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कविता

होने का दावा
भवानीप्रसाद मिश्र


अपने ही सही होने का दावा
दावानल है
फल है चारों तरफ धू-धू
चारों तरफ मैं-मैं
चारों तरफ तू-तू

 


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हिंदी समय में भवानीप्रसाद मिश्र की रचनाएँ