hindisamay head
डाउनलोड मुद्रण

अ+ अ-

कविता

दरिया रेत की
वाज़दा ख़ान


काँटों से छिलती
रेजा रेजा होती

वो अपने दरिया तक पहुँची
दरिया ने उदासीनता
अख्तियार कर ली।

 


End Text   End Text    End Text