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कविता

संतों की आचार संहिता
जसबीर चावला


'संतन को कहा सीकरी सो काम'
व्यथित हुए / संत कुंभनदास
लिखा
सीकरी से लौट कर
अकबर के बुलावे पर

अब बहसों से लगता है
जरूरत है संतों को
आचार संहिता की
बना जो कोड आफ कंडक्ट / संहिता
शामिल होंगे हर धर्म / आस्था / संप्रदाय के संत
फादर / ज्ञानी / ग्रंथी / मौलाना / मौलवी / महाप्रज्ञ
बंगाली बाबा / तांत्रिक / वशीकरण / महासिद्ध

सब लिखा जायेगा
ताकि वक्त जरूरत पर काम आये
कोई छूट न जाये
संतों के थाने / नैतिक पुलिस / खुदाई खिदमतगार
देखी जायेंगी लँगोट / नियत में खोट
नार्को / एच आई वी टेस्ट होंगे

डेरों / मठों / आश्रमों / खानाकाहों से
दूर होंगी दुकानें
शिलाजीत / सिद्ध मकरध्वज / कुश्ते / दारू / चरस की
दूर होंगे वर्किंग गर्ल्स / स्कूल / हॉस्टल
नीली फिल्में / गरम साहित्य
बँधेंगे सदाचार के तावीज / गंडे
कड़े होंगे नियम / कायदे / कानून

यक्ष प्रश्न
घंटियाँ कम हैं बजने के लिये
बिल्लियाँ अनेक
बाँधेगा कौन
उनके गले

 


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