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कविता

धनिया के फूल
रेखा चमोली


मेरे सामने की क्यारी में
खिल रहे हैं
धनिया के फूल
सफेद, हल्का नीला, मिला जुला सा रंग
नाजुक पंखुड़ियाँ, कोमल खुशबूदार पत्तियाँ
चाहो तो पत्तियों को डाल सकते हो
दाल, सब्जी में
या बना सकते हो लजीज चटनी
ये छोटे-छोटे धनिया के फूल
नहीं करते कुछ खास आकर्षित
गुलाब या गेंदे की तरह
नहीं चढ़ते किसी देवी-देवता के
चरणों में
किसी नवयुवती ने नहीं किया
कभी इनका श्रृंगार
पर ये नन्हे-नन्हें फूल
जब बदल जाएँगे
छोट-छोटी हरी दानियों में
तो खुद ही बता देंगे
अपना महत्व
कि इनके बिना संभव नहीं है
जायकेदार, स्वादिष्ट भोजन।

 


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