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कविता

बौनों का इतिहास
जसबीर चावला


बौने कद से नहीं
दिमाग और मन से हैं
इतिहास में सेंध
अपनी नग्नता / दारिद्रय छुपाते
ढूँढ़ते गलियाँ
जहाँ से घुस सकें
कर सकें अपनी दावेदारी
इतिहास के चमकते पन्नों पर
आगे करते
प्रतीक / नायक
चुराते पुण्य / ख्याति
हरते संतई
करते वार
छुपते उनकी आड़
झूठ पर झूट
हाँ नंगो का भी अतीत होता है
और बौनों का भी इतिहास

 


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