डाउनलोड मुद्रण

अ+ अ-

कविता

सात हजार साल बाद
संजय चतुर्वेदी


कोई सात हजार साल बाद खोला उसने दरवाजा
बदल गई थी भाषा
लेकिन बदले नहीं थे आदमियों के आपसी संबंध
और वही आदमी था आज भी राजा
जिसके डर से वह बंद हुआ था
सात हजार साल पहले।

 


End Text   End Text    End Text

हिंदी समय में संजय चतुर्वेदी की रचनाएँ