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कविता

राजा डरता है
प्रमोद कुमार तिवारी


एक था राजा बहुत महान
अदब मानता दुनिया जहान
पर राजा रहता परेशान
जाने कैसा रोग था!
किसी के हँसने पर
सेना की परेड करवाता
बच्चों को मुस्कराते देख
करता खजाने की जाँच
रानी के हँसने पर
मारता तमाचा
और बेटी के हँसने पर
बार-बार देखता आईना।
एक था राजा बहुत महान
अदब मानता दुनिया जहान।

राजा ने जारी किया फरमान
हँसी के खिलाफ
जगह-जगह पटिृयाँ लगवाईं
'हँसना कानूनन जुर्म है'
और लगाया जोरदार ठहाका
लगभग रोने जैसी आवाज में।
राजा ने छोड़े आतंक के हथियार
किया पूरा बंदोबस्त
मुस्कान तक के खिलाफ।

पर खूब हँसते लहलहाते पौधे
खिलखिलाती नदियाँ राजा का मजाक उड़ातीं
झरने गाते गीत, चिड़ियाँ छेड़तीं तराने
और आँख मिचमिचाते तारे बताते
कि राजा कितना कमजोर है
और डरपोक भी।
इनके साथ बैठ मैं भी लगाता था ठहाके।

पर राजा आखिर राजा था
और प्रजा तो प्रजा थी ही
सदियों से।
प्रजा ने हँसना छोड़ दिया
और एक दिन लोगों के होठों पर
हँसी की जगह पपड़ी थी
पपड़ियाँ विरोध करतीं
हँसने का, तेज आवाज में बोलने का,
मुँह खोलने का भी।
पपड़ियाँ कहतीं -
हँसने का नहीं यह आदेश मानने का समय है
पपड़ियाँ मिलकर समझातीं -
आज सिर्फ पागल हँसते हैं
सारी पपड़ियाँ मिलकर साजिशी स्वर में कहतीं -
राजा का कहा मानो, फायदा इसी में है।
वे लेतीं फायदा
पपड़ी की एक और परत के बदले में।
पपड़ियों के जंगल में खोता जा रहा था मैं
मेरे होठों पर भी चढ़ने लगी थी पपड़ी
कि एक दिन मिला
राजा के टैंक में रहनेवाला चूहा
जोरदार ठहाके लगाते हुए बताया
कि उसने राजा की एक भी चड्डी
साबुत नहीं छोड़ी है।
कि राजा पोला और नंगा है।
महल के रोशनदान में रहनेवाली गौरैया ने
चूहे का समर्थन किया
और हमने मिलकर लगाया एक दमदार ठहाका।
हमारी हँसी की खबर पहुँच गई उन तक
एक साथ जन्मे कई प्रश्नवाचक
अभी भी हँस रहा है!
मतलब सोचता भी होगा
खतरनाक है यह
जासूस भेजे, जाँच बिठाए, सारे विकल्प आजमाए
और कैद कर दिया गया मैं
सख्त पहरा
दरबान तक को मिलने की मनाही
कि हँसी की भयानक छूत फैलने न पाए
पर हँसी थी कि रुकने का नाम ही न लेती
वैसे रोक लेता
पर राजा का ध्यान आते ही
पुरानी खाँसी सी उबल पड़ती।
मुँह बंद रखने का हुक्म मिला
राजा आया देखने
मैंने हँसी रोक ली पर होंठ तिरछे हो गए
फट पड़ वह रखवालों पर
होंठ सिलो, टेप चिपकाओ, जाब लगाओ
चाहे जो करो, पर रोको
रोको इसकी हँसी।
अगले दिन राजा फिर आया
और चेहरे की चमक देखते ही
आपे से बाहर हो चिल्लाया -
खत्म करो इसे! जल्दी!
एक शमशीर हवा में लहराई
जाते समय विजयी भाव से
राजा ने डाली नजर मेरे लुढ़के सिर पर
मुस्कुराती खुली आँखों से
मिली उसकी नजर...
सन्न रह गया वह
पूरी ताकत से निकाल रहा राजा
सीने में धँसी हँसी को
है राजा बुरी तरह हलकान
जिसका अदब मानता दुनिया जहान
एक था राजा बहुत महान
था अदब मानता दुनिया जहान।

 


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