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कविता

ईशान कोण : फील सेड
जसबीर चावला


कौरवों की पराजय के बाद
किसी पांडव के मन में
यह ख्याल
आया होगा
जो हारे / मरे
हमारे अपने थे
सखा-बंधु
साझा हो गया होगा
यह विचार
पांडव बंधुओं में
००
चिंतन हुआ
यह सब क्यों
रक्तपात
क्या अपरिहार्य था
भर गया होगा मन
आत्म ग्लानि से
पश्चात्ताप / निस्सारता
वितृष्णा से
००
प्रायश्चित होगा
चल पड़े
पांडव
द्रोपदी और कुत्ते के संग
ईशान कोण
फिर
हिमालय की और
००
नहीं जानता
इन दिनों
भीषण आपाधापी
हिंसक विचार / व्यवहार में
फील गुड / फील सेंड से परे
कहीं / कोई
खोज रहा है
अपना ईशान कोण
अपना हिमालय
अपने हिस्से की
ग्लानि
अपना पश्चात्ताप

 


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