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कविता

जिस दिन यह शहर बना था
संजय चतुर्वेदी


इस शहर में अनगिनत इमारतें हैं
दरवाजे हैं
लोग निकलते हैं उनसे हर सुबह
शाम को घुस जाते हैं वापस
उनके पास सोचने का समय नहीं
निर्णय का अधिकार नहीं
इस शहर का जो सबसे ताकतवर आदमी है
वह भी ऐसा ही है
सारे निर्णय उसी दिन ले लिए गए थे
जिस दिन यह शहर बना था।

 


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