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कविता

सभी लोग और बाकी लोग
संजय चतुर्वेदी


सभी लोग बराबर हैं
सभी लोग स्वतंत्र हैं
सभी लोग हैं न्याय के हकदार
सभी लोग इस धरती के हिस्सेदार हैं
बाकी लोग अपने घर जाएँ

सभी लोगों को आजादी है
दिन में, रात में आगे बढ़ने की
ऐश में रहने की
तैश में आने की
सभी लोग रहते हैं सभी जगह
सभी लोग, सभी लोगों की मदद करते हैं
सभी लोगों को मिलता है सभी कुछ
सभी लोग अपने-अपने घरों में सुखी हैं
बाकी लोग दुखी हैं तो क्या सभी लोग मर जाएँ

ये देश सभी लोगों के लिए है
ये दुनिया सभी लोगों के लिए है
हम क्या करें अगर बाकी लोग हैं सभी लोगों से ज्यादा
बाकी लोग अपने घर जाएँ।

 


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