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कविता

युद्ध की मानसिकता इन दिनों
जसबीर चावला


क्या तुम्हें लगता नहीं
हम / देश जी रहा
सतत युद्ध की मानसिकता में
दनादन दगते गोले
शब्दों / कटाक्ष के
चलते रहते जहर बुझे तीर / तलवार
इन दिनों
*
बँट गये / बाँटे गये हम
असुविधा / सुविधानुसार
सेनाओं / उप सेनाओं में
आप असहमत हैं मुझ से
मित्र नहीं शत्रु है
आप कलिंग के हैं
या अशोक की और
कौरव हैं या पांडव
निरंतर महाभारत घट रहा
देश कुरुक्षेत्र
इन दिनों
*
बेजरूरत हिंसक
विचार में व्यवहार में
हिंदू हैं या मुसलमान / सिख या ईसाई
और कोई कालम नहीं कागज पर
जहाँ बेखौफ होकर लिख सकें
शब्द इनसान
इन दिनों
*
हुंकार रैली / महारैली
शंखनाद रैली
चित्कार / फुत्कार / धिक्कार दिवस
थू थू रैली / स्वाभिमान रैली
रैलियों की रेलमपेली
इन दिनों
*
आप पंचायत / खाप पंचायत
महा पंचायत
महामृत्युजंय जाप पंचायत
जय घोष
देश में हाँका
तुरही नाद / नगाड़े
युद्ध / युद्धोन्माद नहीं तो क्या
कौन सुने तूती की आवाज
इन दिनों
*
आईने में देखता हूँ
जब जब अपना चेहरा
घबरा जाता हूँ
हिंस्र होता जाता है
मेरी भी आँखें लाल / माथे पर बल
भृकुटि तनी रहती है
इन दिनों

 


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