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कविता

मुकदमा ईश्वर बनाम धर्माचार्य
जसबीर चावला


क्रुसेड
जिहाद
धर्मयुद्ध
*
धर्म
या
युद्ध?
युद्धों से ज्यादा
धर्मयुद्ध
*
कितने भवसागर
पार किये
कितने बंदे
मार दिए
कितनी बस्तियाँ
वीरान करीं
कितने
बलात्कार किये
*
कयामत के दिन / फैसले की घड़ी
खुदा / ईश्वर / धर्मराज
अभियोजन / वकील / दलील / नजीरें
क्या पूछेगा
सवाल / जवाब
हिसाब?
*
खुलेगा चिट्ठा
सेवकों / मोमिनो
रामभक्तों का?
*
और ईश्वर जो
तू था
तो चुप क्यों था?

 


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हिंदी समय में जसबीर चावला की रचनाएँ