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कविता

सरगम / मनरेगा
जसबीर चावला


मुदित हुआ
मन
सरपंच / नेता पुत्र का
जानकर
पैसा आ गया है
कोषागार में
मनरेगा का

संगीत शिक्षक ने
पुत्र द्वय से कहा
बेटा गाओ
सा रे ग म
दोनो ने गाया
सारेगम मनरेगा
मन रे'गा'
गा मेरे मन गा
मन तू नाच गा
बस गा
मन रे'गा'
सफल होगी तेरी आराधना
मन रे'गा' / मन रे'गा'

 


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हिंदी समय में जसबीर चावला की रचनाएँ