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कविता

जिनको पता नहीं होता
मिथिलेश कुमार राय


ललटुनमा के बाउ
ललटुनमा की माई
आ खुद्दे ललटुनमा
तीनों जने की कमाई
एक अकेले गिरहथ की कमाई के
पासंग के बराबर भी नहीं ठहरता

आखिर क्यों
यह एक सवाल
ललटुनमा के दिमाग में
जाने कब से तैर रहा था
कि बाउ
आखिर क्यों

क्योंकि बिटवा
उनके पास अपनी जमीन है
और हम
उनकी जमीन में खटते हैं

और हमारी जमीन बाउ

बाउ को तो खुद्दे पता नहीं है
अपनी जमीन के इतिहास के बारे में
और आप तो जानते हैं
कि जिनको पता नहीं होता
उनसे अगर सवाल किए जाएँ
तो वे चुप्पी साध लेते हैं


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