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कविता

खबर है कि कोई खबर नहीं
जसबीर चावला


केलिफोर्निया / बाली के जंगलों में भीषण आग
चीन की कोयला खदानों में विस्फोट
बांग्ला देश में भयंकर बाढ़ / नौकाओं का डूबना / जलप्लावन
सैकड़ों / हजारों का मरना / लाखों बेघरबार
जापान में भूकंप
हिंद महासागर में सोमाली डाकुओं द्वारा जहाजों पर हमला
नाविक बंधक / सौदेबाजी / लाखों डालर में रिहाई
घर वालों के आरोप / सरकार की ढिलाई
पेशावर / कराची / बगदाद / गाजा पट्टी
बसों / स्कूलों / मस्जिदों में / बमों के आत्मघाती हमले
शिया / सुन्नी / अहमदिये / कादियानी मसले
फ्लोरिडा / ओखलाहोमा में हरिकेन / चक्रवात / तूफान
न्यू यार्क / शिकागो में कई फुट गहरी बर्फ की चादर
खबर क्या है / सबको पता है
रोज की सुर्खियाँ हैं
अखबारी पन्नों की
बेमन से उड़ती निगाह वाली सुर्खियाँ
छोड़ो / वहाँ / यहाँ / ऐसा ही होता है
होना ही है
कोई संवेदना / स्फुरण / स्पंदन नहीं
सिहरन / उत्सुकता / सहानुभूति नहीं
न मन तनिक रुकता / अटकता / सोचता है
न ही चाय के प्याले में तूफान आता है
**
मेरे देश के हर शहर / गाँव में
हत्या / लूट / बलात्कार / चोरी
डकैती / आगजनी / सीनाजोरी
भारतीय दंड विधान की हर धारा
घट रही हर पल / क्षण
टेक्सचोरी / जाँचें / छापे
जाँच आयोग
किस किस को नापें
हर वाहन / रेल / टकरानें / उलटनें के लिये
लू से / शीत लहर / बाढ़ / आग से
मरने के लिये
हम अभिशप्त हैं
हर त्रासदी के लिये
**
दिन प्रतिदिन / हर माह / हर साल
खबरें नहीं
अखबारी कर्मकांड
गढ़ी हुई
प्रायोजित पेड खबरें
एक ही शब्दावली
बेरंग / बेरस खबरें
कब नहीं घटी ये घटनाएँ
कल भी / आज भी / कल भी घटेगी
चौंकना कैसा
**
किस किस को याद कीजिये
किस किस को रोइये
आराम बड़ी चीज है
अखबार ढक के सोइये

 


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हिंदी समय में जसबीर चावला की रचनाएँ