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कविता

भैंस के आगे
उमेश चौहान


भैंस के आगे बीन बजे पर
भैंस खड़ी पगुराए,


भैंस के आगे लूट मची पर
भैंस न आँख मिलाए,

भैंस बड़ी ही खाल की मोटी
मार सभी सह जाए,

भैंस बड़े चिकने घट जैसी
चिंता नहीं समाए,

भैंस पहन ले सदरी-कुर्ता
कोट-पैंट घबराए,

भैंस नियम-कानून रचे तो
जल में देश समाए,

भैंस अकेली चलती है तो
गली-सड़क थम जाए,

भैंसों का जब झुंड चले तो
जग सारा जमुहाए।

 


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