एक भेद जिसके प्रत्येक चरण में सात भगण और दो गुरु होते हैं।

मत्तता (सं.) [सं-स्त्री.] मस्ती; मतवालापन।

मत्ता (सं.) [परप्रत्य.] 1. 'मान' से परिवर्तन होकर बनने वाला भाववाचक रूप, जैसे- बुद्धिमान से बुद्धिमत्ता 2. 'मत' का वह रूप जो भाववाचक शब्द बनाने के लिए प्रत्यय के रूप में शब्दों के अंत में लगता है, जैसे- नीतिमत्ता।

मत्था [सं-पु.] 1. मस्तक; ललाट; माथा 2. किसी वस्तु का ऊपरी या अगला भाग। [मु.] मत्थे मढ़ना : ज़िम्मे लगाना।

मत्सर (सं.) [सं-पु.] 1. द्वेष; विद्वेष; डाह; जलन 2. ईर्ष्याजन्य मानसिक स्थिति 3. क्रोध; गुस्सा।

मत्सरी (सं.) [सं-पु.] वह जिसके मन में मत्सर हो; ईर्ष्यालु; जलने वाला या द्वेष रखने वाला व्यक्ति।

मत्स्य (सं.) [सं-पु.] 1. मछली 2. (पुराण) नारायण 3. प्राचीन विराट देश का दूसरा नाम 4. विष्णु के दस अवतारों में से पहला 5. मीन नामक राशि।

मत्स्यगंधा (सं.) [सं-स्त्री.] 1. वह जिसके शरीर से मछली की गंध आती हो 2. (महाभारत) वेदव्यास की माता; सत्यवती 3. जलपीपल।

मत्स्यागार (सं.) [सं-पु.] काँच का वह पारदर्शी पात्र जिसमें मछलियाँ तथा अन्य जलीय जंतु पाले जाते हैं; (एक्वेरियम)।

मत्स्योदरी (सं.) [सं-स्त्री.] (महाभारत) वेदव्यास की माता; सत्यवती।

मथना (सं.) [क्रि-स.] 1. दूध या दही को मथानी आदि से बिलोना 2. ध्वंस करना; नष्ट करना 3. किसी बात को बार-बार सोचना 4. दलन करना 5. घूम-घूमकर पता लगाना 6. छानना।

मथनी [सं-स्त्री.] 1. मथने की क्रिया या भाव 2. वह मटका जिसमें दही मथा जाता है; मथनिया 3. मथानी; रई।

मथानी (सं.) [सं-स्त्री.] दही मथने के लिए काठ का बना हुआ एक प्रकार का उपकरण; रई।

मथित (सं.) [वि.] 1. जो मथा गया हो; बिलोया हुआ 2. मथकर या घोलकर अच्छी तरह मिलाया हुआ 3. मट्ठा; छाछ 4. {ला-अ.} पीड़ित; शोषित।

मथुरा (सं.) [सं-स्त्री.] पश्चिमी उत्तर प्रदेश की एक प्रसिद्ध नगरी, जो कृष्ण की जन्म-स्थली मानी जाती है।

मद1 (सं.) [सं-पु.] 1. अहंकार; अभिमान 2. नशा; मस्ती 3. उन्माद; उन्मत्तता; पागलपन 4. आनंद; प्रसन्नता 5. मद्य; शराब 6. कामुकता; लंपटता 7. मतिभ्रम।

मद2 (अ.‍) [सं-पु.] 1. खाता 2. लेखा या हिसाब लिखने में प्रयुक्त वह लंबी रेखा जिसके नीचे लेखा या हिसाब लिखा जाता है।

मदक [सं-स्त्री.] अफ़ीम से बनाया जाने वाला एक नशीला पदार्थ जिसे तंबाकू की तरह पिया जाता है।

मदकल (सं.) [वि.] 1. मतवाला; मस्त; मदोन्मत्त 2. धीरे-धीरे प्रेमालाप करने वाला 3. बावला; पागल 4. मद में विह्वल होने वाला।

मदकाल (सं.) [सं-पु.] वह काल या समय जब जीव-जंतु संतानोत्पत्ति के लिए यौन-क्रिया में रत रहते हैं; गर्भाधान काल।

मदगर्वित (सं.) [वि.] मद में चूर; अभिमानी; घमंडी।

मदद (अ.) [सं-स्त्री.] 1. सहायता; सहयोग; (हेल्प) 2. सहयोग के रूप में दिया गया रुपया-पैसा 3. दान।

मददगार (अ.+फ़ा.) [वि.] 1. सहायक; सहयोगी 2. हमदर्द 3. पक्षपाती; पक्षधर 4. प्रोत्साहक।

मदन (सं.) [सं-पु.] 1. कामदेव 2. संभोग; रतिक्रिया; काम 3. प्रेम 4. एक प्रकार का गीत 5. मोम 6. भ्रमर; भौंरा 7. वसंतकाल। [वि.] मदकारक; नशीला।

मदनक (सं.) [सं-पु.] 1. मदन नामक वृक्ष 2. मोम 3. खदिर; खैर 4. मौलसिरी 5. धतूरा 6. दौना नामक पौधा।

मदनकंटक (सं.) [सं-पु.] (साहित्य) सात्विक अनुभूति या रोमांच।

मदनगोपाल (सं.) [सं-पु.] कृष्ण का एक नाम।

मदनमस्त (सं.) [सं-पु.] चंपा की जाति का तीव्र गंध वाला एक पुष्पवृक्ष।

मदनमोहन (सं.) [सं-पु.] 1. रूप और व्यक्तित्व से प्रभावित करने वाला व्यक्ति 2. कृष्ण का एक नाम।

मदनललित (सं.) [वि.] सहवासरत; कामक्रीड़ा में लीन। [सं-पु.] कामक्रीड़ा; संभोग।

मदना (सं.) [सं-स्त्री.] 1. कस्तूरी 2. मैना 3. सुरा; मदिरा 4. एक प्रकार की लता।

मदनालय (सं.) [सं-पु.] 1. योनि; भग 2. (ज्योतिष) जन्मकुंडली में सातवाँ स्थान।

मदनीय (सं.) [वि.] 1. प्रेम या राग उत्पन्न करने वाला 2. उत्तेजक; मादक 3. नशा उत्पन्न करने वाला।

मदनोत्सव (सं.) [सं-पु.] 1. वसंत पंचमी के अगले दिन या चैत्र शुक्ल द्वादशी को मनाया जाने वाला प्राचीन समय का एक प्रेम संबंधी उत्सव; वसंतोत्सव 2. होली; फाग।

मदफ़न (अ.) [सं-पु.] 1. शव गाड़ने की जगह; कब्रिस्तान 2. मुर्दे गाड़ने का गड्ढा; कब्र।

मदफ़ून (अ.) [वि.] 1. दफ़न किया हुआ 2. गाड़ा हुआ।

मदमत्त (सं.) [वि.] 1. मतवाला; मदिरोन्मत्त 2. मदमस्त 3. अहंकारी।

मदमस्त (सं.) [वि.] 1. मतवाला 2. शराबी; पियक्कड़ 3. मदहोश; उन्मत्त।

मदमाता (सं.) [वि.] 1. मतवाला; मस्त 2. कामुक।

मदयिता (सं.) [वि.] 1. मदोन्मत्त करने वाला; मादक; उत्तेजक 2. नशा उत्पन्न करने वाला 3. आनंदित करने वाला।

मदर (इं.) [सं-स्त्री.] 1. माँ; माता; जननी; वालिदा 2. ईसाई भिक्षुणी के लिए संबोधन।

मदरसा (अ.) [सं-पु.] वह पाठशाला या विद्यालय जहाँ इस्लामिक तौर-तरीके से शिक्षा दी जाती हो।

मदहोश (फ़ा.) [वि.] 1. नशे में मस्त 2. नशे के कारण जिसके होश ठिकाने न हो 3. मतवाला; मत्त 4. हतबुद्धि 5. जिसे अपनी सुध न हो; बेसुध।

मदांध (सं.) [वि.] 1. जो मद के कारण अंधा अर्थात विवेकहीन हो रहा हो 2. जो किसी सफलता के नशे में गर्व से फूला हुआ हो 3. नशे में धुत्त; मदोन्मत्त 4. अहंकारी; घमंडी।

मदांधता (सं.) [सं-स्त्री.] 1. मदांध या नशे में होने की अवस्था या भाव 2. किसी गुण या शक्ति का अहंकार।

मदार1 (सं.) [सं-पु.] आक नामक पौधा। [वि.] चालाक; धूर्त।

मदार2 (अ.) [सं-पु.] 1. दौरा करने का रास्ता; भ्रमणमार्ग 2. आधार; आश्रय 3. निर्भरता 4. ग्रहों का भ्रमण मार्ग; कक्षा।

मदारिया [सं-पु.] एक प्रकार का मिट्टी का हुक्का।

मदारी (अ.) [सं-पु.] 1. बंदर, भालू नचाने वाला व्यक्ति; कलंदर 2. वह जो जादू आदि का खेल दिखाता हो; ऐंद्रजालिक; नटवर; बाज़ीगर।

मदालस (सं.) [वि.] नशे के कारण सुस्त पड़ा हुआ; मदिरोन्मत्त। [सं-पु.] 1. आलस्य; ख़ुमार 2. ढीलापन।

मदालापी (सं.) [सं-पु.] कोयल; कोकिल।

मदासक्त (सं.) [वि.] 1. जो मद या नशे का आदी हो; व्यसनी 2. मद्यप; नशेड़ी; नशेबाज़।

मदिर (सं.) [वि.] 1. मद या नशा उत्पन्न करने वाला; नशीला 2. मद से भरा हुआ; मादक 3. मत्त; मस्त।

मदिरनयन (सं.) [वि.] सुंदर या नशीली आँखोंवाला।

मदिरा (सं.) [सं-स्त्री.] नशीला तरल पदार्थ; शराब; दारू; मद्य।

मदिरालय (सं.) [सं-पु.] शराबख़ाना; मद्यशाला; कलवरिया।

मदिरालस (सं.) [सं-पु.] शराब या मदिरा पान से उत्पन्न होने वाला आलस्य; नशा; ख़ुमारी।

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