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कविता

पंचायती राज
जसबीर चावला


आज नजर नहीं आया
वो प्रेमी जोड़ा
जो
मिलता था रोज
प्रातः भ्रमण में
ले हाथों में हाथ
हँसता / कूकता / किलकारी भरता
चुपके से प्यार करता
सपने बुनता / सँजोता
सुखद भविष्य के

दूसरे दिन
अखबारी खबर थी
लटकाया गया है
पेड़ से
एक प्रेमी युगल
पंचायत के फैसले से
दोनों की जात अलग थी

एक और जोड़ा
लटकाया गया
खाप के आदेश से
एक ही गोत्र था उनका

सच कहा है
प्राण जाये पर
जात न जाये

 


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हिंदी समय में जसबीर चावला की रचनाएँ