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कविता

धर्मं पताकाएँ
जसबीर चावला


उन्होंने
हरा रंग
चुरा लिया
उन्होंने सफेद
उन्होंने केशरिया

उन्होंने
नोच लिया
भगवा

इस उस ने भी
बाँट लिया
इंद्रधनुष को
और
बना ली
धर्म ध्वजाएँ / पताकाएँ / झंडे / निशान साहेब

तब से
धर्म पीछे छूट गया
झगड़ा
रंगों में ही हो गया

 


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हिंदी समय में जसबीर चावला की रचनाएँ