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कविता

प्रजातंत्र : किस देवता की उपासना करें हम
जसबीर चावला


जिस पथ महाजन जायें
अनुसरण करें वही पथ
पंचतत्र में लिखा
*
महाजनी सभ्यता का प्रजातंत्र
आभा चकाचौंध चर्चित
महिमामंडित महाजन टोला
ढोंगी संतों के आश्रम में
पत्रकारिता की चौखट पर
तहलका मचाता
*
कुछ भ्रष्ट उद्योग जगत की ओर
पलायनवादी फिल्मों में कुछ
झांसेबाज जमीन / भवन के धंधे में
कई रास्ते खुलते
माफियाओं के अड्डे
साहित्य कला की दुकानें
खिड़कियाँ
पद्म पुरस्कारों के दरवाजे
सब खुलते / मिलते
कुटिल राजनीति के 'राज'-मार्ग
पगडंडियाँ
अदालतों / जेल में
कुछ विधान सभाओं / संसद में
*
कोई मुझे बताये
किस राह चलें
किस महाजन के पथ का अनुसरण करें हम
किस देवता की उपासना करें हम हवि देकर

 


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